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Meerut News: खतौली से सबक नहीं लिया तो महापौर में आसान नहीं होगी भाजपा की राह
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मेरठ। तमाम दांव-पेच के बाद भी भाजपा खतौली विधानसभा उपचुनाव में जीत की हैट्रिक नहीं लगा पाई। या यूं कहिए कि जातीय समीकरण को साधने में भाजपा यहां फेल हो गई। पार्टी को यहां अति पिछड़े समाज के लोगों के तो वोट खूब मिले लेकिन जाट-गुर्जर समाज के वोट हाथ से निकल गए। रही-सही कसर त्यागी समाज की नाराजगी से पूरी हो गई। जिस तरह से खतौली में रालोद के मदन भैया चुनाव जीते हैं, उससे अब कार्यकर्ताओं का मेरठ महापौर की सीट पर दावा और मजबूत हो गया है। रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी महापौर सीट को अपने पास रखते हैं तो भाजपा के सामने मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। ऐसे में प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा को अब हर समीकरण पर सोचना पड़ेगा।
खतौली विधानसभा चुनाव में विक्रम सैनी को टिकट दिए जाने पर भाजपा को अति पिछड़े के साथ गुर्जर, जाट, त्यागी समाज का भी खूब वोट मिला था। यही वजह थी विक्रम सैनी चुनाव जीत गए। हेट स्पीच मामले में विक्रम सैनी की सदस्यता जाने के बाद रालोद ने यहां से गुर्जर समाज से मदन भैया को प्रत्याशी बना दिया। चौधरी जयंत सिंह के लिए भी खतौली प्रतिष्ठा का चुनाव था, ऐसे में उन्होंने भी पूरी ताकत लगा दी। गांव-गांव जाकर पर्चियां बांटी। जयंत जाट समाज को साधने में कामयाब रहे। मदन भैया के गुर्जर समाज से होने के कारण भाजपा को इस समाज के वोटों में सेंध लगाने का मौका नहीं मिल सका। सपा-रालोद गठबंधन के चलते गुर्जर-जाट-मुस्लिम के साथ श्रीकांत त्यागी प्रकरण से नाराज त्यागी समाज के भी काफी वोट भाजपा नहीं ले पाई। जयंत सिंह ने आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर को साथ लेकर दलित समाज को साधने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। यही कारण रहा कि भाजपा जीती हुई सीट बड़े वोटों के अंतराल से हार गई।
रालोद नेताओं का महापौर पर दावा मजबूत
खतौली सीट तो भाजपा गंवा चुकी है, लेकिन महापौर चुनाव में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। रालोद नेताओं ने महापौर सीट पर अपना दावा मजबूत कर दिया है। रालोद मुखिया चौधरी जयंत सिंह भी इस सीट को अपने पास रख सकते हैं। ऐसे में रालोद से जाट या गुर्जर प्रत्याशी उम्मीदवार बनाए जाने से भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसा हुआ तो खतौली की तरह यहां भी समीकरण बदल सकते हैं। ऐसे में प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा को जातीय समीकरणों को साधना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
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जाट समाज ने महापौर पद पर मांगा प्रतिनिधित्व
गुर्जर समाज के बाद बृहस्पतिवार को जाट समाज की तरफ से भी भाजपा नेताओं से उनके समाज से महापौर प्रत्याशी बनाने की मांग कर दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी जाट समाज के ईमानदार और साफ छवि के प्रत्याशी को चुनाव लड़ाए। आज तक उनके समाज से महापौर का टिकट नहीं दिया गया है। इस सीट पर जाट मतदाताओं की संख्या एक लाख से अधिक है। ऐसे में महापौर पद पर इस बार समाज की अनदेखी हुई तो परिणाम सही नहीं होंगे। मांग करने वालों में जाट समाज के प्रमुख संरक्षक कर्नल एस. दुहन, अध्यक्ष चौधरी कल्याण सिंह, महामंत्री गजेंद्र सिंह पायल, चौधरी अमन सिंह और तेजपाल सिंह तोमर मौजूद रहे।
पंजाबी समाज भी है हाशिए पर
महापौर पद पर पंजाबी समाज की भी मजबूत दावेदारी है। पंजाबी समाज का कहना है कि हर वर्ग के लोगों को भाजपा ने पद दिए हुए हैं लेकिन पंजाबी समाज हाशिए पर है। वैश्य, ब्राह्मण, त्यागी, गुर्जर, अनुसूचित जाति, राजपूत सभी समाज के लोगों को पार्टी ने जिम्मेदारी दी हुई है। पंजाबी समाज के किसी भी व्यक्ति को अहम पद नहीं दिया गया है। हालांकि अब सीट ओबीसी वर्ग में आरक्षित हो जाने के कारण दावेदारी सीमित रह गई है। पूर्व महापौर हरिकांत अहलूवालिया और कैंट बोर्ड की पूर्व उपाध्यक्ष बीना वाधवा टिकट की लाइन में हैं।
