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रोडवेज महिला कर्मियों ने केंद्र प्रभारी बनने से खड़े किए हाथ
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मेरठ। सरकारी विभाग में तरक्की मिलने पर कर्मचारी जल्द से जल्द नया कार्यभार संभालने के लिए उत्सुक दिखता है। लेकिन परिवहन निगम में इससे उलट हो रहा है। वरिष्ठ लिपिक के पद पर कार्यरत आठ महिला कर्मचारियों को तरक्की देकर केंद्र प्रभारी बनाया गया। लेकिन हैरानी की बात है कि इन सभी महिलाओं ने नए पद पर तैनाती से मना कर दिया। इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण भी नहीं बताया गया है।
तो निरस्त हो जाएगी पदोन्नति
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने प्रदेश के विभिन्न रीजन में तैनात 160 वरिष्ठ लिपिकों को वरिष्ठता क्रम के अनुसार केंद्र प्रभारी पद पर पदोन्नत किया है। इन सभी को 20 नवंबर तक वर्तमान तैनाती स्थल पर तत्काल अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। लेकिन इससे पहले ही महिला कर्मियों ने पदोन्नति लेने से मना करते हुए अपना पक्ष कार्मिक विभाग को भेज दिया। 20 नवंबर तक संबंधित क्षेत्र में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर पदोन्नति निरस्त की जाएगी।
जिम्मेदारी वाला पद है
केंद्र प्रभारी पद मेहनत और जिम्मेदारी वाला माना जाता है। केंद्र प्रभारी की देखरेख में ही बसों का संचालन होता है। त्योहार और इमरजेंसी जैसे मामलों में तो केंद्र प्रभारी को दिन-रात ड्यूटी करनी पड़ जाती है।
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जबरन नहीं करा सकते कार्यभार ग्रहण
किसी को भी जबरन कार्यभार ग्रहण नहीं कराया जा सकता है। पदोन्नति लेने और नहीं लेने के लिए कर्मचारी स्वतंत्र है। यहां कार्यरत महिला कर्मियों ने स्वेच्छा से लिखकर दे दिया है कि वे केंद्र प्रभारी पद पर जाना नहीं चाहती हैं। -केके शर्मा, आरएम रोडवेज
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तो निरस्त हो जाएगी पदोन्नति
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने प्रदेश के विभिन्न रीजन में तैनात 160 वरिष्ठ लिपिकों को वरिष्ठता क्रम के अनुसार केंद्र प्रभारी पद पर पदोन्नत किया है। इन सभी को 20 नवंबर तक वर्तमान तैनाती स्थल पर तत्काल अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। लेकिन इससे पहले ही महिला कर्मियों ने पदोन्नति लेने से मना करते हुए अपना पक्ष कार्मिक विभाग को भेज दिया। 20 नवंबर तक संबंधित क्षेत्र में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर पदोन्नति निरस्त की जाएगी।
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जिम्मेदारी वाला पद है
केंद्र प्रभारी पद मेहनत और जिम्मेदारी वाला माना जाता है। केंद्र प्रभारी की देखरेख में ही बसों का संचालन होता है। त्योहार और इमरजेंसी जैसे मामलों में तो केंद्र प्रभारी को दिन-रात ड्यूटी करनी पड़ जाती है।
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जबरन नहीं करा सकते कार्यभार ग्रहण
किसी को भी जबरन कार्यभार ग्रहण नहीं कराया जा सकता है। पदोन्नति लेने और नहीं लेने के लिए कर्मचारी स्वतंत्र है। यहां कार्यरत महिला कर्मियों ने स्वेच्छा से लिखकर दे दिया है कि वे केंद्र प्रभारी पद पर जाना नहीं चाहती हैं। -केके शर्मा, आरएम रोडवेज