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70 लाख की रिकवरी पर कुंडली मारकर बैठे रहे अमीन
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Tue, 19 Jul 2016 02:13 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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सदर तहसील के एक दर्जन अमीनों की कारगुजारी से प्रशासनिक अधिकारी भी हैरत में हैं। अमीनों ने विभिन्न विभागों की ओर से जारी आरसी की रकम वसूली के बाद अपने पास दबाए रखी। प्रशासनिक स्तर पर दवाब पड़ा तो आननफानन में कोर्ट में रिपोर्ट जमा कर दी गई, लेकिन विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में ऐसे करीब तीस से अधिक मामले पकड़े गए हैं। चार मामलों में लंबे समय तक तहसीलदार ही रिपोर्ट को दबाए रहे। इस पर कोर्ट ने सख्त रवैया अख्तियार किया है। कोर्ट की सख्ताई के बाद एडीएम वित्त एवं राजस्व ने एसडीएम सदर को जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। ये मामले करीब 70 लाख रुपये की वसूली से जुड़े हुए हैं।
विभिन्न सरकारी विभाग अपने बकाएदारों से रकम वसूली और एक्सीडेंटल क्लेम आदि का भुगतान लेने के लिए तहसील के माध्यम से आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी करते हैं। तहसील प्रशासन अमीनों के माध्यम से वसूली कराता है। वसूली की रकम में तहसील के वसूली शुल्क को भी शामिल किया जाता है। अमीन वसूली गई रकम राजस्व विभाग में जमा करते हैं। वहीं से संबंधित व्यक्ति या विभाग को बैंक ड्राफ्ट या चेक के माध्यम से रकम का भुगतान कर दिया जाता है। वसूली की आरसी भी तुरंत जमा करते हुए केस निस्तारित कर दिया जाता है।
ऐसे पकड़ में आया ‘अमीनों का खेल’
कुछ दिन पूर्व एडीएम (वित्त एवं राजस्व) गौरव वर्मा ने बकाया वसूली और आरसी निस्तारण की समीक्षा बैठक की थी। इस दौरान लंबित मामलों की संख्या बढ़ने पर उन्होंने कई अमीनों को नोटिस जारी किए। 20 दिन पूर्व सदर तहसील के अमीनों ने एक साथ चार दर्जन से ज्यादा आरसी जमा करते हुए केस निस्तारित होने की सूचना दी। इस पर सभी आरसी को उन कोर्ट में भेज दिया गया, जहां इनका वाद चल रहा था। कोर्ट ने जांच की तो हकीकत का पता चला। जमा वसूली की तारीख, संग्रह अमीन की रिपोर्ट और तहसीलदार द्वारा भेजी गई रिपोर्ट की तारीख में बड़ा अंतर था। चार मामले में तो तहसीलदार ही दस माह तक रिपोर्ट दबाए रहे। इससे रकम जमा करने के बाद भी बकाएदारों का कोर्ट में वाद चलता रहा। मामले में कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सभी मामलों में कोर्ट ने मौखिक रूप से एडीएम (वित्त एवं राजस्व) को कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
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ये है खेल की आशंका
तहसील से लेकर कलक्ट्रेट तक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार संग्रह अमीन बकाया धन वसूली के बाद बकाएदार को रसीद तो देते हैं, लेकिन रिपोर्ट को दबाए रखते हैं। ऐसे में रकम का प्रयोग निजी कार्यों में किया जाता है। जब वसूली का लक्ष्य पूरा करने का दबाव बनता है तो बकाया वसूली की रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी जात हैं। कोर्ट की ओर से पकडे़ गए इन मामलों में करीब 70 लाख रुपये की वसूली अमीनों ने की थी।
कोर्ट के चक्कर काटते रहे बकाएदार
संग्रह अमीनों के इस ‘खेल’ का खामियाजा बकाएदारों को भुगतना पड़ा। कोर्ट में समय से रिपोर्ट दाखिल नहीं होने के कारण वाद का निस्तारण नहीं हो पाया। लिहाजा बकाएदार कोर्ट के चक्कर काटते रहे। अमीनों की इस लापरवाही के कारण ही न्यायिक प्रक्रिया लंबी खिंच रही है।
इन मामलों में बैठी जांच
नाम बकाएदार जमा की गई वसूली की तारीख संग्रह अमीन की रिपोर्ट
मुस्सद्दी लाल 20.06.2015 20.04.2016
सीपी सिंह 25.07.2015 20.04.2016
