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सीसीएसयू ने पकड़े 500 फर्जी एडमिशन
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 07 Nov 2015 02:04 AM IST
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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने मेरठ और सहारनपुर मंडल के डिग्री कॉलेजों में करीब 500 फर्जी एडमिशन पकड़े हैं। इनमें ज्यादातर एडमिशन मेरठ के डिग्री कॉलेजों में हुए हैं। 2014 और 2015 में हुए एडमिशन की जांच में यह फर्जीवाड़ा सामने आया है। रजिस्ट्रार की ओर से कॉलेज वार फर्जी एडमिशन की जानकारी भेजी गई है। कॉलेजों को कार्रवाई के लिए तीन दिन का वक्त दिया है।
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सीसीएसयू तीन साल से ऑनलाइन प्रणाली की तहत एडमिशन करा रहा है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के बाद विवि कॉलेजों को मेरिट जारी करता है और वह एडमिशन करते हैं। रजिस्ट्रेशन में फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। मेरठ कॉलेज ने 93 और एनएएस कॉलेज ने 34 फर्जी एडमिशन पकड़े थे।
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इसके बाद रजिस्ट्रार दीपचंद्र ने फर्जी एडमिशन की जांच शुरू की। कंपनी से सॉफ्टवेयर तीन दिन तक रन कराया तो फर्जीवाड़े की पोल खुली। रजिस्ट्रार का कहना है मेरठ और सहारनपुर मंडल में 2014 और 2015 में करीब 500 फर्जी एडमिशन पकड़ में आए हैं। कॉलेजों को लिस्ट बनाकर भेजी जा रही है। तीन दिन का वक्त अपने स्तर से गहन जांच कर एडमिशन कैंसिल करने और एफआईआर दर्ज कराने का दिया है। रजिस्ट्रार का कहना है 2013 के एडमिशन की भी जांच की जाएगी। उसमें भी फर्जी एडमिशन होने की उम्मीद है। रैकेट का पकड़ा जाना जरूरी है।
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दो तरह से हुआ फर्जीवाड़ा
फर्जीवाड़े में रैकेट शामिल है। उसने दो तरह से फर्जीवाड़ा किया। विवि ने 2014 और 2015 में सीबीएसई बोर्ड, यूपी बोर्ड और आईसीएसई बोर्ड के 12वीं के रिजल्ट का लिंक लिया था। पासिंग ईयर 2013 दशार्या। जिससे सॉफ्टवेयर में नंबर ट्रेस नहीं हुए। मार्कशीट में टेंपरिंग की। फर्जी मार्कशीट तैयार कर कॉलेजों में एडमिशन ले लिया।
वेबसाइट के लिंक की पकड़ में ऐसे प्रवेशार्थी नहीं आए। दूसरा तरीका फर्जीवाड़े में रोल नंबर का खेल किया गया। एडमिशन सिस्टम के जानकारों ने ऐसे रोल नंबर चुने जिनके नंबर अच्छे थे। रजिस्ट्रेशन के दौरान रोल नंबर से नंबर ट्रेस हो रहे थे। नाम अपना भर दिया। फर्जी मार्कशीट तैयार कर एडमिशन ले लिया। फर्जीवाड़ा दो-तीन लेवल के फिल्टर के बाद सामने आया। रोल नंबर के फर्जीवाड़े में जब छात्र का नाम और पिता का नाम मिलाया गया तो फर्जीवाड़े का पता चला।