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श्मशान घाट हादसे के एक साल बाद भी पीड़ित अनशन को मजबूर

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 03 Jan 2022 01:12 AM IST
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मुरादनगर नगर पालिका परिषद परिसर में श्मशान घाट हादसे के पीडि़त परिवार धरने पर बैठे
श्मशान घाट हादसे के एक साल बाद भी पीड़ित अनशन को मजबूर
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मुरादनगर। उखलारसी बंबा रोड स्थित श्मशान घाट के गलियारे की छत गिरने से मलबे में दबकर पिछले साल 3 जनवरी को 25 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 18 से अधिक लोग घायल हो गए थे। हादसे में किसी ने बेटा तो किसी ने पिता या पति खोया था। लोगों ने जब जाम लगाया तो मृतक आश्रितों को 12-12 लाख रुपये की मदद दी गई और आईजी की ओर से लिखित पत्र में पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी व मकान दिलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन एक साल बाद भी किसी भी पीड़ित परिवार को न तो नौकरी मिली और न ही मकान मिला। पीड़ित परिवार 29 नवंबर से नगर पालिका परिसर में धरना दे रहे हैं। अब 16 दिसंबर से क्रमिक अनशन पर हैं। इसके बाद भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे।
03 जनवरी 2021 को संगम विहार निवासी फल विक्रेता जयराम (70) निधन हो गया था। सुबह करीब 11 बजे उखलारसी बंबा रोड स्थित श्मशान घाट पर 50 से अधिक लोग अंतिम यात्रा शामिल हुए थे। बारिश होने के कारण अधिकांश लोग श्मशान घाट के प्रवेश द्वार पर बने 70 फीट लंबे गलियारे के नीचे खड़े थे। 11:30 गलियारे की छत गिर गई थी।
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हादसे में इनकी गई थी मौत
ओमकार, नीरज उर्फ बंटी, जोगिंदर, सुनील, ओमप्रकाश आर्य, रोबिन, प्रमोद, नितिन, अक्षय, विनोद, दिलीप बत्रा, दिग्विजय सोनी, सुरेश जुनेजा, सुधाकर, जयवीर, राजीव कुमार, योगेंद्र, सुनील कुमार, सतीश, मेहरचंद, नेपाल सिंह, परमानंद, दिनेश, अरविंद, पवन कुमार समेत 25 लोग।
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यह लोग हुए थे घायल
अरुण, निर्मल, सत्यप्रकाश, अशोक, कृष्पपाल, चिंटू उर्फ अश्वनी, निशु, जल सिंह, फिरन सिंह, उद्यम सिंह, राकेश, जयवीर, विनोद, राहुल, दीपक कुमार, अशोक, अंश आदि।

मदद नहीं करना चाह रही सरकार
यदि सरकार हमारी मदद करना चाहती तो हमें सरकारी नौकरी व मकान दे चुकी होती। पति सुनील की कमाई से घर का खर्च चलता था।
पुष्पलता
रोजी-रोटी का संकट आ गया है
पति की मौत के बाद मिली आर्थिक सहायता की रकम से कर्ज उतार दिया। अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। भविष्य को लेकर चिंता है।
मंजू
कमाने वाला ही नहीं रहा
पति की मौत के बाद बच्चों की परवरिश कैंसे करें। हमारे पास मकान नहीं है। परिवार के गुजारे के लिए आय का साधन भी नहीं है।
कविता
नौकरी मिलती तो आय होती
सरकार की ओर से 12 लाख रुपये मिले थे। उससे मकान बनवा लिया। सरकारी नौकरी मिल जाती तो आय का साधन हो जाता।
पिंकी पत्नी राजीव
उपचार के दौरान पति की मौत हो गई। आज तक आर्थिक मदद का चेक नहीं मिला। परिवार के सामने आर्थिक समस्याएं खड़ी हो गई हैं।
अंजू
कोई अधिकारी नहीं सुन रहा
परिवार के गुजारे के लिए अन्य कोई साधन नहीं है। 29 नवंबर से धरने पर बैठी हूं। अधिकारी सुनने को तैयार ही नहीं हैं।
पिंकी पत्नी जोगेंद्र
बच्चों के भविष्य की चिंता
सरकार सरकारी नौकरी, विधवा पेंशन, बीपीए कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था करें। बच्चों के भविष्य की चिंता है।
ममता
आज आत्म शांति के लिए होगा हवन, निकलेगा कैंडल मार्च
मुरादनगर। मृतकों के परिवारों के सदस्य आज भी हादसे को याद कर रोने लगते हैं। अपनों की यादें उनका पीछा नहीं छोड़ रही हैं। पीड़ित पुष्पलता, निधि सोनी, पिंकी, ममता, कविता, मंजू, अंजू, आदि का कहना है कि हादसे के दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए, लेकिन सभी आरोपी जेल छूट गए। सोमवार को श्मशान घाट हादसे के मृतकों की आत्मा की शांति के लिए हवन किया जाएगा और कैंडल मार्च निकाला जाएगा।
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