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एमडीए के 11 कर्मचारी निलंबित, कई पर तलवार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jun 2017 02:53 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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वीसी कार्यालय पर हंगामा करने के मामले में सख्त एक्शन लिया गया है। एमडीए के 11 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। जिनमें गिरफ्तार दोनों कर्मचारी भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि इतने ही कर्मचारियों के खिलाफ अभी और कार्रवाई होगी।
शनिवार को एमडीए के उपाध्यक्ष योगेंद्र यादव के कार्यालय में कर्मचारियों द्वारा किया गया हंगामा प्रकरण अब और गंभीर होता जा रहा है। इसमें पचास से ज्यादा कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कराया गया। रविवार सुबह ही पुलिस ने कर्मचारी यूनियन अध्यक्ष सुशील त्यागी तथा बलराम सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अब सोमवार को वीसी ने लिपिक सुशील त्यागी, कपिल शर्मा, महेश शर्मा, संजीव कपिल, अनुचर आशाराम, हरि सिंह तथा पंकज गुप्ता एवं मेट कुलदीप, घनश्याम, बलराम सिंह और महाराज सिंह को निलंबित कर दिया। वीसी ऑफिस में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
तीन जेई के खिलाफ शासन को रिपोर्ट
बताया जा रहा है कि इस हंगामे के दौरान मौजूद रहने वाले तीन अवर अभियंताओं के खिलाफ भी शासन को रिपोर्ट प्रेषित की गई है। हालांकि यहां उन पर सीधा एक्शन नहीं लिया गया है। लेकिन इस बाबत शासन को अवगत कराया गया है। इनमें प्रांतीय स्तर के पदाधिकारी भी शामिल हैं।
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गिरफ्तार कर्मचारियों की जमानत अर्जी खारिज
इस प्रकरण में गिरफ्तार कर्मचारी सुशील त्यागी और बलराम के जमानत प्रार्थना पत्र को न्यायालय सीजेएम ने सोमवार को खारिज कर दिया। आरोपियों की ओर से एडवोकेट अजय शर्मा, महावीर त्यागी, शिव शर्मा और संजय त्यागी ने पक्ष रखा तो वहीं सरकार की ओर से डीजीसी फौजदारी अनिल तोमर, संयुक्त निदेशक अभियोजन रूबी यादव, और अमित दीक्षित अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। आरोपी पक्ष की ओर से कहा गया कि उन्हें फर्जी तरीके से फंसाया गया है। वे कुछ मांगों को अधिकारियों के सामने रखने गए थे। वहीं, अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि यदि सरकारी कार्य में इस प्रकार व्यवधान खुद सरकारी कर्मचारियों द्वारा किया जाता है तो एमडीए में कोई भी कार्य स्वच्छ स्तर से हो पाना संभव नहीं होगा। न्यायालय सीजेएम तरवेज आलम ने उचित आधार न पाते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
एमडीए कर्मचारी नेताओं को समर्थन
गिरफ्तार एमडीए कर्मचारी नेताओं के पक्ष में निगम कर्मचारी भी आ गए हैं। स्वायत्त शासन कर्मचारी संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष नवल सिंह राघव एवं प्रांतीय मंत्री बाबू राम सैनी ने कहा कि अगर एमडीए कर्मचारी हड़ताल करते हैं तो निगम के कर्मचारी उसका पूर्ण समर्थन करेंगे। निगम कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष ऋषिपाल ने कहा कि कर्मचारियों की आवाज को दबाया जाना ठीक नहीं है।
पुराने कई मामलों से भी घेरने की तैयारी
एमडीए ने इस बार पूरी तरह से कर्मचारियों को घेरने की तैयारी कर ली है। जहां पल्लवपुरम में फर्जी ढंग से की गई एक रजिस्ट्री के दस्तावेज निकाले जा रहे हैं, तो वहीं शैक्षिक योग्यता के दस्तावेजों की भी जांच कराई जा रही है। उधर, बलराम सिंह पर 32 लाख रुपये के बकाया प्रकरण को भी फिर से निकाला जा रहा है। हालांकि उस प्रकरण में हुई एफआईआर भी वापस हो चुकी है।
छावनी बना रहा एमडीए
