{"_id":"52-47290","slug":"Meerut-47290-52","type":"story","status":"publish","title_hn":"आरवीसी के जोश, जज्बे और साहस को सलाम ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आरवीसी के जोश, जज्बे और साहस को सलाम
Meerut
Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेरठ। सर्द मौसम और तेज बारिश भी रिमाउंट वेटनरी कोर (आरवीसी) सेंटर एंड कालेज के जांबाजों के हौसले को डिगा नहीं सकी। शुक्रवार सुबह आरवीसी के अफसर और जवानों ने तय समय पर गर्मजोशी से सेरिमोनियल परेड की सलामी देकर कोठावाल पोलो ग्राउंड पर मौजूद हर शख्स के बदन में गर्माहट पैदा कर दी।
शुक्रवार को कोठावाला पोलो ग्राउंड पर आरवीसी सेंटर एंड कालेज का 234वां कोर-डे और 11वां री-यूनियन गर्मजोशी से मनाया गया। तेज बारिश और सर्द हवाओं के रुख से लगा कि परेड तय समय पर नहीं हो सकेगी, तभी आरवीसी सेंटर एंड कालेज के कमांडेंट मेजर जनरल जगविंदर सिंह ने परेड कमांडर विशिष्ट सेवा मेडल कर्नल दीप अहलावत को निर्धारित समय पर परेड के आदेश दिए। बस फिर क्या था, दीप अहलावत की अगुवाई में 10 ऑफिसर, आठ जेसीओ, 168 ओआरएस, 59 घोड़े, 48 सैन्य श्वान, 68 राइफल जवान, 13 क्रिच और 50 लांस से सजी परेड साढ़े आठ बजे कोठावाला पोलो ग्राउंड पर पहुंच गई। ठीक साढ़े नौ बजे मुख्य अतिथि आरवीसी सेंटर एंड कॉलेज के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल मुनीश सिबल और डीजी आरवीसी ले. जनरल एसएस ठकराल को सेरिमोनियल परेड की सलामी दी गई। इस दौरान बड़ी संख्या में आरवीसी के पूर्व ऑफिसर और जवान मौजूद रहे।
मुनीश सिबल ने परेड को संबोधित करते हुए कहा कि आरवीसी का सुनहरा और गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। आने वाले दिनों में हमें आधुनिक रूप से और सशक्त होने की न सिर्फ जरूरत है, बल्कि आरवीसी के सामने ये सबसे बड़ी चुनौती है। कोर ने सैन्य ताकतों को बढ़ाने के साथ ही मानवता की भरपूर सहायता की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आरवीसी के घोड़ों की सर्वाधिक डिमांड है और आरवीसी सेना, पैरा मिलिट्री और सिविल पुलिस की जरूरत को पूरा कर रही है।
विज्ञापन
----
राष्ट्रपति ने दिया था प्रजेंटेशन ऑफ द कलर
आरवीसी सेंटर एंड कॉलेज के सेना को सशक्त करने की दिशा में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने पर मेरठ में कोठावाला पोलो ग्राउंड पर ही 21 दिसंबर 1989 को तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने प्रजेंटेशन ऑफ द कलर से सम्मानित किया था।
बड़ेखाना में शामिल हुए अफसर-जवान
कोर-डे पर आरवीसी की ओर से बड़ा खाना का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में सैन्य अफसर और जवान शामिल हुए।
डॉग-हॉर्स शो आयोजित
आरवीसी की ओर से पोलो ग्राउंड में डॉग और हॉर्स शो का आयोजन किया गया। इस दौरान ट्रेंड डॉग ने अपने हैरतअंगेज कारनामों से लोगों का खूब मनोरंजन किया। बच्चों ने डॉग शो और हॉर्स शो के कारनामों का जमकर लुत्फ उठाया।
आरवीसी करेगा टेली-मेडिसिन से इलाज : एसएस ठकराल
डायरेक्टर जनरल आरवीसी सेंटर एंड कॉलेज ले. जनरल एसएस ठकराल ने कहा आरवीसी अब सेना की विभिन्न यूनिट में टेली-मेडिसिन से इलाज संभव हो सकेगा। इस दिशा में शोध के कार्य पूरे हो चुके हैं।
234वें कोर-डे पर सेरिमोनियल परेड की सलामी लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि आरवीसी डायग्नोसिस के क्षेत्र में गंभीरता से कार्य कर रही है, ताकि जानवरों की बीमारियों का परीक्षण बेहतर तरीके से हो सके। उन्होंने बताया कि आरवीसी स्टड में पैदा होने वाले घोड़ों का रिकॉर्ड अब यूनिक आईडी की तहत रखा जा रहा है। देश के प्रत्येक जानवर का सेना के पास कंप्युटराइज्ड रिकॉर्ड मौजूद है। उन्होंने कहा कि आरवीसी को आधुनिक बनाना और यहां प्रशिक्षित श्वान की मांग देश में सबसे ज्यादा है, जिसे पूरा करना उनके लिए बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि खोजी कुत्तों को प्रशिक्षित करने की दिशा में माइक्रो चिप तैयार करने का काम पूरा हो चुका है। शीघ्र ही इसे खोजी कुत्तों में इनबिल्ट कर सेना को और मजबूती दी जाएगी।
