हस्तिनापुर समेत 26 जिलों में बनेंगे बायोडायवर्सिटी पार्क, जानिए क्या होगी इनकी खासियत
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नमामि गंगे परियोजना में गंगा जनपदों को नई पहचान मिलने वाली है। वन विभाग इन 26 गंगा जनपदों में बायोडायवर्सिटी पार्क बना रहा है। इससे न सिर्फ बच्चों-बड़ों को प्रकृति को करीब से जानने का मौका मिलेगा, बल्कि यह पार्क एक बड़े पिकनिक स्थलों के रूप में भी विकसित होंगे। मेरठ में हस्तिनापुर वन विभाग के गेस्ट हाउस को इसके लिए चुन लिया है।
दिल्ली, राजस्थान और छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों में बायोडायवर्सिटी पार्क- जैव विविधता पार्क विकसित हैं। इनकी तर्ज पर उत्तर प्रदेश में नमामि गंगे परियोजना के तहत ये पार्क विकसित किए जा रहे हैं। गंगा जनपदों वन चेतना केंद्रों, वन क्षेत्रों, आद्र भूमि और सरकारी पार्कों को बायोडायवर्सिटी पार्क के रूप में विकसित किया जाना है। यह पार्क गंगा नदी के किनारे10 किलोमीटर तक के क्षेत्र में विकसित किए जाएंगे। इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक परियोजना लखनऊ बिभाष रंजन ने इस संबंध में एक महीने पहले इन जिलों के डीएफओ को पूरा प्रपोजल तैयार कर भेजने के लिए कहा था।
डीएफओ ने बताया कि मेरठ में इसके लिए हस्तिनापुर में वन विभाग के गेस्ट हाउस को चुना है। बायोडायवर्सिटी पार्क में ऐसी प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे जो लुप्तप्राय हैं। हिमालय की तराई के अलावा विदेशी प्रजाति के पौधे इन पार्कों में होंगे। 50 वृक्ष, 20 झाड़ी, 10 लताएं, 10 विदेशी वृक्ष, 10 बांस और 10 ताड़ प्रजाति के संग्रहण से बना यह पार्क बेहद अनूठा होगा। पेड़ों के अलावा यहां पर एक कच्चे मार्ग का ट्रैक होगा। जिसमें बीच में पेड़ोें के ऊपर रस्सीदार सीढ़ीनुमा मियावाकी क्षेत्र भी होगा। जिस पर ऊपर चढ़कर बच्चे प्रकृति के अनूठे नजारे का लुत्फ उठा सकेंगे। एक जलस्रोत को झरने की तरह विकसित किया जाएगा। इन जगहों पर निवास करने वाले पंछियों के बारे में भी जगह-जगह लगे साइन बोर्ड से बच्चे-बड़े पूरी जानकारी ले पाएंगे। शोध और अध्ययन का केंद्र भी होगा जैव विविधता पार्क। नक्षत्र और सिदो-कान्हु पार्क के बाद यह पार्क भी वन विभाग के लिए लाभकारी साबित होगा।
20 से 20 प्रजाति के हैं अनोखे पक्षी
सन 1964 में हस्तिनापुर में वन विभाग का गेस्ट हाउस बनाया था। अंडर ट्रेनी आकाश बधावन बताते हैं कि करीब छह हेक्टेयर में फैले हस्तिनापुर गेस्ट हाउस में एक किलोमीटर का नैचुरल ट्रैक विकसित किया जा चुका है। यहां पर बर्ड की 20 से 25 अनोखी प्रजातियां स्पॉट की जा चुकी हैं। पार्क विकसित किए जाने पर यहां दूसरे पक्षी भी नजर आएंगे।
इन जिलों के डीएफओ से मांगी पूरी परियोजना
मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, कासगंज, बिजनौर, संभल, अमरोहा, बदायूं, शहाजहांपुर, हरदोई, रायबरेली, उन्नाव, फर्रूखाबाद, कन्नौज, कानपुर नगर, काशी वन्य जीव प्रभाग चंदौली, कौशांबी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, भदोही, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया और वाराणसी।
पूरा प्रपोजल तैयार है
मुख्य वन संरक्षक परियोजना की तरफ से इस संबंध में निर्देश दिए गए थे। हस्तिनापुर वन विभाग के गेस्ट हाउस को बायोडायवर्सिटी पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। पूरा प्रपोजल तैयार है। - अदिति शर्मा, डीएफओ मेरठ
यह होगा पार्क में
पार्क में 100 स्थानीय प्रजातियों का संग्रहण होगा। जिसमें 50 वृक्ष, 20 झाड़ी, 10 लताएं, 10 विदेशी वृक्ष, 10 बांस एवं ताड़ प्रजाति।
झरने के रूप में जलस्र्रोत
- भ्रमण के लिए कच्चा मार्ग
- प्रवेश द्वार पर रहेंगे साइनेज
- विभिन्न बायोडायवर्सिटी हॉट-स्पॉट को चिह्नित कर प्राकृतिक रूप से विश्राम स्थल
- विभिन्न स्थानीय पौधों के विषय में ज्ञान पट्टिका
- बायोडायवर्सिटी कियॉश्क का विकास
- जैव विविधता के प्रसार हेतु मधुमक्खी पालन
- सुविधा केंद्रों के इर्द-गिर्द लॉन-फूल क्यारियों का विकास
- एक जिला- एक जैव उत्पाद सुविधा स्थल
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