लक्ष्मीनारायण 17.06.2015 20.04.2016
रमेश चंद 15.04.2015 11.04.2016
मुस्सद्दी लाल 13.08.2014 20.04.2016
गोविंद राम 20.06.2015 13.07.2015
पदम सिंह 09.06.2015 11.06.2015
दिनेश कुमार 27.06.2015 13.07.2015
ब्रजमोहन 15.04.2015 रिपोर्ट की तारीख नहीं
अशोक कुमार 26.03.2014 13.07.2015
मनोज कुमार 29.06.2015 20.04.2016
अनिल चौधरी 31.08.2015 20.04.2016
नोट : इन सभी मामलों में तहसीलदार ने 31 मई 2016 को अपनी रिपोर्ट दाखिल की।
विभिन्न सरकारी विभाग अपने बकाएदारों से रकम वसूली और एक्सीडेंटल क्लेम आदि का भुगतान लेने के लिए तहसील के माध्यम से आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी करते हैं। तहसील प्रशासन अमीनों के माध्यम से वसूली कराता है। वसूली की रकम में तहसील के वसूली शुल्क को भी शामिल किया जाता है। अमीन वसूली गई रकम राजस्व विभाग में जमा करते हैं। वहीं से संबंधित व्यक्ति या विभाग को बैंक ड्राफ्ट या चेक के माध्यम से रकम का भुगतान कर दिया जाता है। वसूली की आरसी भी तुरंत जमा करते हुए केस निस्तारित कर दिया जाता है।
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ऐसे पकड़ में आया ‘अमीनों का खेल’
कुछ दिन पूर्व एडीएम (वित्त एवं राजस्व) गौरव वर्मा ने बकाया वसूली और आरसी निस्तारण की समीक्षा बैठक की थी। इस दौरान लंबित मामलों की संख्या बढ़ने पर उन्होंने कई अमीनों को नोटिस जारी किए। 20 दिन पूर्व सदर तहसील के अमीनों ने एक साथ चार दर्जन से ज्यादा आरसी जमा करते हुए केस निस्तारित होने की सूचना दी। इस पर सभी आरसी को उन कोर्ट में भेज दिया गया, जहां इनका वाद चल रहा था। कोर्ट ने जांच की तो हकीकत का पता चला। जमा वसूली की तारीख, संग्रह अमीन की रिपोर्ट और तहसीलदार द्वारा भेजी गई रिपोर्ट की तारीख में बड़ा अंतर था। चार मामले में तो तहसीलदार ही दस माह तक रिपोर्ट दबाए रहे। इससे रकम जमा करने के बाद भी बकाएदारों का कोर्ट में वाद चलता रहा। मामले में कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सभी मामलों में कोर्ट ने मौखिक रूप से एडीएम (वित्त एवं राजस्व) को कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
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ये है खेल की आशंका
तहसील से लेकर कलक्ट्रेट तक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार संग्रह अमीन बकाया धन वसूली के बाद बकाएदार को रसीद तो देते हैं, लेकिन रिपोर्ट को दबाए रखते हैं। ऐसे में रकम का प्रयोग निजी कार्यों में किया जाता है। जब वसूली का लक्ष्य पूरा करने का दबाव बनता है तो बकाया वसूली की रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी जात हैं। कोर्ट की ओर से पकडे़ गए इन मामलों में करीब 70 लाख रुपये की वसूली अमीनों ने की थी।
कोर्ट के चक्कर काटते रहे बकाएदार
संग्रह अमीनों के इस ‘खेल’ का खामियाजा बकाएदारों को भुगतना पड़ा। कोर्ट में समय से रिपोर्ट दाखिल नहीं होने के कारण वाद का निस्तारण नहीं हो पाया। लिहाजा बकाएदार कोर्ट के चक्कर काटते रहे। अमीनों की इस लापरवाही के कारण ही न्यायिक प्रक्रिया लंबी खिंच रही है।
इन मामलों में बैठी जांच
नाम बकाएदार जमा की गई वसूली की तारीख संग्रह अमीन की रिपोर्ट
मुस्सद्दी लाल 20.06.2015 20.04.2016
सीपी सिंह 25.07.2015 20.04.2016
लक्ष्मीनारायण 17.06.2015 20.04.2016
रमेश चंद 15.04.2015 11.04.2016
मुस्सद्दी लाल 13.08.2014 20.04.2016
गोविंद राम 20.06.2015 13.07.2015
पदम सिंह 09.06.2015 11.06.2015
दिनेश कुमार 27.06.2015 13.07.2015
ब्रजमोहन 15.04.2015 रिपोर्ट की तारीख नहीं
अशोक कुमार 26.03.2014 13.07.2015
मनोज कुमार 29.06.2015 20.04.2016
अनिल चौधरी 31.08.2015 20.04.2016
नोट : इन सभी मामलों में तहसीलदार ने 31 मई 2016 को अपनी रिपोर्ट दाखिल की।