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भ्रूण लिंग परीक्षण करने वालों का भंडाफोड़, एक पकड़ा

Mon, 04 Mar 2019 02:39 AM IST
Gaurav sharma न्यूज ब्यूरो, अमर उजाला
न्यूज ब्यूरो, अमर उजाला Published by: Gaurav sharma Updated Mon, 04 Mar 2019 02:39 AM IST
सार

- कोतवाली क्षेत्र में हरियाणा और स्वास्थ्य विभाग टीम ने की छापामारी
- आठ हजार रुपये लेकर एक आरोपी फरार, डॉक्टर समेत तीन पर रिपोर्ट
- मुखबिर योजना के तहत मिथ्या ग्राहक बनकर की कार्रवाई

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Breach of fetus gender test, one caught
मेरठ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार


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मेरठ और हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रविवार को मुखबिर योजना के तहत कोतवाली क्षेत्र में एक नर्सिंग होम में छापामारी कर भ्रूण लिंग परीक्षण करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। टीम नर्सिंग होम संचालक की भूमिका की जांच कर रही है। वहीं गिरोह के एक सदस्य संजय कुमार को पकड़ा है। उसके पास से 21 हजार रुपये बरामद किए हैं। जबकि आठ हजार रुपये लेकर एक आरोपी सतपाल और एक महिला फरार हैं। इस संबंध में कोतवाली में तहरीर दी गई है।
सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला ने बताया कि एसीएमओ डॉ. जेआर मिश्रा की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई है। मामेपुर निवासी पकड़ा गया आरोपी संजय चौहान गंगानगर में ही एक नर्सिंग होम चलाता है। फरार सतपाल का गंगानगर में ही मेडिकल स्टोर है। वहीं आरोपी डॉ. शबाना परवीन पर बिना मरीज को देखे रेफर स्लिप बनाने का आरोप है। एसीएमओ डॉ. जेआर मिश्रा ने बताया कि मुखबिर योजना के तहत एक महिला को 30 हजार रुपये देकर इन दलालों से संपर्क करने के लिए कहा गया था। महिला ने संपर्क किया तो दलाल पैसे लेकर उसे अलग-अलग अस्पतालों में भेजते रहे। बाद में कोतवाली स्थित एक अस्पताल भेजा तो स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक आरोपी को पकड़ लिया। हालांकि यह पुष्टि नहीं हो सकी दलालों ने अस्पताल संचालक से संपर्क किया था या नहीं। इसकी जांच जारी है। हरियाणा की टीम में डिप्टी सीएमओ आदर्श शर्मा थे। उनकी टीम को ही इसकी जानकारी मिली थी। उन्होंने बताया कि सतपाल के पास डिक्वाय ऑपरेशन के 22 हजार रुपये थे। जिनमें से उसने एक हजार रुपये एक किशोर को दिए थे। किशोर को भी पकड़ा गया था, मगर बाद में उसकी भूमिका न पाए जाने पर उसे छोड़ दिया गया।
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मेरठ स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिल रहे मुखबिर
स्वास्थ्य विभाग को भ्रूण हत्या रोकने के मकसद से किए जाने वाले स्टिंग ऑपरेशन के लिए मुखबिर नहीं मिल रहे हैं। नतीजतन, एक जुलाई 2017 से लागू हो चुकी शासन की ‘मुखबिर योजना’ मेरठ में परवान नहीं चढ़ पा रही है। अभी तक छह मामले पकड़े गए हैं और सभी हरियाणा सोनीपत की टीम ने पकड़े हैं। सिर्फ एक मामला गाजियाबाद क्षेत्र में मेरठ की टीम ने किया था।
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यह है मुखबिर योजना
एक स्टिंग ऑपरेशन पर शासन दो लाख रुपये खर्च करता है। इनमें भ्रूण जांच या गर्भपात कराने वाले सेंटर को ढूंढने वाले व्यक्ति को 60 हजार रुपये दिए जाते हैं। जो महिला मिथ्या गर्भवती बनकर सेंटर में जाएगी, उसे एक लाख रुपये दिए जाते हैं। जो महिला के साथ सहयोगी बनकर जाएगा या जाएगी उसे 40 हजार रुपये दिए जाते हैं।

पांच साल तक की सजा
इसमें दोष सिद्ध होने पर पांच साल कैद और एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। डॉक्टर और जांच कराने वाले व्यक्तियों (महिला-पुरुष) को समान कैद और जुर्माना हो सकता है।

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हरियाणा का मुखबिर सिस्टम मजबूत
सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना हैकि मुखबिर योजना पर फिर से काम किया जा रहा है। सूचना मिलने पर छापामारी की जाएगी। लिंगानुपात बढ़ाने के लिए समाज में जागरूकता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मेरठ के मुकाबले हरियाणा का मुखबिर सिस्टम मजबूत है, इसलिए वह इस तरह के खुलासे कर रहे हैं।
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