सोमवार को एमडीए कार्यालय छावनी बना रहा। भारी पुलिस बल तैनात रहा। कर्मचारी पहले तो बैठक करने की बात कह रहे थे। लेकिन गुपचुप ही बैठक हो पाई, वह भी थोड़ी ही देर के लिए। उधर, वीसी आवास पर भी पुलिस तैनात की गई है।
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शनिवार को एमडीए के उपाध्यक्ष योगेंद्र यादव के कार्यालय में कर्मचारियों द्वारा किया गया हंगामा प्रकरण अब और गंभीर होता जा रहा है। इसमें पचास से ज्यादा कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कराया गया। रविवार सुबह ही पुलिस ने कर्मचारी यूनियन अध्यक्ष सुशील त्यागी तथा बलराम सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अब सोमवार को वीसी ने लिपिक सुशील त्यागी, कपिल शर्मा, महेश शर्मा, संजीव कपिल, अनुचर आशाराम, हरि सिंह तथा पंकज गुप्ता एवं मेट कुलदीप, घनश्याम, बलराम सिंह और महाराज सिंह को निलंबित कर दिया। वीसी ऑफिस में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
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तीन जेई के खिलाफ शासन को रिपोर्ट
बताया जा रहा है कि इस हंगामे के दौरान मौजूद रहने वाले तीन अवर अभियंताओं के खिलाफ भी शासन को रिपोर्ट प्रेषित की गई है। हालांकि यहां उन पर सीधा एक्शन नहीं लिया गया है। लेकिन इस बाबत शासन को अवगत कराया गया है। इनमें प्रांतीय स्तर के पदाधिकारी भी शामिल हैं।
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गिरफ्तार कर्मचारियों की जमानत अर्जी खारिज
इस प्रकरण में गिरफ्तार कर्मचारी सुशील त्यागी और बलराम के जमानत प्रार्थना पत्र को न्यायालय सीजेएम ने सोमवार को खारिज कर दिया। आरोपियों की ओर से एडवोकेट अजय शर्मा, महावीर त्यागी, शिव शर्मा और संजय त्यागी ने पक्ष रखा तो वहीं सरकार की ओर से डीजीसी फौजदारी अनिल तोमर, संयुक्त निदेशक अभियोजन रूबी यादव, और अमित दीक्षित अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। आरोपी पक्ष की ओर से कहा गया कि उन्हें फर्जी तरीके से फंसाया गया है। वे कुछ मांगों को अधिकारियों के सामने रखने गए थे। वहीं, अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि यदि सरकारी कार्य में इस प्रकार व्यवधान खुद सरकारी कर्मचारियों द्वारा किया जाता है तो एमडीए में कोई भी कार्य स्वच्छ स्तर से हो पाना संभव नहीं होगा। न्यायालय सीजेएम तरवेज आलम ने उचित आधार न पाते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
एमडीए कर्मचारी नेताओं को समर्थन
गिरफ्तार एमडीए कर्मचारी नेताओं के पक्ष में निगम कर्मचारी भी आ गए हैं। स्वायत्त शासन कर्मचारी संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष नवल सिंह राघव एवं प्रांतीय मंत्री बाबू राम सैनी ने कहा कि अगर एमडीए कर्मचारी हड़ताल करते हैं तो निगम के कर्मचारी उसका पूर्ण समर्थन करेंगे। निगम कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष ऋषिपाल ने कहा कि कर्मचारियों की आवाज को दबाया जाना ठीक नहीं है।
पुराने कई मामलों से भी घेरने की तैयारी
एमडीए ने इस बार पूरी तरह से कर्मचारियों को घेरने की तैयारी कर ली है। जहां पल्लवपुरम में फर्जी ढंग से की गई एक रजिस्ट्री के दस्तावेज निकाले जा रहे हैं, तो वहीं शैक्षिक योग्यता के दस्तावेजों की भी जांच कराई जा रही है। उधर, बलराम सिंह पर 32 लाख रुपये के बकाया प्रकरण को भी फिर से निकाला जा रहा है। हालांकि उस प्रकरण में हुई एफआईआर भी वापस हो चुकी है।
छावनी बना रहा एमडीए
सोमवार को एमडीए कार्यालय छावनी बना रहा। भारी पुलिस बल तैनात रहा। कर्मचारी पहले तो बैठक करने की बात कह रहे थे। लेकिन गुपचुप ही बैठक हो पाई, वह भी थोड़ी ही देर के लिए। उधर, वीसी आवास पर भी पुलिस तैनात की गई है।