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ऐसे कैसे एम्स जैसे बन पाएगा मेडिकल कॉलेज
Updated Fri, 21 Sep 2018 02:28 AM IST
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ऐसे कैसे ‘एम्स’ जैसा बन पाएगा मेडिकल कॉलेज
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज को कई बार ‘एम्स’ जैसा बनाए जाने के दावे किए जा चुके हैं, लेकिन पहले से ही चल रही चिकित्सकों की कमी, दूसरी तरफ मेडिकल से चिकित्सकों का मोहभंग होने और अब 15 विशेषज्ञों के स्थानांतरण के बाद स्थिति और खराब हो गई है। बेहतर इलाज तो दूर अब चिकित्सक बनने के लिए पढ़ाई करने वालों के लिए भी संकट खड़ा होता नजर आ रहा है।
दरअसल, जिन चिकित्सकों का स्थानांतरण किया गया है। उनमें एनाटमी, बायोकेमिस्ट्री और फार्माकालॉजी के प्रोफेसर भी हैं, जिनकी एमबीबीएस की पढ़ाई में अहम भूमिका निभाते हैं। अब फार्माकालॉजी और एनाटमी में सिर्फ एक-एक प्रोफेसर बचे हैं तो बायोकेमिस्ट्री में अब कोई स्थायी प्रोफेसर नहीं है। इसके अलावा एसपीएम में भी डॉ. संजीव के जाने से वह भी खाली हो गया है, इसमें दो ही पद थे, एक पहले से खाली चल रहा था। मेडिसिन से तीन का स्थानांतरण हुआ है, जबकि मेडिसिन में हर माह 16 से 17 हजार मरीज आते हैं। स्किन स्पेशलिस्ट एक थे, उनका ही स्थानांतरण कर दिया गया है। ऑर्थोपेडिक्स और एनेस्थिसिया की भी यही स्थिति हो गई है। रेडियोगायनोसिस में डॉ. यासमीन के जाने से सिर्फ एक विशेषज्ञ रह गई हैं, जबकि यहां हर रोज 300 से ज्यादा मरीज आते हैं। विशेषज्ञों के अभाव में पहले ही यहां मरीजों को तारीख दी जाती थी। वैसे यहां डिजिटल एक्सरे की मशीन आ गई है, मगर विशेषज्ञ कम होते जा रहे हैं।
सूत्रों ने बताया कि मेडिकल में एमबीबीएस की सीटें 150 हैं, इन्हें 200 करने की तैयारी चल रही थी, मगर अब 150 बचे रहने पर भी संकट खड़ा हो जाएगा। फैकल्टी कम होने से हो सकता है इन्हें घटाकर 100 कर दिया जाए। पहले ही फैकल्टी 22 प्रतिशत कम थी और अब 32 प्रतिशत कम हो जाएगी। गौरतलब है कि एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज से बुधवार रात 15 चिकित्सकों का स्थानांतरण कर दिया गया था।
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पहले ही नहीं था दिल, गुर्दे का इलाज
मेडिकल में दिल और गुर्दे से संबंधित बीमारियों का इलाज पहले ही नहीं था, अब और भी कई तरह की बीमारियों के मरीजों के लिए दिक्कत होगी। क्योंकि यहां मरीजो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और चिकित्सकों की संख्या कम होती जा रही है।
मेडिकल में पिछले चार दिन में आए 15 हजार मरीज
मेडिकल कॉलेज में पिछले चार दिन में ही 15 हजार 70 मरीज आए हैं। सोमवार को 4229 मरीज आए थे, मंगलवार को 3445, बुधवार को 3696 और बृहस्पतिवार को 3700 मरीज। जबकि पिछले कुछ समय से यहां तीन हजार से 3200 मरीज आ रहे थे। अब संख्या बढ़ गई है।
सरकार का निर्णय है: प्राचार्य
प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि चिकित्सकों और फैकल्टी की कमी हो जाएगी, यह बात सही है, लेकिन यह सरकार का निर्णय है। चिकित्सकों की कमी की बात सरकार के भी संज्ञान में है और इस संबंध में अवगत भी करा दिया गया है।
विभागीय मंत्री से करूंगा बात: सांसद
सासंद राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि मेडिकल में पहले ही चिकित्सक कम थे, ऐसे में अगर यहां से चिकित्सकों का स्थानांतरण किया है तो यहां इनकी जगह पर और चिकित्सक भेजे जाने चाहिए। वह इस संबंध में विभागीय मंत्री से बात कर चिकित्सकों की शीघ्र तैनाती कराएंगे।
