Hajj Yatra 2022: मुकद्दर से मिलती है मुकद्दस हज की इबादत, बारगाह-ए-इलाही में सजदे के लिए बेताब हैं जायरीन
कोरोना महामारी के कारण बीते दो साल से हज यात्रा बंद थी। इस वर्ष हज यात्रा की शुरुआत हो गई है। जायरीन हज के लिए चल पड़े हैं। उनके लबों पर खुदा का जिक्र है। वे बारगाह में सजदा करने के लिए बेताब हैं। हज की मुकद्दस इबादत हर मुस्लिम के लिए अहम है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हज के लिए जायरीन चल पड़े हैं। उनके लबों पर खुदा का जिक्र है और वे उसकी बारगाह में सजदा करने के लिए बेताब हैं। हज जाने वाले फूले नहीं समां रहे हैं। कोरोना महामारी के चलते बीते दो साल से हज यात्रा बंद थी। हज की मुकद्दस इबादत हर मुस्लिम के लिए अहम है। जीवन में यह मौका जब भी मिलता है तो खुशी का सबब माना जाता है।
हज यात्री आमतौर पर 40 या उससे अधिक दिन सऊदी अरब में गुजारते हैं। लेकिन हज के अहम अरकान पांच दिनों में पूरे हो जाते हैं। इसके बाद हज यात्री अपने मुल्क लौट सकता है। शहर काजी मुफ्ती शाकिर कासमी ने हदीस के हवाले से बताया कि दिखावे के लिए हज करना और हराम माल से हज करना नाजायज है।
यह भी पढ़ें : Meerut: खरखौदा में खाली प्लॉट में पड़ा मिला युवक का शव, पहचान कराने में जुटी पुलिस
अल्लाह के नबी ने फरमाया कि हज और उमरा दोनों इंसानों के गुनाहों को दूर कर देते हैं। एहराम बिना सिला सफेद रंग का कपड़ा होता है, जिससे हाजियों को बदन ढकना होता है। इस दौरान खुशबू लगाना, नाखून, बाल काटना और दाढ़ी बनाना मना है। एहराम बांधने के लिए एक सीमा तय की गई है। अरब में एक जगह यलमलम को पार करने से पहले आपको बदन पर एहराम बांधना जरूरी है। हज के पांच अरकान के बारे में गांव पांचली स्थित जामिया दारूस सलाम के मोहतमिम मौलाना युसुफ कासमी ने विस्तार से जानकारी दी।
हज के पांच अरकान
पहला दिन : 8 जिलहिज चांद की आठ तारीख को होता है। इस दिन सभी जायरीन मीना में एकत्र होते हैं।
दूसरा दिन : 9 जिलहिज चांद की नौ तारीख को सभी हज यात्री मीना से अराफात रवाना होते हैं। अराफात की मुजदलफा से दूरी लगभग छह किलोमीटर है। यहां पहुंचकर मगरिब और ईशा की नमाज एक साथ अदा करनी होगी, चाहे वक्त कुछ भी हुआ हो।
तीसरा दिन : 10 जिलहिज में मीना पहुंचकर तीन शैतानों में से एक शैतान को कंकरी मारनी होगी। इस दिन ईदुल अजहा (बकरीद) होती है। इसके बाद हाजी मक्का रवाना होंगे। यदि कुर्बानी की वजह से देरी हो जाए तो हाजी अगले दिन भी मक्का जा सकते हैं। मक्का पहुंचकर हज का अहम अरकान तवाफ-ए-जियारत करना होता है।
चौथा दिन : 11 जिलहिज में तीनों शैतानों पर कंकरी मारने का सिलसिला चलता है।
पांचवा दिन : 12 जिलहिज में भी तीनों शैतानों को कंकरी मारी जाती है। इस दिन कंकरी मारने के बाद हाजियों का मक्का वापस आना होता है।