आवेदन करने वालों की बढ़ रही संख्या
महापौर और पालिका-पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की सूची लंबी होती जा रही है। महापौर के लिए अब तक 40 के करीब आवेदन आ चुके हैं। जिले में नगर पालिका और नगर पंचायतों में दावेदारों की संख्या 80 के करीब पहुंच गई है। बृहस्पतिवार को राहुल चौधरी ने महानगर अध्यक्ष को आवेदन दिया।
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खतौली विधानसभा चुनाव में विक्रम सैनी को टिकट दिए जाने पर भाजपा को अति पिछड़े के साथ गुर्जर, जाट, त्यागी समाज का भी खूब वोट मिला था। यही वजह थी विक्रम सैनी चुनाव जीत गए। हेट स्पीच मामले में विक्रम सैनी की सदस्यता जाने के बाद रालोद ने यहां से गुर्जर समाज से मदन भैया को प्रत्याशी बना दिया। चौधरी जयंत सिंह के लिए भी खतौली प्रतिष्ठा का चुनाव था, ऐसे में उन्होंने भी पूरी ताकत लगा दी। गांव-गांव जाकर पर्चियां बांटी। जयंत जाट समाज को साधने में कामयाब रहे। मदन भैया के गुर्जर समाज से होने के कारण भाजपा को इस समाज के वोटों में सेंध लगाने का मौका नहीं मिल सका। सपा-रालोद गठबंधन के चलते गुर्जर-जाट-मुस्लिम के साथ श्रीकांत त्यागी प्रकरण से नाराज त्यागी समाज के भी काफी वोट भाजपा नहीं ले पाई। जयंत सिंह ने आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर को साथ लेकर दलित समाज को साधने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। यही कारण रहा कि भाजपा जीती हुई सीट बड़े वोटों के अंतराल से हार गई।
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रालोद नेताओं का महापौर पर दावा मजबूत
खतौली सीट तो भाजपा गंवा चुकी है, लेकिन महापौर चुनाव में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। रालोद नेताओं ने महापौर सीट पर अपना दावा मजबूत कर दिया है। रालोद मुखिया चौधरी जयंत सिंह भी इस सीट को अपने पास रख सकते हैं। ऐसे में रालोद से जाट या गुर्जर प्रत्याशी उम्मीदवार बनाए जाने से भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसा हुआ तो खतौली की तरह यहां भी समीकरण बदल सकते हैं। ऐसे में प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा को जातीय समीकरणों को साधना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
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जाट समाज ने महापौर पद पर मांगा प्रतिनिधित्व
गुर्जर समाज के बाद बृहस्पतिवार को जाट समाज की तरफ से भी भाजपा नेताओं से उनके समाज से महापौर प्रत्याशी बनाने की मांग कर दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी जाट समाज के ईमानदार और साफ छवि के प्रत्याशी को चुनाव लड़ाए। आज तक उनके समाज से महापौर का टिकट नहीं दिया गया है। इस सीट पर जाट मतदाताओं की संख्या एक लाख से अधिक है। ऐसे में महापौर पद पर इस बार समाज की अनदेखी हुई तो परिणाम सही नहीं होंगे। मांग करने वालों में जाट समाज के प्रमुख संरक्षक कर्नल एस. दुहन, अध्यक्ष चौधरी कल्याण सिंह, महामंत्री गजेंद्र सिंह पायल, चौधरी अमन सिंह और तेजपाल सिंह तोमर मौजूद रहे।
पंजाबी समाज भी है हाशिए पर
महापौर पद पर पंजाबी समाज की भी मजबूत दावेदारी है। पंजाबी समाज का कहना है कि हर वर्ग के लोगों को भाजपा ने पद दिए हुए हैं लेकिन पंजाबी समाज हाशिए पर है। वैश्य, ब्राह्मण, त्यागी, गुर्जर, अनुसूचित जाति, राजपूत सभी समाज के लोगों को पार्टी ने जिम्मेदारी दी हुई है। पंजाबी समाज के किसी भी व्यक्ति को अहम पद नहीं दिया गया है। हालांकि अब सीट ओबीसी वर्ग में आरक्षित हो जाने के कारण दावेदारी सीमित रह गई है। पूर्व महापौर हरिकांत अहलूवालिया और कैंट बोर्ड की पूर्व उपाध्यक्ष बीना वाधवा टिकट की लाइन में हैं।
आवेदन करने वालों की बढ़ रही संख्या
महापौर और पालिका-पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दावेदारों की सूची लंबी होती जा रही है। महापौर के लिए अब तक 40 के करीब आवेदन आ चुके हैं। जिले में नगर पालिका और नगर पंचायतों में दावेदारों की संख्या 80 के करीब पहुंच गई है। बृहस्पतिवार को राहुल चौधरी ने महानगर अध्यक्ष को आवेदन दिया।