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Exclusive: आसमान छू रहे आलू के दाम और किसानों की जेब खाली, तीन साल में दोगुना हुआ खेती का रकबा
Wed, 18 Nov 2020 11:45 AM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
Published by: Dimple Sirohi
Updated Wed, 18 Nov 2020 11:45 AM IST
सार
- जिले में कोल्ड स्टोर नहीं होने के कारण फसल का नहीं लगा पाते स्टॉक
- व्यापारियों से दस से 18 रुपये प्रति किलो तक ही खरीदा जाता है आलू
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potato
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आलू पर महंगाई की मार ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। बाजार में आलू 45 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। आलू पर महंगाई से भी किसानों को कोई लाभ नहीं हुआ है। किसानों से 10 से 18 रुपये प्रति किलो में खरीदा गया आलू अब बाजार में 45 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। जिले में कोल्ड स्टोर नहीं होने के कारण किसान अपनी फसल का स्टॉक नहीं रख पाते हैं। जिस कारण फसल को सस्ते दामों पर बेचना मजबूरी हो जाता है।
क्या कहते हैं किसान
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में रटौल गांव के आलू उत्पादक किसान शाहनवाज राजपूत ने 36 बीघा जमीन में फसल लगाई है। किसान का कहना है कि जिस वक्त बाजार में उनकी फसल गई दाम कम थे, अब भाव बढ़ गए हैं। कोल्ड स्टोर की व्यवस्था नहीं होने के कारण तुरंत ही फसल को बेचना पड़ता है। स्थानीय मंडियों में आलू बेचते हैं। जिले में कोल्ड स्टोर होना चाहिए।
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क्या कहते हैं किसान
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में रटौल गांव के आलू उत्पादक किसान शाहनवाज राजपूत ने 36 बीघा जमीन में फसल लगाई है। किसान का कहना है कि जिस वक्त बाजार में उनकी फसल गई दाम कम थे, अब भाव बढ़ गए हैं। कोल्ड स्टोर की व्यवस्था नहीं होने के कारण तुरंत ही फसल को बेचना पड़ता है। स्थानीय मंडियों में आलू बेचते हैं। जिले में कोल्ड स्टोर होना चाहिए।
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आलू उत्पादक किसान इजहार का कहना है कि इस बार 33 बीघा जमीन में आलू की बुआई की है। फिलहाल बाजार में भाव अच्छा है, लेकिन जब किसान की फसल आती है, तब इस तरह का भाव नहीं मिलता है। इसी वजह से हर साल नुकसान उठाने की स्थिति बन जाती है।
तीन साल में दोगुना हो गया आलू का रकबा
जिले में आलू का रकबा तीन साल में दोगुना हो गया है। साल 2018 में 25 हेक्टेयर में आलू की फसल थी, इसके बाद 2019 में 30 हेक्टेयर में फसल हुई। इस बार रकबा बढ़कर 50 हेक्टेयर पर पहुंच गया है।
इस तरह बिकता है आलू
आलू उत्पादक शाहनवाज का कहना है कि अगर फसल की खोदाई फरवरी के आखिरी में होती है तो भाव 640 से 700 रुपये प्रति 50 किलोग्राम मिलता है। लेकिन जिस फसल की खोदाई मार्च और अप्रैल में होती है, उसका भाव 850 रुपये तक मिल जाता है।
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तीन साल में दोगुना हो गया आलू का रकबा
जिले में आलू का रकबा तीन साल में दोगुना हो गया है। साल 2018 में 25 हेक्टेयर में आलू की फसल थी, इसके बाद 2019 में 30 हेक्टेयर में फसल हुई। इस बार रकबा बढ़कर 50 हेक्टेयर पर पहुंच गया है।
इस तरह बिकता है आलू
आलू उत्पादक शाहनवाज का कहना है कि अगर फसल की खोदाई फरवरी के आखिरी में होती है तो भाव 640 से 700 रुपये प्रति 50 किलोग्राम मिलता है। लेकिन जिस फसल की खोदाई मार्च और अप्रैल में होती है, उसका भाव 850 रुपये तक मिल जाता है।
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