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अपनी ही जान का दुश्मन बना युवक, पिता को बचाने में बेटी को भी लगी गोली, दोनों गंभीर

Mon, 10 Jul 2017 04:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर Updated Mon, 10 Jul 2017 04:19 PM IST
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Daughter on the life to save father, the young man raised this step
घायल बेटी अस्पताल में भर्ती

ऐसा क्या हुआ कि युवक अपनी ही जान का दुश्मन बन बैठा। युवक ने तमंचे से खुद को गोली मार ली। वहीं पिता को बचाने के लिये बेटी तमंचा छीनने लगी तो एक और बड़ी वारदात हो गई। पत्नी की मौत और तंगहाली के कारण तनाव में चल रहे एक व्यक्ति ने खुद को गोली मार ली। इस दौरान बेटी ने जान पर खेल कर पिता को बचाने की कोशिश की, तो उसको भी दो गोली लग गई। दोनों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां से पिता को हायर सेंटर भेजा गया है। घटना के समय पिता को बचाने के लिए बेटी जान पर खेल गई और दो गोलियां उसे ही लगीं।

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कोतवाली बेहट क्षेत्र के बाबैल बुजुर्ग गांव निवासी जंगशेर उर्फ पप्पू (45) दोपहर करीब एक बजे अपने घर पहुंचा। घर पर उसकी बेटी रजनी (22) थी। अचानक ही उसने तमंचा उठाया और उसमें कारतूस भरकर खुद को गोली मारने चाही। लेकिन गोली चलने से पहले रजनी की निगाह जंगशेर पर पड़ गई। उसने जंगशेर से तमंचा छीनने का प्रयास किया। इस दौरान गोली चल गई और रजनी की बांह में लग गई। इस पर जंगशेर ने दूसरा कारतूस तमंचे में डाला। लेकिन रजनी फिर से तमंचा छीनने लगी। इस बार गोली चली तो रजनी की टांग पर लग गई और वह नीचे गिर गई। बेटी के बेबस होने पर जंगशेर ने तीसरा कारतूस तमंचे में भरा और अपने आप को गोली मार ली। करीब एक घंटे तक दोनों बंद मकान में लहूलुहान हालत में पड़े रहे। तीन बजे जंगशेर का बेटा हनी घर पहुंचा तो अंदर से दरवाजा बंद होने पर किसी तरह गेट खोला। अंदर बहन और पिता को लहूलुहान हालत में पड़े देख उसके होश उड़ गए। उसने तुरंत पड़ोसियों की मदद से दोनों को जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया। जंगशेर को प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत के चलते हायर सेंटर रेफर किया गया। बताया गया है कि चार साल पहले जंगशेर की पत्नी रीना की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। पत्नी की बीमारी में अधिक खर्च होने जाने पर जंगशेर आर्थिक तंगी से भी जूझ रहा था, जिससे वह तनाव में था। इस मामले में कोतवाली प्रभारी वेदप्रकाश गिरि का कहना है कि अभी तहरीर नहीं आई है। लेकिन जानकारी मिली है कि जंगशेर मानसिक तनाव में था। इसलिए यह कदम उठाया है।

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पिता को रोकती रही, जख्मी होती गई

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अस्पताल में घायल युवक

पिता को आत्महत्या से रोकने के लिए तमंचा छीनने के दौरान पहली गोली रजनी की बांह पर लगी, लेकिन उसे हिम्मत नहीं हारी। जब जंगशेर ने दूसरी गोली तमंचे में लोड की और खुद को मारनी चाही तब भी रजनी अपनी जान पर खेल गई और तमंचा पकड़कर छीनना चाहा। दूसरी गोली टांग में लगने पर वह नीचे गिरने के बाद बेबस हो गई। बेटी के लाचार होने पर ही जंगशेर ने खुद को गोली मारी।

तंगहाली से जूझ रहा था जंगशेर
जंगशेर के पास 15-20 बीघा जमीन थी। चार साल पहले उसकी पत्नी रीना बीमार हुई तो उसके इलाज पर काफी खर्च होने से उस पर कर्ज बढ़ गया। उसके बाद पत्नी की मौत हो गई तो जंगशेर टूट गया। बेटी रजनी की पढ़ाई भी बीच में ही छुड़वानी पड़ी। कर्ज के चलते उसने सारी जमीन बेच दी। इकलौता बेटा हनी (18) उत्तराखंड़ के भगवानपुर की किसी फैक्ट्री में काम कर रहा था। उसी से ही घर का खर्च चलता था। पत्नी की मौत और आर्थिक तंगी के चलते जंगशेर तनाव में था।

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