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ईको फ्रैंडली मूर्तियों से मनेगी दिवाली  

Sun, 15 Oct 2017 02:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 15 Oct 2017 02:18 AM IST
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
चाइनीज़ दीपकों का बहिष्कार, बढ़ते प्रदूषण के कारण पटाखों पर लगी रोक ने इस बार दिवाली क ो देशहित और पर्यावरण हितैषी बनाया है। इसी क्रम में दिवाली पर बाजार में इस बार मिट्टी की ईको फ्रैंडली मूर्तियों की खूब मांग है। प्लास्टर ऑफ पेरिस की छोटी-बड़ी मूर्तियों से पटा रहने वाला बाजार इस बार बनारस, लखनऊ और कोलकाता से आई मिट्टी की मूर्तियों से महक रहा है। लक्ष्मी पूजन के लिए बाजार में गणपति, लक्ष्मी, कुबेर की ईको फ्रैंडली मूर्तियां हैं। आबूलेन, सदर, बेगमपुल, जीआईसी के सामने, थापर नगर, पीएल शर्मा रोड, सेंट्रल मार्केट, शारदा रोड, साकेत, पांडव नगर, प्रभात नगर सहित अन्य छोटे बाजारों में मूर्तियों की दुकानें सजी हैं। लोग अपने बजट के अनुसार मूर्तियां ले रहे हैं। 50 रुपये से 1500 रुपये तक की मूर्तियां हैं। 
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शांत स्वभाव की मनमोहक छवि पसंद 
गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों में लोगों की पहली पसंद शांत स्वभाव पद्मासन मुद्रा की मूर्तियां हैं। मूर्तियों में कदंब पर विराजमान लक्ष्मी-गणेश, सिंहासन पर बैठे गणेशजी, सेठ रूप में गणपति, उल्लू वाहन पर लक्ष्मीजी, हाथी व चूहे के साथ गणपति, गजलक्ष्मी, बाएं हाथ व दाएं हाथ सूंड़ वाले गणेशजी हैं। पांच  इंच से लेकर 16 इंच की मूर्तियां बाजार में हैं। कद और कलाकारी के अनुसार मूर्ति क ी कीमत तय होती है।
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बंगाल, महाराष्ट्र से आ रहीं मूर्तियां
मेरठ के बाजार में मिलने वाली लक्ष्मी-गणेश की ईको फ्रैंडली मिट्टी की मूर्तियां खासतौर पर कोलकाता, चिनार से बनकर आ रही हैं। मूर्तिकारों के मुताबिक मिट्टी की मूर्ति के लिए साफ और अच्छी मिट्टी चाहिए। जो खेत के नीचे की परत से मिलती है। पहले मेरठ में भी मिट्टी की मूर्तियां खूब बनती थीं, लेकिन अब खनन रुकने के कारण अच्छी मिट्टी नहीं मिल रही। मेरठ में प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां ज्यादा बन रही हैं। शुद्ध मिट्टी की मूर्तियां कोलकाता, बनारस, लखनऊ से आ रही हैं। आगरा से पीओपी, कोलकाता से हैंडवर्क वाली मूर्तियां आई हैं। लोगों को हैंडवर्क की मूर्ति अधिक लुभाती हैं। इनकी कीमत थोड़ी ज्यादा है। जुलाई, अगस्त में मूर्तियां बनना शुरू हो जाती हैं। 
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जीएसटी से महंगी हुईं मूर्तियां
थापरनगर में मूर्ति विक्रेता मनोज प्रजापति कहते हैं मूर्तियों के दामों में इस बार 100 से 120 रुपये बढ़ गए हैं। मूर्तियां महंगी हुई हैं। सरकार ने मूर्तियों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया है। इसके कारण कीमतों में इजाफा हुआ है। आठ इंच की जो मूर्ति पिछले साल 500 रुपये में थी, इस साल 620 रुपये कीमत में आ रही है। इसका असर मांग पर भी आया है। लोग छोटी और सस्ती मूर्तियां ले रहे हैं। 


स्टोन, कुंदन, ज्वैलरी से सजी मूर्तियां
दिवाली पर पूजन के लिए शांत मुद्रा में बैठे लक्ष्मी-गणेश के अलावा रामदरबार, हनुमान जी, सरस्वती व धनदेवता कुबेर की मूर्तियां खरीदी जाती हैं। ईको फ्रैंडली मूर्तियाें के अलावा लोग हाथ की कारीगरी से सजी मूर्तियां ज्यादा लेते हैं। मूर्तियों को रंग, पॉलिश के बजाय वास्तविक कपड़े पहनाए जाते हैं। स्टोन, कुंदन, ज्वैलरी से मूर्ति का शृंगार होता है।
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