फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   eaisa gate jise khulvane se

एेसा गेट जिसे खुलवाने से डरते है बड़े बड़े अफसर

Sat, 13 Aug 2016 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Sat, 13 Aug 2016 02:20 AM IST
विज्ञापन
eaisa gate jise khulvane se
एमडीए - फोटो : अमर उजाला
 शहर भर में विकास के दरवाजे खोलने का दम भर वाले मेरठ विकास प्राधिकरण के लिए खुद का एक गेट अबूझ पहेली बन गया है। पिछले 10 सालों से यह गेट खोला नहीं गया है। यह केवल इत्तेफाक है या कुछ और, पर जब भी यह गेट खोला गया, एमडीए के किसी कर्मचारी की मौत हो गई। ऐसे में इसके खुलने को अपशकुन मानते हुए इस पर ताला लगा दिया गया। 10 सालों में किसी अधिकारी या कर्मचारी तो क्या, वीसी ने भी इसे खुलवाने की पहल नहीं की।
विज्ञापन

सन 1976 में मेरठ विकास प्राधिकरण का गठन हुआ तो 1982 में इसके भवन का निर्माण हुआ। नया भवन दो चरणों में बनाया गया। पहले चरण में वह हिस्सा बना, जहां वीसी कार्यालय है। दूसरे चरण में 1995 में दूसरा पार्ट बनाया गया, जहां गेट नंबर दो का निर्माण हुआ। समय-समय पर इस भवन का सौंदर्यीकरण किया गया।
विज्ञापन


अपशकुन की कहानी
एमडीए के पुराने कर्मचारी बताते हैं कि जैसे ही यह गेट बनकर तैयार हुआ, यहां काम कर रहे ठेकेदार को हार्ट अटैक हो गया। उसकी मौत हो गई। ऐसे में इस गेट को बंद कर दिया गया। इस गेट को साल 2000 में फिर खोला गया, तो एक के बाद एक दो कर्मचारियों की मौत हो गई। इसी माह एमडीए के नाजिर पद से सेवानिवृत्त हुए अशोक गुप्ता याद करते हैं कि दोनों कर्मचारी दुरुस्त थे पर अचानक दोनों को दिल का दौरा पड़ गया। इसके बाद से कर्मचारियों में यह बात घर कर गई कि गेट के खुलने से ही घटना हो रही है। 2006 में इस गेट को फिर खोला गया। कुछ ही दिन में तत्कालीन वीसी सत्यवीर सिंह आर्य के स्टेनो ओएन तोमर की अचानक मौत हो गई। कारण वही रहा, हार्ट फेल। इस बार गेट को बंद करके ताला जड़ दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


गेट खुले तो हो आसानी
एमडीए कार्यालय में मुख्य गेट से लोग आते-जाते हैं। गेट नंबर दो भी मुख्य गेट जितना बड़ा है और मेन रोड पर ही है। इसकी सार्थकता भी है। यदि यह खोला जाए तो एमडीए के भीतर से गाड़ियों की आवाजाही में बड़ी आसानी होगी, पर ऐसा नहीं हो सका है।


पीर बाबा का असर मानते हैं कर्मचारी
एमडीए परिसर में ही पीर बाबा की मजार है। कर्मचारियों का मानना है कि पीर बाबा को यह मंजूर नहीं कि कोई गेट नंबर दो से आए-जाए। यही कारण है कि जब भी इस गेट को खोला गया, वे नाराज हो गए। चाहे जो हो पर इस किंवदंती का ऐसा असर है कि इस गेट को खोलने की कोई अधिकारी या कर्मचारी सोच भी नहीं सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed