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बीपी-पल्स रेट ओके, फिर भी हालत सीरियस   

Tue, 29 Mar 2016 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Tue, 29 Mar 2016 01:01 AM IST
BP, pulse rate OK, but serious condition
मेडिकल कॉलेज में भर्ती बंदी - फोटो : अमर उजाला
मेरठ मेडिकल कॉलेज अंडर ट्रायल कैदियों का खिदमत सेंटर बनता जा रहा है। मुरादाबाद जेल के एक कैदी के बिना बीमारी नौ माह तक मौज काटने के बाद अब बुलंदशहर के एक अंडर ट्रायल कैदी ने कमरा मांग लिया है। मजे की बात यह है कि इस कैदी को हार्ट पेशेंट बताया गया, लेकिन उसका ब्लड प्रेशर से लेकर पल्स रेट सभी नार्मल निकला। जो कमरा मांगा है, उसमें कार्डियक मॉनिटर तक नहीं है। दूसरी बात यह भी है कि मेडिकल कॉलेज में फिलहाल हार्ट स्पेशलिस्ट ही नहीं है। ऐसे में समझ नहीं आ रहा है कि कैदी यहां इलाज कराने आया है या मौज काटने। 

 

गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज में अंडर ट्रायल कैदियों को लंबे समय तक भर्ती करने को लेकर विवाद खड़ा होता रहा है। बीते साल मुरादाबाद जेल से आया कैदी मोहनती करीब नौ महीने तक मेडिकल कॉलेज में भर्ती रहा। बीच में एक-दो बार वापस गया तो फिर से लौट आया। कुल मिलाकर वह सात विभागों के अंडर में भर्ती रहा। उसे बीमारी क्या थी, अभी तक इसकी जांच ही चल रही है।


अब बुलंदशहर जेल से आये कैदी सतवीर को लेकर भी तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं। इस कैदी को बीते शनिवार मेडिकल कॉलेज में लाया गया तो हालत गंभीर बताकर सीधे इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। उसके बाद उसे इमरजेंसी से आईसीसीयू में भेज दिया गया, जहां पर उसका इलाज चल रहा है, लेकिन इलाज की प्रक्रिया पर कई स्तर से सवाल खड़ा हो रहा है। क्योंकि ट्रीटमेंट की फाइल गायब है बल्कि सादे कागज पर दवायें लिखी जा रही हैं।   सियासी हस्तक्षेप की भी चर्चा

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सादे कागजों पर दर्ज पल्स रेट व बीपी पर नजर डालें तो उसकी हालात सामान्य हैं, क्योंकि रविवार रात से लेकर सोमवार दोपहर तक का उसका बीपी पूरी तरह से सामान्य रहा।

चर्चा है कि सियासी हस्तक्षेप के बाद सतवीर को भर्ती किया गया है। तीन दिन पहले जब उसे मेडिकल कालेज में लाया गया तो इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों ने उसकी हालत सामान्य बताई थी, लेकिन कुछ ही देर में आलाधिकारियों के निर्देश पर उसे भर्ती कर लिया गया। खास बात यह है कि अगर उसे दिल की कोई गंभीर बीमारी है तो फिर रेफर किया जाना चाहिये, क्योंकि मेडिकल कालेज में कोई हार्ट स्पेशलिस्ट नहीं है। डॉ. जीके एनेजा के एडी मेडिकल चिकित्सा शिक्षा बनने के बाद से पद खाली पड़ा है। ऐसी कंडीशन में सीरियस मरीजों को रेफर करके हायर सेंटर यानी दिल्ली भेजा जाता है, लेकिन यहां पर सतवीर को रेफर नहीं किया गया, जिससे साफ होता है कि उसकी कंडीशन बेहतर है। 
 

खिदमत में लगे सिपाही 
मेडिकल
कालेज में कैदी की पूरी खिदमत की जा रही है। परिवार के सदस्य उसके साथ मौजूद हैं तो पुलिस के दो सिपाही भी ड्यूटी पर तैनात है। हर जरूरी चीज बीमारी के नाम पर उसे मुहैया कराई जा रही है। सवाल उठता है कि अगर उसकी हालत गंभीर है तो परिवार के सदस्यों को आईसीसीयू में एंट्री कैसे दी जा रही है। ऐसे में सतवीर की बीमारी को लेकर सवाल उठने लाजमी हैं। क्योंकि मोहनती भी जब सुर्खियों में आया था तो अचानक से गायब हो गया था, जिसको लेकर जांच चल रही है। 


 

कोट
कैदी
को सीने में दर्द की शिकायत के चलते भर्ती कराया गया था, अब जेल से कोई कैदी आता है तो उसका इलाज गंभीरता से करना पड़ता है। क्योंकि मामला काफी गंभीर होता है, इसलिए उसे भर्ती कराया गया था, लेकिन फिर भी दिखवाया जाएगा। अगर हालत सामान्य है तो उसे छुट्टी दे दी जाएगी। - डॉ. सुभाष सिंह, सीएमएस मेडिकल कॉलेज 

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