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डाबका गांव में नहीं शुरू होगी कुर्बानी की परंपरा
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Fri, 09 Sep 2016 02:31 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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डाबका गांव में कुर्बानी की परंपरा शुरू करने को लेकर तनाव की स्थिति बनी है। दूसरा समुदाय जहां बकरीद पर गांव में कुर्बानी की परंपरा शुरू करने की जिद पर अड़ा है तो गांव के अन्य लोगों ने इसका पुरजोर विरोध कर दिया है। इसको लेकर बृहस्पतिवार को गांव में महापंचायत की गई। सूचना पर सीओ दौराला और एसओ कंकरखेड़ा भी पहुंच गए। करीब दो घंटे चली महापंचायत में सीओ ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि कुर्बानी की परंपरा शुरू नहीं होने दी जाएगी।
पुलिस के अनुसार हाईवे स्थित डाबका गांव में पिछले 50 वर्षों से दोनों समुदाय के लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपने त्योहार मनाते आ रहे हैं। लेकिन इस बार दूसरे समुदाय के लोग बकरीद पर गांव में कुर्बानी की परंपरा शुरू करना चाहते हैं। जबकि गांव के अन्य समुदाय के लोगों ने स्पष्ट कह दिया है कि गांव में किसी सूरत में बड़े जानवर की कुर्बानी की परंपरा शुरू नहीं होने दी जाएगी। मामला पुलिस तक भी पहुंच गया। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की, लेकिन दोनों समुदाय अपने बात पर अड़े हैं।
बृहस्पतिवार को कुर्बानी की परंपरा के विरोध में महापंचायत का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों लोग और महिलाएं मौजूद रहीं। लोगों ने कहा कि गांव में ईदगाह नहीं है। ऐसे में गांव में खुले मैदान में बड़े जानवरों की कुर्बानी की परंपरा शुरू की जा रही है, जो गलत है। निर्णय लिया गया कि कुर्बानी की परंपरा जब गांव में पहले से नहीं है, इसलिए अब भी शुरू नहीं होने दी जाएगी। महापंचायत की सूचना पुलिस को लगी तो सीओ दौराला डॉ. अरविंद कुमार और एसओ कंकरखेड़ यादराम यादव भी फोर्स के साथ गांव में पहुंच गए।
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करीब दो घंटे तक सीओ और एसओ ग्रामीणों को समझाते रहे। लेकिन ग्रामीणों ने साफ कह दिया कि कुर्बानी की परंपरा वे किसी कीमत पर शुरू नहीं होने देंगे। बाद में सीओ ने दूसरे समुदाय के लोगों से भी वार्ता कर शांतिपूर्ण ढंग से पूर्व की तरह त्योहार मनाने की अपील की। महापंचायत में जसवंत सिंह, कृष्ण दत्त शर्मा, ईश्वर शर्मा, चौ. अजीत सिंह, चौ. किरणपाल, राजकुमार, ममता, सुशील, सुरेश, अजित, हरवीर, नरेश डाबका, अजय कुमार आदि मौजूद रहे।
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पुलिस के अनुसार हाईवे स्थित डाबका गांव में पिछले 50 वर्षों से दोनों समुदाय के लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपने त्योहार मनाते आ रहे हैं। लेकिन इस बार दूसरे समुदाय के लोग बकरीद पर गांव में कुर्बानी की परंपरा शुरू करना चाहते हैं। जबकि गांव के अन्य समुदाय के लोगों ने स्पष्ट कह दिया है कि गांव में किसी सूरत में बड़े जानवर की कुर्बानी की परंपरा शुरू नहीं होने दी जाएगी। मामला पुलिस तक भी पहुंच गया। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की, लेकिन दोनों समुदाय अपने बात पर अड़े हैं।
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बृहस्पतिवार को कुर्बानी की परंपरा के विरोध में महापंचायत का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों लोग और महिलाएं मौजूद रहीं। लोगों ने कहा कि गांव में ईदगाह नहीं है। ऐसे में गांव में खुले मैदान में बड़े जानवरों की कुर्बानी की परंपरा शुरू की जा रही है, जो गलत है। निर्णय लिया गया कि कुर्बानी की परंपरा जब गांव में पहले से नहीं है, इसलिए अब भी शुरू नहीं होने दी जाएगी। महापंचायत की सूचना पुलिस को लगी तो सीओ दौराला डॉ. अरविंद कुमार और एसओ कंकरखेड़ यादराम यादव भी फोर्स के साथ गांव में पहुंच गए।
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करीब दो घंटे तक सीओ और एसओ ग्रामीणों को समझाते रहे। लेकिन ग्रामीणों ने साफ कह दिया कि कुर्बानी की परंपरा वे किसी कीमत पर शुरू नहीं होने देंगे। बाद में सीओ ने दूसरे समुदाय के लोगों से भी वार्ता कर शांतिपूर्ण ढंग से पूर्व की तरह त्योहार मनाने की अपील की। महापंचायत में जसवंत सिंह, कृष्ण दत्त शर्मा, ईश्वर शर्मा, चौ. अजीत सिंह, चौ. किरणपाल, राजकुमार, ममता, सुशील, सुरेश, अजित, हरवीर, नरेश डाबका, अजय कुमार आदि मौजूद रहे।