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फिर बंदी फरार, तीन सिपाही गिरफ्तार
Meerut
Updated Fri, 26 Apr 2013 05:30 AM IST
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मेरठ। एक बार फिर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया बंदी फरार हो गया। वह हत्या और बलात्कार सहित चार से अधिक आपराधिक मामलों में आरोपी है। पिछले सात सालों से वह जेल में था। उसकी सुरक्षा में लगे तीन सिपाहियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
सरूरपुर थाना क्षेत्र के हर्रा निवासी इरफान (35) पुत्र अयूब कातिलाना हमले के मामले में वर्ष 2006 से मेरठ जेल में बंद था। मंगलवार को कोर्ट में पेशी के दौरान हवालात में उसकी हालत बिगड़ गई थी। उसे जिला अस्पताल ले जाया गया और फिर मेडिकल कॉलेज के एमएम टू वार्ड में भर्ती कराया गया था। वहां बेड नंबर 50 पर उसका उपचार चल रहा था। उसकी सुरक्षा में सिपाही विनोद कुमार, नरेश कुमार और अरुण कुमार तैनात थे।
बृहस्पतिवार सुबह करीब सवा पांच बजे इरफान फरार हो गया। उस दौरान सिपाही अरुण और नरेश वहां मौजूद थे और सोए हुए थे, जबकि सिपाही विनोद रात में ही ड्यूटी से गायब होकर घर चला गया था। बंदी के भागने पर पुलिस कर्मियों में हड़कंप मच गया। मामले की जानकारी मिलने पर एसएसपी दीपक कुमार के निर्देश पर प्रतिसार निरीक्षक भगवान यादव मौके पर पहुंचे। मेडिकल थाना पुलिस भी पहुंची। तब भी सिपाही विनोद वहां नहीं था। फिर सिपाही विनोद को फोन करके वहां बुलाया गया। इसके बाद तीनों सिपाहियों को हिरासत में लेकर मेडिकल थाना पुलिस के हवाले कर दिया।
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एसएसपी के मुताबिक तीनों सिपाहियों को लापरवाही के चलते निलंबित कर दिया गया है। मामले में रिपोर्ट दर्ज हो गई है तथा तीनों सिपाही गिरफ्तार कर लिए गए हैं।
महीन भर पहले भी भागा था कैदी
इसी साल 22 मार्च को ही बिजनौर जेल से लाया गया सजायाफ्ता महेंद्र भी पुलिस की लापरवाही के चलते मेडिकल कॉलेज से फरार हुआ था। महेंद्र बाथरूम की टूटी खिड़की लांघकर भागा था। इस मामले में भी तीन सिपाहियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा 2012 में पुलिस अभिरक्षा से बंदी पंकज भी फरार हो चुका है। जेल सूत्रों की मानें, तो एक साल के भीतर आधा दर्जन बंदी पुलिस अभिरक्षा और अस्पताल से फरार हो चुके हैं। इनमें से पुलिस किसी को भी गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
तीसरी मंजिल से कैसे भाग गया बंदी
मेडिकल मेल वार्ड टू तीसरी मंजिल पर है। नीचे से वहां तक पहुंचने में ही करीब 10 मिनट तक लग जाते हैं। वार्ड में खिड़कियां भी टूटी नहीं है। जाहिर है कि बंदी इरफान मुख्य दरवाजे से ही फरार हुआ। इरफान भाग गया और पुलिस वालों को भनक तक नहीं लगी। एसओ सरूरपुर की मानें तो इरफान पर हत्या के दो, बलात्कार का एक और मारपीट सहित चार से अधिक मामले दर्ज हैं।
बहाना बीमारी, मकसद फरारी
बंदी की फरारी के बाद मेडिकल का लाइव
बदमाशों की मददगार पुलिस की लापरवाही
मेरठ। मेडिकल कॉलेज के मेल वार्ड-2 से विचाराधीन बंदी के फरार होने के बाद भी पुलिस नहीं चेती। बृहस्पतिवार दोपहर करीब सवा तीन बजे जब अमर उजाला टीम उसी वार्ड में पहुंची, तो पुलिस की लापरवाही सामने बिखरी मिली। एक और बंदी वहां बेड पर आराम से बैठा था। उसके हाथ में हथकड़ी भी नहीं थी और पुलिसकर्मी बाहर कुर्सी पर विराजमान थे। कैमरा चलते ही पुलिसकर्मी बेड की तरफ दौड़ पड़े और बीमार बंदी सुरेंद्र पाल के हाथ में हथकड़ी लगाने लगे। जानी थाने के ढढरा गांव निवासी सुरेंद्र को एक माह पहले मेडिकल में भर्ती कराया गया था। पूछने पर सिपाहियों ने कह दिया कि अभी बंदी को दवाई लेनी थी, जिस कारण हथकड़ी खोल दी थी। सिपाही यह भी कहने लगे कि ये फोटो मत छापना, हम तो बागपत से आए हैं। ताज्जुब इस बात का है कि मेडिकल कॉलेज से लगातार बंदी फरार हो रहे हैं, मगर पुलिस अपनी लापरवाही छोड़ने को तैयार नहीं है।
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सरूरपुर थाना क्षेत्र के हर्रा निवासी इरफान (35) पुत्र अयूब कातिलाना हमले के मामले में वर्ष 2006 से मेरठ जेल में बंद था। मंगलवार को कोर्ट में पेशी के दौरान हवालात में उसकी हालत बिगड़ गई थी। उसे जिला अस्पताल ले जाया गया और फिर मेडिकल कॉलेज के एमएम टू वार्ड में भर्ती कराया गया था। वहां बेड नंबर 50 पर उसका उपचार चल रहा था। उसकी सुरक्षा में सिपाही विनोद कुमार, नरेश कुमार और अरुण कुमार तैनात थे।
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बृहस्पतिवार सुबह करीब सवा पांच बजे इरफान फरार हो गया। उस दौरान सिपाही अरुण और नरेश वहां मौजूद थे और सोए हुए थे, जबकि सिपाही विनोद रात में ही ड्यूटी से गायब होकर घर चला गया था। बंदी के भागने पर पुलिस कर्मियों में हड़कंप मच गया। मामले की जानकारी मिलने पर एसएसपी दीपक कुमार के निर्देश पर प्रतिसार निरीक्षक भगवान यादव मौके पर पहुंचे। मेडिकल थाना पुलिस भी पहुंची। तब भी सिपाही विनोद वहां नहीं था। फिर सिपाही विनोद को फोन करके वहां बुलाया गया। इसके बाद तीनों सिपाहियों को हिरासत में लेकर मेडिकल थाना पुलिस के हवाले कर दिया।
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एसएसपी के मुताबिक तीनों सिपाहियों को लापरवाही के चलते निलंबित कर दिया गया है। मामले में रिपोर्ट दर्ज हो गई है तथा तीनों सिपाही गिरफ्तार कर लिए गए हैं।
महीन भर पहले भी भागा था कैदी
इसी साल 22 मार्च को ही बिजनौर जेल से लाया गया सजायाफ्ता महेंद्र भी पुलिस की लापरवाही के चलते मेडिकल कॉलेज से फरार हुआ था। महेंद्र बाथरूम की टूटी खिड़की लांघकर भागा था। इस मामले में भी तीन सिपाहियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा 2012 में पुलिस अभिरक्षा से बंदी पंकज भी फरार हो चुका है। जेल सूत्रों की मानें, तो एक साल के भीतर आधा दर्जन बंदी पुलिस अभिरक्षा और अस्पताल से फरार हो चुके हैं। इनमें से पुलिस किसी को भी गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
तीसरी मंजिल से कैसे भाग गया बंदी
मेडिकल मेल वार्ड टू तीसरी मंजिल पर है। नीचे से वहां तक पहुंचने में ही करीब 10 मिनट तक लग जाते हैं। वार्ड में खिड़कियां भी टूटी नहीं है। जाहिर है कि बंदी इरफान मुख्य दरवाजे से ही फरार हुआ। इरफान भाग गया और पुलिस वालों को भनक तक नहीं लगी। एसओ सरूरपुर की मानें तो इरफान पर हत्या के दो, बलात्कार का एक और मारपीट सहित चार से अधिक मामले दर्ज हैं।
बहाना बीमारी, मकसद फरारी
बंदी की फरारी के बाद मेडिकल का लाइव
बदमाशों की मददगार पुलिस की लापरवाही
मेरठ। मेडिकल कॉलेज के मेल वार्ड-2 से विचाराधीन बंदी के फरार होने के बाद भी पुलिस नहीं चेती। बृहस्पतिवार दोपहर करीब सवा तीन बजे जब अमर उजाला टीम उसी वार्ड में पहुंची, तो पुलिस की लापरवाही सामने बिखरी मिली। एक और बंदी वहां बेड पर आराम से बैठा था। उसके हाथ में हथकड़ी भी नहीं थी और पुलिसकर्मी बाहर कुर्सी पर विराजमान थे। कैमरा चलते ही पुलिसकर्मी बेड की तरफ दौड़ पड़े और बीमार बंदी सुरेंद्र पाल के हाथ में हथकड़ी लगाने लगे। जानी थाने के ढढरा गांव निवासी सुरेंद्र को एक माह पहले मेडिकल में भर्ती कराया गया था। पूछने पर सिपाहियों ने कह दिया कि अभी बंदी को दवाई लेनी थी, जिस कारण हथकड़ी खोल दी थी। सिपाही यह भी कहने लगे कि ये फोटो मत छापना, हम तो बागपत से आए हैं। ताज्जुब इस बात का है कि मेडिकल कॉलेज से लगातार बंदी फरार हो रहे हैं, मगर पुलिस अपनी लापरवाही छोड़ने को तैयार नहीं है।