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हिचकोले खा रही मोहिउद्दीनपुर मिल, किसान परेशान
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। 151 करोड़ रुपये की लागत से अपग्रेड हुई मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल एक पखवाड़े से हिचकोले खा रही है। कभी मिल की टरबाइन जवाब दे जाती है तो कभी केन यूनिट। क्षमता से कम गन्ना पेराई का असर किसानों पर पड़ रहा है। पर्याप्त पर्ची नहीं पहुंचने से किसानों को गन्ना आपूर्ति करने में परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि गेहूं की कटाई भी शुरू हो गई है। किसान गन्ना डाले या अपना गेहूं काटे।
उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड की मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल को पिछले साल 151 करोड़ रुपये से अपग्रेड किया था। इसमें मिल की क्षमता 25 हजार टीसीडी से बढ़ाकर 35 हजार टीसीडी की गई थी और 15 मेगावाट का को जनरेशन प्लांट लगाया गया था। इतना पैसा खर्च करने के बाद भी मिल का पैन हाउस पुराना ही छोड़ दिया था। इसके चलते कई बार रस और चीनी बहने से मिल को आर्थिक क्षति हो चुकी है। अब एक पखवाड़े से मिल फिर से दिक्कत में है। पिछले दिनों मिल की टरबाइन में तकनीकी कमी आने से मिल बंद हो गई थी। अधिकारियों का कहना है कि टरबाइन से 132 केवी नंगलापातू ट्रांसमिशन की लाइन जोड़ने के चलते कुछ गड़बड़ी हो गई थी। इसके चलते मिल प्रभावित हुई थी। लेकिन किसानों का कहना है कि मिल पूरी क्षमता से नहीं चल रही है और पर्याप्त पर्ची भी नहीं मिल पा रही है। इस बारे में मिल के महाप्रबंधक एसआर नारायण का कहना है कि ट्रांसमिशन लाइन में ब्रेकडाउन के चलते टरबाइन बंद हो गई थी। इससे ही मिल प्रभावित हुई थी। इसके बाद से सही चल रही है। अब तक 50 लाख कुंतल गन्ना पेरा जा चुका है। क्षेत्र में करीब ढाई लाख कुंतल गन्ना और बचा है। किसानों को पर्याप्त पर्ची के लिए समिति अधिकारियों से बात की जाएगी।
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मेरठ। 151 करोड़ रुपये की लागत से अपग्रेड हुई मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल एक पखवाड़े से हिचकोले खा रही है। कभी मिल की टरबाइन जवाब दे जाती है तो कभी केन यूनिट। क्षमता से कम गन्ना पेराई का असर किसानों पर पड़ रहा है। पर्याप्त पर्ची नहीं पहुंचने से किसानों को गन्ना आपूर्ति करने में परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि गेहूं की कटाई भी शुरू हो गई है। किसान गन्ना डाले या अपना गेहूं काटे।
उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड की मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल को पिछले साल 151 करोड़ रुपये से अपग्रेड किया था। इसमें मिल की क्षमता 25 हजार टीसीडी से बढ़ाकर 35 हजार टीसीडी की गई थी और 15 मेगावाट का को जनरेशन प्लांट लगाया गया था। इतना पैसा खर्च करने के बाद भी मिल का पैन हाउस पुराना ही छोड़ दिया था। इसके चलते कई बार रस और चीनी बहने से मिल को आर्थिक क्षति हो चुकी है। अब एक पखवाड़े से मिल फिर से दिक्कत में है। पिछले दिनों मिल की टरबाइन में तकनीकी कमी आने से मिल बंद हो गई थी। अधिकारियों का कहना है कि टरबाइन से 132 केवी नंगलापातू ट्रांसमिशन की लाइन जोड़ने के चलते कुछ गड़बड़ी हो गई थी। इसके चलते मिल प्रभावित हुई थी। लेकिन किसानों का कहना है कि मिल पूरी क्षमता से नहीं चल रही है और पर्याप्त पर्ची भी नहीं मिल पा रही है। इस बारे में मिल के महाप्रबंधक एसआर नारायण का कहना है कि ट्रांसमिशन लाइन में ब्रेकडाउन के चलते टरबाइन बंद हो गई थी। इससे ही मिल प्रभावित हुई थी। इसके बाद से सही चल रही है। अब तक 50 लाख कुंतल गन्ना पेरा जा चुका है। क्षेत्र में करीब ढाई लाख कुंतल गन्ना और बचा है। किसानों को पर्याप्त पर्ची के लिए समिति अधिकारियों से बात की जाएगी।
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