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937397 लोगों के नहीं बन सके गोल्डन कार्ड
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मेरठ।
आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना शुरू हुए करीब 15 माह बीच चुके हैं। इस दौरान योजना में फर्जीवाड़ा की शिकायतें भी सामने आई हैं। वहीं योजना में अभी तक 119683 लाभार्थी परिवारों में 937397 लोगों के गोल्डन कार्ड नहीं बन सके हैं। इलाज के दौरान गोल्डन कार्ड का होना जरूरी है।
इस योजना के तहत गोल्डन कार्ड के लिए भटक रहे लाभार्थियों को घर घर जाकर ‘पर्चा कार्ड’ देने की योजना थी, जो गोल्डन कार्ड की तरह ही स्वास्थ्य सेवा के लिए मान्य बताई गई थी। इसमें परिवार के मुखिया समेत पांच सदस्यों का विवरण दर्ज था। लेकिन यह योजना भी धड़ाम हो गई है। सभी परिवारों तक इन्हें नहीं पहुंचाया जा सका है। इसके अलावा इलाज के लिए यह अब मान्य भी नहीं है। यह योजना अमली जामा नहीं पहन सकी। आयुष्मान योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को हुई थी। इसमें फिलहाल 60 अस्पताल पंजीकृत हैं, जिनमें छह सरकारी और 54 निजी अस्पताल हैं।
यह है योजना
आयुष्मान में जिले में 211416 परिवार चिन्हित हैं। इनमें 89109 परिवार देहात और 122307 परिवार शहरी क्षेत्र के हैं। साल 2011 की आर्थिक गणना की सूची के आधार पर इसे तैयार किया गया है। योजना में 1352 तरह की जांच और सर्जरी समेत पांच लाख रुपये तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा दी गई है। इसमें 60 फीसदी खर्च केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार उठा रही है।
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दोबारा चलाया जाएगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग ने सितंबर माह में गोल्डन कार्ड अभियान चलाया था। अभी नौ लाख से ज्यादा लोग बचे हैं। अगर परिवार के एक सदस्य का गोल्डन कार्ड है तो बाकी सदस्य भी आसानी से कार्ड बनवा सकते हैं। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज समेत सूचीबद्ध सरकारी-निजी अस्पतालों और जनसुविधा केंद्र में ये बनाए जा रहे हैं। - डॉ. राजकुमार, सीएमओ
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आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना शुरू हुए करीब 15 माह बीच चुके हैं। इस दौरान योजना में फर्जीवाड़ा की शिकायतें भी सामने आई हैं। वहीं योजना में अभी तक 119683 लाभार्थी परिवारों में 937397 लोगों के गोल्डन कार्ड नहीं बन सके हैं। इलाज के दौरान गोल्डन कार्ड का होना जरूरी है।
इस योजना के तहत गोल्डन कार्ड के लिए भटक रहे लाभार्थियों को घर घर जाकर ‘पर्चा कार्ड’ देने की योजना थी, जो गोल्डन कार्ड की तरह ही स्वास्थ्य सेवा के लिए मान्य बताई गई थी। इसमें परिवार के मुखिया समेत पांच सदस्यों का विवरण दर्ज था। लेकिन यह योजना भी धड़ाम हो गई है। सभी परिवारों तक इन्हें नहीं पहुंचाया जा सका है। इसके अलावा इलाज के लिए यह अब मान्य भी नहीं है। यह योजना अमली जामा नहीं पहन सकी। आयुष्मान योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को हुई थी। इसमें फिलहाल 60 अस्पताल पंजीकृत हैं, जिनमें छह सरकारी और 54 निजी अस्पताल हैं।
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यह है योजना
आयुष्मान में जिले में 211416 परिवार चिन्हित हैं। इनमें 89109 परिवार देहात और 122307 परिवार शहरी क्षेत्र के हैं। साल 2011 की आर्थिक गणना की सूची के आधार पर इसे तैयार किया गया है। योजना में 1352 तरह की जांच और सर्जरी समेत पांच लाख रुपये तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा दी गई है। इसमें 60 फीसदी खर्च केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार उठा रही है।
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दोबारा चलाया जाएगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग ने सितंबर माह में गोल्डन कार्ड अभियान चलाया था। अभी नौ लाख से ज्यादा लोग बचे हैं। अगर परिवार के एक सदस्य का गोल्डन कार्ड है तो बाकी सदस्य भी आसानी से कार्ड बनवा सकते हैं। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज समेत सूचीबद्ध सरकारी-निजी अस्पतालों और जनसुविधा केंद्र में ये बनाए जा रहे हैं। - डॉ. राजकुमार, सीएमओ