{"_id":"52-68530","slug":"Meerut-68530-52","type":"story","status":"publish","title_hn":"अवैध वैवाहिक मंडप ध्वस्त ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अवैध वैवाहिक मंडप ध्वस्त
Meerut
Updated Thu, 13 Feb 2014 05:44 AM IST
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मेरठ। कैंट वीरबाला पथ स्थित बंगला नंबर 80 के एक हिस्से में चल रहे अवैध वैवाहिक मंडप पर कैंट बोर्ड का बुलडोजर चल गया। अपर सिविल कोर्ट के आदेश पर कैंट बोर्ड की टीम ने कार्रवाई की। ध्वस्तीकरण के दौरान टीम को विरोध भी झेलना पड़ा।
बंगला नंबर 80 में अवैध वैवाहिक मंडप के मामले में 20 जनवरी 2014 को अपर सिविल जज ने कैंट बोर्ड के पक्ष में फैसला सुनाया। इसका आदेश कैंट बोर्ड को मंगलवार शाम को मिला। कोर्ट का आदेश मिलने पर सीईओ डा. डीएन यादव ने ध्वस्तीकरण के आदेश दिए। बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे सहायक अभियंता पीयूष गौतम के नेतृत्व में कैंट बोर्ड कर्मचारी और सदर थाने की पुलिस मौके पर पहुंचे। टीम ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की कब्जेदार पप्पू बिल्डर ने विरोध शुरू कर दिया। बिल्डर ने पहले तो किसी अन्य मामले का आदेश दिखाकर गुमराह करने की कोशिश की और फिर सामान निकालने की बात कर टीम को आधे घंटे तक रोके रखा। विवाद बढ़ता देख कैंट बोर्ड सहायक अभियंता पीयूष गौतम ने पुलिस की मदद से कार्रवाई शुरू कर दी। आवासीय बंगले के मैदान पर खड़े किए गए सवा तीन हजार स्वायर फिट के टीन शेड को जमींदोज किया गया। इस दौरान सदर थाना इंस्पेक्टर ब्रजमोहन यादव, जेई केए गुप्ता, सफाई अधीक्षक वीके त्यागी, योगेश यादव समेत 50 से अधिक कैंट बोर्ड कर्मचारी मौजूद रहे। पूरे मामले पर कैंट बोर्ड सीईओ डा. डीएन यादव और सब एरिया मुख्यालय एडम कमांडेंट कर्नल आरके शर्मा की भी नजर रही। वहीं पुलिस बल कम होने के कारण कार्रवाई के दौरान सेना के जवानों को भी लगाया गया।
ये था मामला
रक्षा मंत्रालय के मालिकाना हक वाले वीरबाला पथ स्थित बंगला नंबर 80 की कब्जेदार जनरल लैंड रिकॉर्ड में किरनवती के नाम पर है। जिसके अलग-अलग हिस्से पर अवैध कब्जा है। बंगले के एक हिस्से पर सालों से वीरेंद्र कुमार उर्फ पप्पू बिल्डर वैवाहिक मंडप चला रहा था। 31 अगस्त 2010 को कैंट बोर्ड ने बिल्डर को अवैध निर्माण तोड़ने का फाइनल नोटिस दिया और पप्पू ने जिला कोर्ट चला गया। 20 जनवरी को सिविल जज ने बिल्डर की याचिका खारिज कर दी।
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अब बोर्ड में नहीं दबाए जाते आदेश
जिला अदालत के आदेश हों या फिर मध्य कमान और हाईकोर्ट के आदेश। पूर्व में ऐसे आदेशों का समय पर पालन न कर बोर्ड अधिकारी और इंजीनियर सेक्शन अवैध निर्माण कर्ता को उच्च न्यायालय में जाने का मौका देते थे। जिसके कारण अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं होती थी। यही वजह है कि बंगला नंबर 210बी, 22बी जैसे आवासीय बंगले में होटल और व्यवसायिक भवन खडे़ कर दिए गए। अब कैंट बोर्ड प्रशासन की कोशिश होती है कि कोर्ट या फिर मध्य कमान के आदेश पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
