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किसानों की बढ़ी चिंता: दो दिन की बारिश से बिगड़ा बासमती का स्वाद, अन्य फसलों पर भी असर

Tue, 19 Oct 2021 12:50 PM IST
Dimple Sirohi मोहित कुमार, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
मोहित कुमार, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 19 Oct 2021 12:50 PM IST
सार

अक्तूबर माह के मध्य में पिछले दो दिन से लगातार हुई बारिश के बाद किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं। बारिश और हवा से धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। वहीं बासमती का स्वाद भी बिगड़ गया है। बताया गया कि धान के साथ-साथ अन्य फसलें भी प्रभावित हुई हैं। 
 

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Agriculture news: Two days of rain spoiled the taste of basmati, other crops also affected as well
बारिश के कारण गिरी धान की फसल, शर्मा डॉ. रितेश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सितंबर के बाद अब अक्तूबर माह में बारिश के कारण बासमती धान की फसल प्रभावित हुई है। इससे बासमती का स्वाद बिगड़ा है। लगातार बारिश और हवा के चलते किसान चिंतित हैं। फसल गिरने से उत्पादन पर भी असर की संभावना है।  

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उत्तर प्रदेश में लगभग साढ़े चार लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बासमती धान की खेती की जा रही है। इसकी प्रमुख किस्में पूसा बासमती 1121, पूसा बासमती 1509, पूसा बासमती 11, पूसा बासमती 1637 सहित अन्य हैं। इस माह लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश के साथ हवा से अधिकतर किसानों की फसल गिर गई है। इससे काफी नुकसान की आशंका है।
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बामसती निर्यात विकास प्रतिष्ठान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा का कहना है कि अंदाजा लगाया जा रहा था कि इस बार धान का उत्पादन अच्छा होगा। लेकिन, अब मौसम में बदलाव आने के साथ लाभ कम नुकसान ज्यादा कर रहा है। उन्होंने बताया कि बारिश के साथ तेज हवाओं के चलने से फसल गिरने से उत्पादन पर असर पड़ेगा। यदि और ज्यादा बारिश हुई तो नुकसान भी बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि फसल गिरने से सबसे अधिक नुकसान होता है। 
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धान के साथ अन्य फसलों पर भी असर
इस समय गोभी, आलू की बुवाई का समय चल रहा है। साथ ही पशुओं के चारे के लिए किसान बरसीम की खेती का मन बना रहे थे। लेकिन, पिछले दो दिन से हो रही तेज बारिश के कारण फसलें प्रभावित हुई है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरएस सेंगर ने बताया कि जिन किसानों ने अगेती गोभी की बुवाई की। उनकी फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। साथ ही आलू व बरसीम की बुवाई करने की सोच रहे किसानों को अब खेत सूखने का इंतजार करना पड़ेगा।

खेतों में ज्यादा पानी न रहने दें किसान
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि पंजाब और हरियाणा की तुलना में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कम कीटनाशकों के प्रयोग के कारण वहां के निर्यातक भी यहां का धान चाहते हैं। अभी बासमती 1121, 1718 और सीएसआर 30 में बाली निकलना शुरू होने वाला है।

यह समय बहुत महत्वपूर्ण है इस समय पर यदि गलत कीटनाशक का प्रयोग किया जाएगा तो निर्यात में समस्या आएंगी और यहां के किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलेगा। कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव है कि ट्राईसाईक्लाजोल, बुप्रोफेजिन, एसिफेट, थायोफेनेट, थायो मेथॉक्सम एसीफेट कार्बेंडाजिम आदि रसायनों का प्रयोग इस समय बिल्कुल न करें और खेतों में ज्यादा पानी भरा ना रखें। 

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