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मेरठ में दस दिन में 511 लोगों की मौत, बढ़ी दहशत
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मेरठ में दस दिन में 511 लोगों की मौत, बढ़ी दहशत
मेरठ। शहर में कोरोना के कारण मृत्यु का ग्राफ बहुत तेजी से बढ़ रहा है। अस्पताल में बेड न होने के कारण लोग घरों में मर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज जहां प्रतिदिन 10 से 15 लोगों की मृत्यु का आंकड़ा प्रस्तुत कर रहा है। वहीं सूरजकुंड गंगा मोटर कमेटी के रिकॉर्ड के अनुसार शहर में 10 दिन में 511 लोगों की मौत हुई है। मरने वालों में अधिकांश कोरोना के मरीज थे। अप्रैल 2020 के आंकड़ों पर गौर करें तो लॉकडाउन के दौरान सामान्य मृत्यु दर भी घटकर 8 से 10 रह गई थी। इस बार प्रतिदिन 50 से अधिक लोगों की मृत्यु हो रही है।
सामाजिक, व्यापारिक, राजनैतिक संगठन लगातार चिकित्सक सेवाएं के अभाव का आरोप लगा रहे हैं। चिकित्सकों ने मरीजों से मुंह मोड़ लिया है। सर्वाधिक मौत प्राथमिक चिकित्सा के अभाव में हो रही हैं। इस बात की पुष्टि मृतकों के परिजनों के द्वारा सूरजकुंड श्मशान घाट में की गई है। 15 अप्रैल के बाद प्रतिदिन की मृत्यु दर 50 के पार हो गई है। शहर में 12 श्मशान घाट हैं, जहां प्रतिदिन शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। सिर्फ सूरजकुंड श्मशान घाट में ही मृत्यु का रिकार्ड रखा जाता है। अप्रैल अंत तक आते आते मृत्यु का ग्राफ 75 के आंकड़े को छूने लगा है। रोडवेज गंगा मोटर कार्यालय में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्मों के लोगों के लिए अंतिम संस्कार का सामान दिया जाता है। सूरजकुंड श्मशान में जहां प्रतिदिन 50 लोगों का अंतिम संस्कार का रिकोर्ड दर्ज है। इसके विपरीत सामान ले जाने वालों की संख्या अप्रैल मध्य के बाद प्रतिदिन 100 तक पहुंच गई है। कब्रिस्तान और श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए जगह कम पड़ने लगी है।
ये रहा मृत्यु का आंकड़ा
30 अप्रैल - 57
29 अप्रैल- 66
28 अप्रैल - 55
27 अप्रैल - 75
26 अप्रैल - 40
25 अप्रैल - 40
24 अप्रैल - 31
23 अप्रैल - 50
22 अप्रैल - 50
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मेरठ। शहर में कोरोना के कारण मृत्यु का ग्राफ बहुत तेजी से बढ़ रहा है। अस्पताल में बेड न होने के कारण लोग घरों में मर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज जहां प्रतिदिन 10 से 15 लोगों की मृत्यु का आंकड़ा प्रस्तुत कर रहा है। वहीं सूरजकुंड गंगा मोटर कमेटी के रिकॉर्ड के अनुसार शहर में 10 दिन में 511 लोगों की मौत हुई है। मरने वालों में अधिकांश कोरोना के मरीज थे। अप्रैल 2020 के आंकड़ों पर गौर करें तो लॉकडाउन के दौरान सामान्य मृत्यु दर भी घटकर 8 से 10 रह गई थी। इस बार प्रतिदिन 50 से अधिक लोगों की मृत्यु हो रही है।
सामाजिक, व्यापारिक, राजनैतिक संगठन लगातार चिकित्सक सेवाएं के अभाव का आरोप लगा रहे हैं। चिकित्सकों ने मरीजों से मुंह मोड़ लिया है। सर्वाधिक मौत प्राथमिक चिकित्सा के अभाव में हो रही हैं। इस बात की पुष्टि मृतकों के परिजनों के द्वारा सूरजकुंड श्मशान घाट में की गई है। 15 अप्रैल के बाद प्रतिदिन की मृत्यु दर 50 के पार हो गई है। शहर में 12 श्मशान घाट हैं, जहां प्रतिदिन शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। सिर्फ सूरजकुंड श्मशान घाट में ही मृत्यु का रिकार्ड रखा जाता है। अप्रैल अंत तक आते आते मृत्यु का ग्राफ 75 के आंकड़े को छूने लगा है। रोडवेज गंगा मोटर कार्यालय में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्मों के लोगों के लिए अंतिम संस्कार का सामान दिया जाता है। सूरजकुंड श्मशान में जहां प्रतिदिन 50 लोगों का अंतिम संस्कार का रिकोर्ड दर्ज है। इसके विपरीत सामान ले जाने वालों की संख्या अप्रैल मध्य के बाद प्रतिदिन 100 तक पहुंच गई है। कब्रिस्तान और श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए जगह कम पड़ने लगी है।
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ये रहा मृत्यु का आंकड़ा
30 अप्रैल - 57
29 अप्रैल- 66
28 अप्रैल - 55
27 अप्रैल - 75
26 अप्रैल - 40
25 अप्रैल - 40
24 अप्रैल - 31
23 अप्रैल - 50
22 अप्रैल - 50