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मैंने पिता के पैर पकड़े, दोस्त ने रेता था गला
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 09 Feb 2018 02:05 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पोस्टमैन हत्याकांड के खुलासे की प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में पिता के कत्ल की कहानी हत्यारोपी बेटे तरुण की जुबानी सुनकर हर कोई हैरान था।
हत्यारोपी तरुण बोला कि रोजाना की तरह एक फरवरी की शाम उसके पिता चंद्रपाल खेत में घूमने गए थे। जहां वह अपने दोस्त सनी के साथ मौजूद था। हम तीनों की करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई। अंधेरा होने पर तीनों घर की तरफ चल पड़े। आगे पिता बीच में सनी और पीछे मैं था। इसी दौरान सनी ने चंद्रपाल के सिर में लोहे की रॉड मारी। जिस पर चंद्रपाल जमीन पर गिर गए। खतरा भांपकर चंद्रपाल उठकर भागने लगे, तभी बेटे तरुण ने उनके सिर पर दूसरा प्रहार लोहे की रॉड से किया। जिस पर चंद्रपाल बेहोश हो गए। मामला यही नहीं थमा। क्योंकि दोनों पहले से ही चंद्रपाल की हत्या का प्लान बना चुके थे। तरुण ने अपने पिता के पैर पकड़ लिए थे और सनी ने चाकू से उनका गला रेत दिया था।
पापा की आंख खुली थी
प्रेसवार्ता में तरुण ने बताया कि पीछे से लोहे की रॉड लगने के बाद पापा चंद्रपाल की आंख एक बार खुली थी। लेकिन चंद्रपाल को दोनों ने दबोचा हुआ था। चंद्रपाल को यकीन नहीं था कि जिस बेटे को उसने पढ़ा लिखाकर इतना बड़ा कर दिया। एक दिन वही उसकी जान ले लेगा। तरुण के एक बार भी पिता को मारने में हाथ नहीं कांपे।
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बेटा भाग, बदमाश आ गए
पहला वार चंद्रपाल के सिर पर सनी ने किया था। चंद्रपाल को लगा कि शायद बदमाश आ गए। चंद्रपाल ने शोर भी मचाया कि बेटा तरुण भाग जा। तभी दूसरा वार चंद्रपाल के सिर पर तरुण ने किया। चंद्रपाल को क्या पता था कि जिस बेटे को वह बचाने के लिए चिल्ला रहा, वही उसकी हत्या कर रहा है। वारदात करने के बाद तरुण अपने दोस्त के साथ गांव आ गया था।
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हत्यारोपी तरुण बोला कि रोजाना की तरह एक फरवरी की शाम उसके पिता चंद्रपाल खेत में घूमने गए थे। जहां वह अपने दोस्त सनी के साथ मौजूद था। हम तीनों की करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई। अंधेरा होने पर तीनों घर की तरफ चल पड़े। आगे पिता बीच में सनी और पीछे मैं था। इसी दौरान सनी ने चंद्रपाल के सिर में लोहे की रॉड मारी। जिस पर चंद्रपाल जमीन पर गिर गए। खतरा भांपकर चंद्रपाल उठकर भागने लगे, तभी बेटे तरुण ने उनके सिर पर दूसरा प्रहार लोहे की रॉड से किया। जिस पर चंद्रपाल बेहोश हो गए। मामला यही नहीं थमा। क्योंकि दोनों पहले से ही चंद्रपाल की हत्या का प्लान बना चुके थे। तरुण ने अपने पिता के पैर पकड़ लिए थे और सनी ने चाकू से उनका गला रेत दिया था।
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पापा की आंख खुली थी
प्रेसवार्ता में तरुण ने बताया कि पीछे से लोहे की रॉड लगने के बाद पापा चंद्रपाल की आंख एक बार खुली थी। लेकिन चंद्रपाल को दोनों ने दबोचा हुआ था। चंद्रपाल को यकीन नहीं था कि जिस बेटे को उसने पढ़ा लिखाकर इतना बड़ा कर दिया। एक दिन वही उसकी जान ले लेगा। तरुण के एक बार भी पिता को मारने में हाथ नहीं कांपे।
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बेटा भाग, बदमाश आ गए
पहला वार चंद्रपाल के सिर पर सनी ने किया था। चंद्रपाल को लगा कि शायद बदमाश आ गए। चंद्रपाल ने शोर भी मचाया कि बेटा तरुण भाग जा। तभी दूसरा वार चंद्रपाल के सिर पर तरुण ने किया। चंद्रपाल को क्या पता था कि जिस बेटे को वह बचाने के लिए चिल्ला रहा, वही उसकी हत्या कर रहा है। वारदात करने के बाद तरुण अपने दोस्त के साथ गांव आ गया था।