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दो साल बाद भी नहीं मिली पीड़ितों को सहायता राशि

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jul 2022 12:51 AM IST
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ghaziabad
दो साल बाद भी नहीं मिली पीड़ितों को सहायता राशि
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मोदीनगर। नगर से सटे गांव बखरवा में पांच जुलाई 2020 को हुए भीषण अग्निकांड के पीड़ितों की सहायता के लिए किए गए सरकारी वादे दो साल बाद भी पूरे नहीं हो सके हैं। एक मृत महिला के परिजनों और 10 से अधिक झुलसे श्रमिकों को सहायता राशि अभी तक नहीं मिल सकी है। इस घटना में 10 श्रमिकों की झुलसकर मौत हो गई थी। मरने वालों में दो महिलाएं भी थीं।
गांव में अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्टरी में आठ श्रमिक जिंदा जल गए थे और दो महिला श्रमिकों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। मरने वालों में अधिकतर किशोर, किशोरी और महिलाएं थी। मौके पर जमा भीड़ ने जमकर हंगामा किया था। मामले की गूंज लखनऊ तक गई थी। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये तथा घायलों को पचास हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की थी। एक मृतका तथा सभी घायल श्रमिकों को अभी तक सहायता राशि नहीं मिली है। इसे लेकर कई बार तहसील पर हंगामा, प्रदर्शन भी किए गए। मगर कोई समाधान नहीं हुआ। इसके अलावा तमाम राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों ने भी अनेक घोषणाएं की थी।
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यह था घटनाक्रम
गांव बखरवा में घनी आबादी के बीच एक संकरी गली में करीब 200 वर्ग गज के प्लॉट में नितिन चौधरी की पटाखा और मोमबत्ती बनाने की फैक्टरी थी। फैक्टरी में बाल श्रमिकों के अलावा महिलाएं भी काम करती थीं। पांच जुलाई 2020 रविवार अपराह्न अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्टरी में अचानक तेज धमाका हुआ और भीषण आग लग गई थी। घटना के विरोध में भीड़ ने जमकर हंगामा काटा था। तत्कालीन जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने मृत लोगों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये तथा घायलों को पचास-पचास हजार रुपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी।
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कर्ज में डूबा लक्ष्मी का परिवार
लक्ष्मी के पिता नरेश ने बताया कि घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी इसलिए बेटी पटाखा फैक्टरी में मजदूरी करने चली जाती थी। अग्निकांड में वह गंभीर रूप से झुलस गई थी। लोगों से कर्जा लेकर पुत्री का उपचार कराया था। मेरठ स्थित एक अस्पताल में नौ दिन तक लक्ष्मी का उपचार चला मगर उसकी जान नहीं बची। प्रशासन से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है
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बयान
अग्निकांड पीड़ितों की सहायता राशि की फाइल शासन को भेजी गई है। सहायता राशि शीघ्र दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। - शुभांगी शुक्ला, एसडीएम, मोदीनगर
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