विज्ञापन
शुक्रवार को कोठावाला पोलो ग्राउंड पर आरवीसी सेंटर एंड कालेज का 234वां कोर-डे और 11वां री-यूनियन गर्मजोशी से मनाया गया। तेज बारिश और सर्द हवाओं के रुख से लगा कि परेड तय समय पर नहीं हो सकेगी, तभी आरवीसी सेंटर एंड कालेज के कमांडेंट मेजर जनरल जगविंदर सिंह ने परेड कमांडर विशिष्ट सेवा मेडल कर्नल दीप अहलावत को निर्धारित समय पर परेड के आदेश दिए। बस फिर क्या था, दीप अहलावत की अगुवाई में 10 ऑफिसर, आठ जेसीओ, 168 ओआरएस, 59 घोड़े, 48 सैन्य श्वान, 68 राइफल जवान, 13 क्रिच और 50 लांस से सजी परेड साढ़े आठ बजे कोठावाला पोलो ग्राउंड पर पहुंच गई। ठीक साढ़े नौ बजे मुख्य अतिथि आरवीसी सेंटर एंड कॉलेज के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल मुनीश सिबल और डीजी आरवीसी ले. जनरल एसएस ठकराल को सेरिमोनियल परेड की सलामी दी गई। इस दौरान बड़ी संख्या में आरवीसी के पूर्व ऑफिसर और जवान मौजूद रहे।
विज्ञापन
मुनीश सिबल ने परेड को संबोधित करते हुए कहा कि आरवीसी का सुनहरा और गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। आने वाले दिनों में हमें आधुनिक रूप से और सशक्त होने की न सिर्फ जरूरत है, बल्कि आरवीसी के सामने ये सबसे बड़ी चुनौती है। कोर ने सैन्य ताकतों को बढ़ाने के साथ ही मानवता की भरपूर सहायता की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आरवीसी के घोड़ों की सर्वाधिक डिमांड है और आरवीसी सेना, पैरा मिलिट्री और सिविल पुलिस की जरूरत को पूरा कर रही है।
विज्ञापन
----
राष्ट्रपति ने दिया था प्रजेंटेशन ऑफ द कलर
आरवीसी सेंटर एंड कॉलेज के सेना को सशक्त करने की दिशा में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने पर मेरठ में कोठावाला पोलो ग्राउंड पर ही 21 दिसंबर 1989 को तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने प्रजेंटेशन ऑफ द कलर से सम्मानित किया था।
बड़ेखाना में शामिल हुए अफसर-जवान
कोर-डे पर आरवीसी की ओर से बड़ा खाना का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में सैन्य अफसर और जवान शामिल हुए।
डॉग-हॉर्स शो आयोजित
आरवीसी की ओर से पोलो ग्राउंड में डॉग और हॉर्स शो का आयोजन किया गया। इस दौरान ट्रेंड डॉग ने अपने हैरतअंगेज कारनामों से लोगों का खूब मनोरंजन किया। बच्चों ने डॉग शो और हॉर्स शो के कारनामों का जमकर लुत्फ उठाया।
आरवीसी करेगा टेली-मेडिसिन से इलाज : एसएस ठकराल
डायरेक्टर जनरल आरवीसी सेंटर एंड कॉलेज ले. जनरल एसएस ठकराल ने कहा आरवीसी अब सेना की विभिन्न यूनिट में टेली-मेडिसिन से इलाज संभव हो सकेगा। इस दिशा में शोध के कार्य पूरे हो चुके हैं।
234वें कोर-डे पर सेरिमोनियल परेड की सलामी लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि आरवीसी डायग्नोसिस के क्षेत्र में गंभीरता से कार्य कर रही है, ताकि जानवरों की बीमारियों का परीक्षण बेहतर तरीके से हो सके। उन्होंने बताया कि आरवीसी स्टड में पैदा होने वाले घोड़ों का रिकॉर्ड अब यूनिक आईडी की तहत रखा जा रहा है। देश के प्रत्येक जानवर का सेना के पास कंप्युटराइज्ड रिकॉर्ड मौजूद है। उन्होंने कहा कि आरवीसी को आधुनिक बनाना और यहां प्रशिक्षित श्वान की मांग देश में सबसे ज्यादा है, जिसे पूरा करना उनके लिए बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि खोजी कुत्तों को प्रशिक्षित करने की दिशा में माइक्रो चिप तैयार करने का काम पूरा हो चुका है। शीघ्र ही इसे खोजी कुत्तों में इनबिल्ट कर सेना को और मजबूती दी जाएगी।