मेरठ समेत दिल्ली-एनसीआर में और जहरीली हुई हवा, नहीं छटीं स्मॉग की चादर, बरतें सावधानी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेरठ समेत दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) भयावह स्थिति में पहुंच चुका है। दीपावली के बाद स्थिति लगातार बिगड़ रही है। मेरठ में मंगलवार को दिनभर स्मॉग की चादर तनी रही। धूप के दर्शन नहीं हुए, सूरज की किरणें स्मॉग में ढकी रहीं। सबसे ज्यादा पल्लवपुरम की हवा खराब रही। लोगों को सांस लेने में दिक्कत के साथ आंख में जलन की शिकायत भी हो रही है।
दीपावली से पहले मेरठ का आसमान साफ था। दीपावली के अगले दिन से स्थिति बिगड़ने लगी। सोमवार को मेरठ का एक्यूआई 352 था, जो मंगलवार को बढ़कर 379 पहुंच गया। पल्लवपुरम क्षेत्र का एक्यूआई खतरे के स्तर को पार कर 426 पहुंच गया। वहीं गंगानगर, जयभीमनगर में भी सोमवार के मुकाबले प्रदूषण अधिक रहा।
माना जा रहा है कि शहरी क्षेत्र से कहीं अधिक देहात इलाकों में पटाखे चलाए गए। यही वजह है ग्रामीण क्षेत्र से सटे शहरी मोहल्लों में प्रदूषण भयावह स्तर पर पहुंच चुका है। चूंकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देहात इलाकों को कोई मॉनिटरिंग नहीं की इस वजह से वहां के आंकड़े नहीं मिल पा रहे। मौसम वैज्ञानिक डा. एन सुभाष का कहना है कि स्मॉग का असर अभी 48 घंटे तक तक बना रहेगा। एक्यूआई का स्तर भी बढ़ सकता है। हवा का रुख पूरी तरह शांत रहने से भी स्थिति खराब हो रही है।
तापमान में आएगी गिरावट
पश्चिमी विक्षोभ के चलते तापमान में भी गिरावट आएगी। पिछले तीन दिनों में दिन और रात के तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। मौसम कार्यालय पर मंगलवार को दिन का अधिकतम तामपान 28.0 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 17.2 डिग्री दर्ज किया गया। अधिकतम आर्द्रता 94 प्रतिशत, न्यूतनतम 65 प्रतिशत रही।
सांस और साइनस के मरीजों को हो रही दिक्कत
जहरीली हुई हवा से सावधान रहने की जरूरत है। यह आपको सांस का रोगी बना सकती है। सांस, शुगर, ब्लड प्रेशर और साइनस के मरीजों के लिए ज्यादा परेशानी का सबब है। सुबह और शाम में तापमान में गिरावट केसाथ ही हवा में पार्टिकल मैटर (पीएम) अति सूक्ष्म कण तेजी से बढ़ रहे हैं।
आसमान में गिर रही ओसकेकारण नमी हो गई है। इसकी वजह से धूल के कण ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं, जिसकी वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। धुंध फैल रही है। चिकित्सकों के पास और अस्पतालों में अस्थमा, साइनस, अन्य सांस संबंधी और एलर्जी के मरीजों की तादाद बढ़ने लगी है
प्रदूषण से हो सकती हैं यह समस्याएं
आंखों में जलन, सांस संबंधी परेशानियां, फेफड़ों में संक्रमण, घबराहट, सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, त्वचा संबंधी बीमारियां प्रदूषण की प्रमुख व तात्कालिक समस्याएं हैं।
- सुबह और शाम केसमय टहलने से बचें
- कमरे में एग्जॉस्ट चलाएं
- घर से बाहर निकलें तो मुंह पर रुमाल लगा लें
- पेय पदार्थ ज्यादा लें, खासकर गर्म पेय पदार्थ
- घरों की खिड़कियां-दरवाजें बंद रखें
- सांस के मरीज अपनी दवाएं समय से लें
- खुले में व्यायाम करने से भी बचें।
- तरलीय पदार्थ ज्यादा से ज्यादा लें। धूम्रपान को न कहें।
- घर से बाहर निकलें तो अच्छी क्वालिटी का मास्क लगाएं।
- कोई परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
- घर के आस-पास कूड़ा-कचरा जल रहा हो तो उसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दें।
प्रदूषण पर रोकथाम के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। पूर्व में भी कोल्हुओं पर हो रहे प्रतिबंधित ईधन के प्रयोग पर रोक लगाते हुए उन्हें सील किया गया था। प्रदूषण को रोकने के लिए आगे भी कार्रवाई की जाएगी। महानगर में जहां-जहां प्रदूषण बढ़ा है, वहां की मॉनिटरिंग कराई जाएगी। -आरके त्यागी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
बारिश के बाद ही स्थिति सुधरेगी
बुधवार को भी स्मॉग का असर बना हुआ है। तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो हवा व बारिश के न होने तक हवा में जहर घुला रहेगा। बारिश के बाद ही हवा में फैला जहर व स्मॉग की चादर से लोगों को राहत मिलेगी। -डा. योगेंद्र कुमार, सहायक प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी