{"_id":"586a21144f1c1b00521584d8","slug":"frozen-teachers-in-schools-will-be-tough-against-arbitrary-action-dm-b-chandrakala-said","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मनमाने ढंग से स्कूलों में जमे शिक्षकों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई, डीएम बी. चन्द्रकला ने कहा...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनमाने ढंग से स्कूलों में जमे शिक्षकों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई, डीएम बी. चन्द्रकला ने कहा...
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
Updated Mon, 02 Jan 2017 06:07 PM IST
विज्ञापन
उच्च प्राथमिक स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्राथमिक शिक्षा भले ही सरकार की प्राथमिकता हो। लेकिन उसके अधिकारी ही इसे पलीता लगा रहे हैं। सेटिंग के खेल में छात्र-शिक्षक अनुपात पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है। हाल ये है कि सुविधा लेने के लिए शिक्षक अधिकारियों से साठगांठ कर मनमाने ढंग से स्कूलों में जमे हैं। जिस कारण बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों की शिक्षा पूरी तरह पटरी से उतरी है। कई स्कूलों में जहां मानक से कम शिक्षक हैं, तो कई में बहुत ज्यादा। यही नहीं आधे से ज्यादा स्कूलों में तो प्रधानाध्यापक ही नहीं है।
विज्ञापन
ये है जिलेभर के स्कूलों की स्थिति
शहरी क्षेत्र के पास फलावदा के उच्च प्राथमिक स्कूल में एक दर्जन बच्चों पर तीन शिक्षिकाएं, मंढियाई के स्कूल में नौ बच्चों पर दो शिक्षक, नंगला राठी में 11 बच्चों पर दो शिक्षक तैनात हैं। जबकि दूरदराज के हस्तिनापुर के तारापुर स्कूल में 133 बच्चों पर मात्र एक ही शिक्षक तैनात है। गगसोना में भी उच्च प्राथमिक स्कूल में 52 बच्चों पर मात्र एक शिक्षक तैनात है। दबथला में 103 बच्चों पर महज दो टीचर तो सोहरका में 39 बच्चों पर एक प्रधानाध्यापक है। जब भी ये प्रधानाध्यापक मीटिंग में जाते हैं तो स्कूल ही बंद हो जाता है।
विज्ञापन
ये है शिक्षक तैनाती का नियम
प्राथमिक स्कूलों में 40 छात्रों पर एक शिक्षक का नियम है। ऐसे में प्रधानाध्यापक सहित दो शिक्षक होना अनिवार्य हैं। ऐसे स्कूल जहां 40 या इससे कम बच्चे हैं, वहां प्रधानाध्यापक के साथ शिक्षा मित्र को भी तैनाती दी जा सकती है। जबकि पूर्व माध्यमिक स्कूलों में प्रधानाध्यापक से अलग गणित-विज्ञान, अंग्रेजी व एक अन्य विषयों का शिक्षक का होना जरूरी है। ऐसे में पूर्व माध्यमिक स्कूलों में प्रधानाध्यापक सहित कम से कम चार शिक्षक होने चाहिए।
विज्ञापन
शिक्षक तैनाती में सेटिंग का खेल
शिक्षक तैनाती में पूरी तरह सेटिंग का खेल है। जनपद में 929 प्राथमिक और 433 पूर्व माध्यमिक स्कूल हैं। इनमें नगर क्षेत्र और शहर के आसपास के क्षेत्रों की बात करें तो ऐसे स्कूलों की संख्या करीब 500 है। जबकि बाकी स्कूल देहात क्षेत्र में हैं। वर्तमान में अधिकांश शिक्षक शहर में निवास कर रहे हैं। ऐसे में सबकी पसंद शहरी क्षेत्र के पास वाले स्कूल हैं। इसके दो फायदे हैं। पहला तो उन्हें आने-जाने में आसानी होती है और दूसरा शहरी आवासीय भत्ता देहात के भत्ते से ज्यादा है। जिस कारण शहरी क्षेत्र के आसपास के स्कूलों में तैनाती के लिए पूरी सेटिंग चलती है। वर्तमान में शहरी क्षेत्र के आसपास के इन स्कूलों में यदि अनुपातिक तौर पर शिक्षकों और छात्रों की संख्या देखें तो अंतर साफ है। शहरी क्षेत्र के आसपास वाले अधिकांश स्कूलों में बच्चे कम हैं और शिक्षकों की संख्या ज्यादा है। जबकि देहात के क्षेत्रों में स्कूलों में शिक्षकों की संख्या कम है और छात्र संतोषजनक है।
खादर में नहीं जाना चाहता कोई
सबसे बुरा हाल खादर क्षेत्र और उन देहात के स्कूलों का है जो जिला मुख्यालय से 25 से 35 किमी की दूरी पर पड़ते हैं। यहां पर आने जाने का कोई साधन भी नहीं है। सिर्फ अपने व्यक्तिगत वाहन से ही शिक्षक आ-जा सकते हैं। बावजूद इसके यहां पर पुरुष शिक्षकों की तैनाती न कर महिलाओं की तैनाती कर दी जाती है। जिनके लिए समय पर पहुंचना तो दूर स्कूल जाना भी मुश्किल हो जाता है।
बिना नियम चल रहा काम
प्रधानाध्यापक
- फोटो : अमर उजाला
जिले में कई स्कूल एकल तो कई में नहीं प्रधानाध्यापक, ट्रांसफर पोस्टिंग में नहीं रखा जाता नियमों का ध्यान, जिला स्तर से लेकर इलाहाबाद तक चल रहा पूरा खेल, शहरी क्षेत्र के आसपास के स्कूलों में शिक्षकों की ज्यादा संख्या, दूर देहात और खादर के स्कूलों में शिक्षक नहीं जाते हैं।
ऊपर तक चलती है सेटिंग
देश के भविष्य से खिलवाड़
ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए जिला कार्यालय से लेकर इलाहाबाद सचिवालय तक जमकर सेटिंग चलती है। नियमों के विपरीत नई नियुक्ति वाले शिक्षकों को उनके दो साल के प्रतिबंध को भी दरकिनार कर ट्रांसफर कर दिया जाता है। यही नहीं महिलाओं, बुजुर्गों और विकलांगों को पोस्टिंग में वरीयता दी जाती है। लेकिन सेटिंग के इस खेल में इसका भी कोई ध्यान नहीं रखा जाता।
जिले के सभी स्कूलों की लिस्ट देखकर ही रिक्तियां जारी होंगी
बी. चंद्रकला, जिलाधिकारी
ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए जिन स्कूलों की सूची निकाली है, उसे रोककर जांच करायी जा रही है। जिले के सभी स्कूलों की लिस्ट देखकर ही रिक्तियां जारी होंगी। शैक्षिक माहौल बनाने के लिए हर स्कूल में मानक के अनुरूप शिक्षक तैनाती का पूरा प्रयास होगा। - बी. चंद्रकला, जिलाधिकारी