वर्जन
कोर्ट से कैंट बोर्ड के पक्ष में फैसला आने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई और भविष्य में भी अवैध निर्माण पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। - डा. डीएन यादव, सीईओ कैंट बोर्ड
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बंगला नंबर 80 में अवैध वैवाहिक मंडप के मामले में 20 जनवरी 2014 को अपर सिविल जज ने कैंट बोर्ड के पक्ष में फैसला सुनाया। इसका आदेश कैंट बोर्ड को मंगलवार शाम को मिला। कोर्ट का आदेश मिलने पर सीईओ डा. डीएन यादव ने ध्वस्तीकरण के आदेश दिए। बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे सहायक अभियंता पीयूष गौतम के नेतृत्व में कैंट बोर्ड कर्मचारी और सदर थाने की पुलिस मौके पर पहुंचे। टीम ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की कब्जेदार पप्पू बिल्डर ने विरोध शुरू कर दिया। बिल्डर ने पहले तो किसी अन्य मामले का आदेश दिखाकर गुमराह करने की कोशिश की और फिर सामान निकालने की बात कर टीम को आधे घंटे तक रोके रखा। विवाद बढ़ता देख कैंट बोर्ड सहायक अभियंता पीयूष गौतम ने पुलिस की मदद से कार्रवाई शुरू कर दी। आवासीय बंगले के मैदान पर खड़े किए गए सवा तीन हजार स्वायर फिट के टीन शेड को जमींदोज किया गया। इस दौरान सदर थाना इंस्पेक्टर ब्रजमोहन यादव, जेई केए गुप्ता, सफाई अधीक्षक वीके त्यागी, योगेश यादव समेत 50 से अधिक कैंट बोर्ड कर्मचारी मौजूद रहे। पूरे मामले पर कैंट बोर्ड सीईओ डा. डीएन यादव और सब एरिया मुख्यालय एडम कमांडेंट कर्नल आरके शर्मा की भी नजर रही। वहीं पुलिस बल कम होने के कारण कार्रवाई के दौरान सेना के जवानों को भी लगाया गया।
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ये था मामला
रक्षा मंत्रालय के मालिकाना हक वाले वीरबाला पथ स्थित बंगला नंबर 80 की कब्जेदार जनरल लैंड रिकॉर्ड में किरनवती के नाम पर है। जिसके अलग-अलग हिस्से पर अवैध कब्जा है। बंगले के एक हिस्से पर सालों से वीरेंद्र कुमार उर्फ पप्पू बिल्डर वैवाहिक मंडप चला रहा था। 31 अगस्त 2010 को कैंट बोर्ड ने बिल्डर को अवैध निर्माण तोड़ने का फाइनल नोटिस दिया और पप्पू ने जिला कोर्ट चला गया। 20 जनवरी को सिविल जज ने बिल्डर की याचिका खारिज कर दी।
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अब बोर्ड में नहीं दबाए जाते आदेश
जिला अदालत के आदेश हों या फिर मध्य कमान और हाईकोर्ट के आदेश। पूर्व में ऐसे आदेशों का समय पर पालन न कर बोर्ड अधिकारी और इंजीनियर सेक्शन अवैध निर्माण कर्ता को उच्च न्यायालय में जाने का मौका देते थे। जिसके कारण अवैध निर्माण पर कार्रवाई नहीं होती थी। यही वजह है कि बंगला नंबर 210बी, 22बी जैसे आवासीय बंगले में होटल और व्यवसायिक भवन खडे़ कर दिए गए। अब कैंट बोर्ड प्रशासन की कोशिश होती है कि कोर्ट या फिर मध्य कमान के आदेश पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
वर्जन
कोर्ट से कैंट बोर्ड के पक्ष में फैसला आने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई और भविष्य में भी अवैध निर्माण पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। - डा. डीएन यादव, सीईओ कैंट बोर्ड