अलर्ट: डेंगू के साथ स्वाइन फ्लू का भी खौफ, बरतें ये सावधानी
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यूपी के मेरठ शहर में डेंगू के मरीज लगातार मिल रहे हैं, तो स्वाइन फ्लू का भी खतरा मंडरा रहा है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अलर्ट जारी करते हुए औषधि, पीपीई किट और वैक्सीन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की हिदायत दी है।
स्वास्थ्य भवन लखनऊ के निदेशक की तरफ से भेजे गए निर्देशों में कहा गया है कि साल 2017 में एन्फ्लुएन्जा-ए-एच1एन1 के संक्रमण से प्रदेश में 3881 रोगी ग्रसित हुए, जिनमें से 132 की मृत्यु हो गई थी। साल 2018 में माह जनवरी से 11 सितंबर तक एन्फ्लुएन्जा-ए-एच1एन1 रोग (स्वाइन फ्लू) से 16 लोग ग्रसित हुए थे और तीन लोगों की मृत्यु हो चुकी है। लिहाजा निर्देशित किया जाता है कि इस बीमारी से निपटने के लिए चिकित्सालयों में उपलब्ध औषधियों, पीपीई किट, वैक्सीन और रक्षित बिस्तरों की संख्या की रिपोर्ट तैयार कर इसकी सूचना ई-मेल के जरिए भेजी जाए और यह व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि हालांकि अभी मेरठ में स्वाइन फ्लू को लेकर किसी तरह की सूचना नहीं है। न ही अभी ऐसा कोई सीजन है, फिर भी स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले साल मेरठ में ही चार सौ से ज्यादा स्वाइन फ्लू केमरीज मिले थे।
एक और मरीज को डेंगू
एक और मरीज को डेंगू की पुष्टि हुई है। यह मरीज बुलंदशहर निवासी रेशमा (12) है। वह मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। गुरुवार को इनके ब्लड सैंपल की जांच रिपोर्ट आई है, जिसमें डेंगू की पुष्टि हुई है। इस सीजन में अब तक मेरठ में आठ मरीजों को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें मेरठ के चार मरीज हैं।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
नाक का लगातार बहना, छींक आना, ठंड लगना और लगातार खांसी, मांसपेशियों में दर्द या अकड़न, सिर में भयानक दर्द, नींद न आना, ज्यादा थकान, दवा खाने पर भी बुखार का बढ़ना, गले में खराश का बढ़ते जाना।
यह बरतें सावधानी
स्वाइन फ्लू की आशंका हो तो सरकारी संस्थान में जांच कराएं। आराम करें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। आसपास कोई खांस रहा है तो एहतियात बरतें। हाथों को साबुन से धोएं।
उपचार
शुरुआत में पैरासिटामोल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं। बीमारी बढ़ने पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर, टेमी फ्लू और जाननामीविर, रेलेंजा जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है।
ऐसे होती है जांच
वाइन फ्लू के संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति के थ्रोट स्वेब (गले की लार) का सैंपल माइक्रोबायोलॉजी लैब में भेजा जाता है। एलाइजा जांच के बाद पता चलता है कि स्वाइन फ्लू है या नहीं। कई बार निजी लैब में एच1एन1 की पुष्टि हो जाती है। इसके बाद भी आधिकारिक पुष्टि के लिए सरकारी लैब में सैंपल भेजा जाता है।
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