बेटियों को इंसाफ से पहले मिलती ‘मौत’, कई के सपने हुए चकनाचूर
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यूपी के मेरठ में 14 साल की बिटिया, 19 दिन तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूलती रही। बेटी की हालत को देखकर परिजन कभी बिलखते तो कभी उसकी जिंदगी के लिए प्रार्थना करते। वहीं, सिस्टम पर लापरवाही को लेकर भीड़ का सड़क पर आक्रोश। मंगलवार को बिटिया की दिल्ली में उपचार के दौरान मौत हुई तो फिर यह सिस्टम सवालों के घेर में आ गया। जब भी छेड़छाड़ की घटना होती है और कार्रवाई को लेकर बेटियां इंसाफ मांगती हैं तो अफसरों के दावे बड़े-बड़े होते हैं। लेकिन इंसाफ के बदले में उन्हें मिलती है तो सिर्फ मौत।
प्रदेश में सत्ता बदलते ही एंटी रोमियो स्क्वाएड का गठन हुआ। शासन ने महिला अपराध को लेकर अफसरों को सख्त निर्देश दिए। सभी थानों में एक एक दरोगा के नेतृत्व में एंटी रोमियो टीम बना गई है। स्कूल, कॉलेज, मुख्य बाजार, सरकारी कार्यालय और अन्य शैक्षिक संस्थानों में मनचलों के खिलाफ अभियान शुरू किया गया। अभियान को लेकर पुलिस अफसरों ने बड़े दावे किए। लेकिन सड़कों पर अभियान प्रभावी छाप नहीं छोड़ पाया। पहले भावनपुर प्रकरण की गूंज लखनऊ तक हुई तो चार दिन पहले खरखौदा में मनचलों से परेशान होकर किशोरी ने जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी। अब मंगलवार को सरधना प्रकरण लखनऊ तक गूंज गया।
छात्रा की मौत के बाद सरधना को छावनी में तब्दील करने के बाद पुलिस-प्रशासन दिन भर एक पैर पर खड़ा रहा। दरअसल, कभी पुलिस थानों में सुनवाई नहीं करती तो कभी पुलिस उसे आपसी विवाद बताकर हल्के में ले जाती है। जब इंसाफ मांगने पर बेटियों को आग के हवाले कर दिया जाता है तो फिर से पुलिस को अभियान और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की याद आती है। अधिकारी आरोपियों को गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाने का आश्वासन देते हैं। लेकिन इस तरह कब तक बेटियों की जान जाती रहेगी।
भावनपुर : सामूहिक दुष्कर्म
भावनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 14 वर्षीय छात्रा पास के गांव में पढ़ाई करने जाती थी। छात्रा का आरोप था कि चार युवकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उसकी वीडियो क्लिप बना ली। बाद में आरोपी छात्रा को परेशान करने लगे। इस मामले में थाना पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। 6 जनवरी 2018 को छात्रा दोपहर को स्कूल से घर जा रही थी जहां आरोपी युवकों ने छात्रा के साथ अश्लील हरकतें की। बाद में छात्रा ने घर पहुंचकर केरोसिन डालकर आग लगा ली। मेडिकल कॉलेज में छात्रा को भर्ती कराया गया। लेकिन पुलिस मामले को दबाने में रही। पांच दिन बाद छात्रा की उपचार के दौरान मौत हुई तो एसओ भावनपुर पर गाज गिराते हुए चार आरोपियों को जेल भेज दिया था। लोग सड़कों पर उतरे और लखनऊ तक गूंज हुई।
खरखौदा: तेजाब डालने की धमकी
खरखौदा क्षेत्र का प्रकरण भी कुछ ऐसा ही है। थाना क्षेत्र की रहने वाली किशोरी को मनचले परेशान करते थे। किशोरी ने परिजनों से शिकायत की। कभी आरोपी अपहरण की तो कभी तेजाब डालने की धमकी। 27 अगस्त 2018 को किशोरी ने मनचलों से परेशान होकर जहरीला पदार्थ खा लिया। एक सितंबर को एक निजी अस्पताल में किशोरी की मौत हो गई। पुलिस ने आनन फानन में दो आरोपियों को छेड़छाड़ के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
सरधना की दुस्साहसिक वारदात
सरधना की वारदात तो ऐसी दुस्साहसिक और सनसनीखेज थी कि सुनकर भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे। 17 अगस्त को मनचलों ने घर में घुसकर छात्रा का अपहरण करने की कोशिश की। विरोध करने पर केरोसिन छिड़ककर छात्रा को आग लगा दी। बुरी तरह झुलसी छात्रा को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां लगे पोस्टरों में प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से इंसाफ मांगा गया। हालत बिगड़ी तो मेरठ से दिल्ली के अस्पताल ले जाया गया। घटना के आक्रोश में सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे। एसएसपी ऑफिस पर धरना देने वाले व्यापारी नेता को अफसरों ने जेल भिजवा दिया था।
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