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मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज को कई बार ‘एम्स’ जैसा बनाए जाने के दावे किए जा चुके हैं, लेकिन पहले से ही चल रही चिकित्सकों की कमी, दूसरी तरफ मेडिकल से चिकित्सकों का मोहभंग होने और अब 15 विशेषज्ञों के स्थानांतरण के बाद स्थिति और खराब हो गई है। बेहतर इलाज तो दूर अब चिकित्सक बनने के लिए पढ़ाई करने वालों के लिए भी संकट खड़ा होता नजर आ रहा है।
दरअसल, जिन चिकित्सकों का स्थानांतरण किया गया है। उनमें एनाटमी, बायोकेमिस्ट्री और फार्माकालॉजी के प्रोफेसर भी हैं, जिनकी एमबीबीएस की पढ़ाई में अहम भूमिका निभाते हैं। अब फार्माकालॉजी और एनाटमी में सिर्फ एक-एक प्रोफेसर बचे हैं तो बायोकेमिस्ट्री में अब कोई स्थायी प्रोफेसर नहीं है। इसके अलावा एसपीएम में भी डॉ. संजीव के जाने से वह भी खाली हो गया है, इसमें दो ही पद थे, एक पहले से खाली चल रहा था। मेडिसिन से तीन का स्थानांतरण हुआ है, जबकि मेडिसिन में हर माह 16 से 17 हजार मरीज आते हैं। स्किन स्पेशलिस्ट एक थे, उनका ही स्थानांतरण कर दिया गया है। ऑर्थोपेडिक्स और एनेस्थिसिया की भी यही स्थिति हो गई है। रेडियोगायनोसिस में डॉ. यासमीन के जाने से सिर्फ एक विशेषज्ञ रह गई हैं, जबकि यहां हर रोज 300 से ज्यादा मरीज आते हैं। विशेषज्ञों के अभाव में पहले ही यहां मरीजों को तारीख दी जाती थी। वैसे यहां डिजिटल एक्सरे की मशीन आ गई है, मगर विशेषज्ञ कम होते जा रहे हैं।
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सूत्रों ने बताया कि मेडिकल में एमबीबीएस की सीटें 150 हैं, इन्हें 200 करने की तैयारी चल रही थी, मगर अब 150 बचे रहने पर भी संकट खड़ा हो जाएगा। फैकल्टी कम होने से हो सकता है इन्हें घटाकर 100 कर दिया जाए। पहले ही फैकल्टी 22 प्रतिशत कम थी और अब 32 प्रतिशत कम हो जाएगी। गौरतलब है कि एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज से बुधवार रात 15 चिकित्सकों का स्थानांतरण कर दिया गया था।
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पहले ही नहीं था दिल, गुर्दे का इलाज
मेडिकल में दिल और गुर्दे से संबंधित बीमारियों का इलाज पहले ही नहीं था, अब और भी कई तरह की बीमारियों के मरीजों के लिए दिक्कत होगी। क्योंकि यहां मरीजो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और चिकित्सकों की संख्या कम होती जा रही है।
मेडिकल में पिछले चार दिन में आए 15 हजार मरीज
मेडिकल कॉलेज में पिछले चार दिन में ही 15 हजार 70 मरीज आए हैं। सोमवार को 4229 मरीज आए थे, मंगलवार को 3445, बुधवार को 3696 और बृहस्पतिवार को 3700 मरीज। जबकि पिछले कुछ समय से यहां तीन हजार से 3200 मरीज आ रहे थे। अब संख्या बढ़ गई है।
सरकार का निर्णय है: प्राचार्य
प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि चिकित्सकों और फैकल्टी की कमी हो जाएगी, यह बात सही है, लेकिन यह सरकार का निर्णय है। चिकित्सकों की कमी की बात सरकार के भी संज्ञान में है और इस संबंध में अवगत भी करा दिया गया है।
विभागीय मंत्री से करूंगा बात: सांसद
सासंद राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि मेडिकल में पहले ही चिकित्सक कम थे, ऐसे में अगर यहां से चिकित्सकों का स्थानांतरण किया है तो यहां इनकी जगह पर और चिकित्सक भेजे जाने चाहिए। वह इस संबंध में विभागीय मंत्री से बात कर चिकित्सकों की शीघ्र तैनाती कराएंगे।