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यहां के विधायक की ही बनती है सरकार, आजादी के बाद से आज तक का रहा है इतिहास

Sun, 12 Mar 2017 01:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ कपिल कुमार
अमर उजाला ब्यूरो/ कपिल कुमार Updated Sun, 12 Mar 2017 01:51 PM IST
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Here the legislator is formed by the government, history of Independence Since Independence
हस्तिनापुर सीट का इतिहास

देश के सबसे बड़े और अहम राज्य उत्तर प्रदेश में रिकॉर्डतोड़ जीत हासिल करने वाली बीजेपी आज देशभर में जमकर जश्न मना रही हैं। उम्मीद से भी ज्यादा सीट हासिल करने वाली भारतीय जनती पार्टी एक बार फिर से इतिहास के पन्नों पर छा गई हैं। जब इतिहास का जिक्र हो ही गया तो आज हम आपको यूपी के मेरठ जिले का वो इतिहास बताने जा रहे हैं जो हमेशा से कायम रहा हैं। हम बात कर रहे हैं मेरठ जिले की उस सीट के बारे में, जिसपर जिस भी पार्टी का नेता चुनाव जीता है सूबे में उसी की सरकार बनी हैं। आज फिर ठीक वैसा ही हुआ। इस सीट को एक तरह से हम ऐसे भी देख सकते है कि भीष्म पितामह की तरह हस्तिनापुर सीट भी प्रदेश सरकार से जुड़ी है।

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हस्तिनापुर सीट का इतिहास बरकरार

Here the legislator is formed by the government, history of Independence Since Independence
बीजेपी

हस्तिनापुर से भाजपा प्रत्याशी दिनेश खटीक ने एक बार फिर से यह सीट हासिल कर इतिहास को बरकरार रखा। परिणाम आने से पहले कुछ लोगों का कहना था कि इस बार हस्तिनापुर सीट से बसपा प्रत्याशी योगेश वर्मा जीते रहे हैं, लेकिन ईश्वर का करिश्मा किस तरह कमल बनकर खिलेगा। इस बात से शायद ज्यादातर लोग अनजान थे। अब या इसे ऐसे कह लीजिए कि हस्तिनापुर का इतिहास आगे तक बरकार रहेगा क्योंकि आज ये साबित हो गया है कि इस सीट से जो प्रत्याशी जीतता है सूबे में उसी की सरकार झंडा लहराती नजर आती हैं।

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एक नजर हस्तिनापुर सीट के इतिहास पर

Here the legislator is formed by the government, history of Independence Since Independence
हस्तिनापुर का इतिहास बरकरार

देश आजाद होने के सात साल बाद हस्तिनापुर को विधानसभा का दर्जा मिला। इस सीट पर सबसे पहले  1957, 1962 और 1967 में कांग्रेस के प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी और उस समय प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार बनी थी। क्रमश: सम्पूर्णानंद, चंद्रभानू गुप्ता, चरण सिंह मुख्यमंत्री बनें। इसके बाद 1969 में चुनाव में इस सीट पर भारतीय क्रांति दल के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की और राज्य में भारतीय क्रांति दल की सरकार बनी और चौधरी चरण सिंह मुख्यमंत्री बनें। वहीं 1974 में कांग्रेस प्रत्याशी यहां से जीता तो कांग्रेस के एनडी तिवारी प्रदेश के सीएम बने। जबकि 1977 में जेपी आंदोलन का असर यहां भी दिखा और यहां से जनता दल का प्रत्याशी जीता और लखनऊ में जनता दल के रामनरेश यादव मुख्यमंत्री बनें। 1980, 1985 में फिर से यहां कांग्रेस के प्रत्याशी ने जीत हासिल की और सूबे में कांग्रेस की ही सरकार बनी। इसके बाद फिर यहां 1989 में जनता दल का विधायक जीता और लखनऊ में जनता दल की ओर से मुलायम सिंह मुख्यमंत्री बने। 1993 तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा रहा और उसके बाद से राज्य में क्षेत्रीय पार्टियों का बोलबाला रहा तो 1996 में हस्तिनापुर में हुए चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की और लखनऊ में अस्थिर सरकार बनी, इस दौरान मायावती, कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री बने। 2002 में यहां से सपा प्रत्याशी जीता तो राज्य में सपा के समर्थन से मायावती सीएम बनी। फिर 2007 में बसपा प्रत्याशी योगेश वर्मा जीते तो सूबे में बीएसपी की सरकार बनी और 2012 में सपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की तो राज्य में सपा की सरकार आई। अब 2017 में बीजेपी प्रत्याशी जीता तो सूबे में बीजेपी सत्ता पर काबिज हुई।

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