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अरिहंत प्रकाशन के ठिकानों पर आयकर का सर्वे

Thu, 23 Mar 2017 02:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 23 Mar 2017 02:13 AM IST
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
आयकर विभाग लगातार सर्वे अभियान में जुटा है। बुधवार को विभागीय टीम ने मेरठ के बड़े प्रकाशकों में शुमार अरिहंत प्रकाशन के तीन ठिकानों पर एक साथ सर्वे किया। पूरे दिन चले सर्वे में विभाग को बड़ी अघोषित संपत्ति की जानकारी मिली है। साथ ही रिकॉर्ड में भी खामियां हैं। विभाग ने तमाम कागजात कब्जे में ले लिए हैं।
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आयकर विभाग इस समय उन लोगों को टारगेट किये हुए है, जिन लोगों ने नोटबंदी के दौरान बैंक खातों में ज्यादा रकम जमा की थी। इन लोगाें को विभाग की तरफ से नोटिस जारी किया था। लेकिन जब नोटिस पर कोई जवाब नहीं दिया तो विभाग ने सर्वे की कार्रवाई शुरू कर दी है। पांच दिन पहले ही आयकर विभाग ने सेंट्रल मार्केट में दवा व्यापारी और नवीन मंडी में दो गल्ला व्यापारियों के यहां सर्वे की कार्रवाई की थी। बुधवार को ज्वाइंट कमिश्नर आर्केंद्र सिंह के निर्देशन में तीन टीम गठित की गईं। एक साथ अरिहंत प्रकाशन के मोहकमपुर इंडस्ट्रिल एरिया, टीपीनगर क्षेत्र के कालंदी कुंज और पैराडाइज माल स्थित गोदाम, प्रिंटिंग प्रेस व ऑफिस में छापे मारे। यहां पर टीम ने तमाम दस्तावेजों की जांच के साथ बैंक अकाउंट, बिल बुक, बही खातों की जांच की। घंटों तक चली कार्रवाई के दौरान विभागीय टीम ने कई दस्तावेज अपने कब्जे में लिए।
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करोड़ों की हेराफेरी की आशंका
विभागीय सूत्रों की मानें तो सर्वे में प्रथम दृष्टया कई करोड़ की हेराफेरी सामने आई है। जांच के बाद ही सही आंकलन सामने आ पाएगा। ज्वाइंट कमिश्नर अर्केंद्र सिंह ने बताया कि सर्वे की जांच रिपोर्ट तैयार होने में समय लगता है, जिसमें तीन माह से लेकर एक साल तक भी लग सकता है। हर बिंदु पर गंभीरता से रिपोर्ट तैयार होगी।
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योजना में राहत लेने की तैयारी
सूत्रों ने बताया कि प्रकाशकों ने गड़बड़ी स्वीकार कर ली है। इस गड़बड़ी से बचने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना को अपनाने की बात भी की है। ऐसे में साफ है कि सर्वे में विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है।


ये है प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना
ज्वाइंट कमिश्नर के अनुसार जिन लोगों के पास अघोषित संपत्ति पकड़ी जा रही है या फिर अभी जो लोग दबाये बैठे हैं, उनके लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना है। इस योजना में कुल अघोषित संपत्ति पर 49.9 प्रतिशत टैक्स देना होगा। इसके साथ ही उसे 25 प्रतिशत के आरबीआई के बांड खरीदने होंगे, जो बिना ब्याज के होंगे। चार साल बाद उनकी वापसी होगी। ऐसे में 25 प्रतिशत धनराशि उक्त व्यक्ति को वापस मिल जाएगी। इस योजना की अंतिम तिथि 31 मार्च है। इसलिए विभाग आने वाले सप्ताह में सर्वे की कार्रवाई और तेज करेगा।
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