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भाजपाई सांसत में
Updated Wed, 21 Jun 2017 02:51 AM IST
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- प्रदेश में सरकार बनने के बाद भी लगातार जारी हो रहे हैं कार्यक्रम और अभियान
- विधानसभा चुनाव के बाद आराम की सोच को लगा झटका
- पदाधिकारी और कार्यकर्ता न कर पा रहे व्यक्तिगत काम और न ही दे पा रहे रोजगार पर ध्यान
मेरठ।
भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता इन दिनों अजीब हालात से गुजर रहे हैं। स्थिति ये है विरोध करना तो दूर खुलकर बोल भी नहीं पा रहे हैं। लेकिन स्थिति ये है कि लगातार पार्टी के कार्यक्रमों और अभियानों ने उनका अपना जीवन अस्त व्यस्त कर दिया है।
भाजपा ने 2014 में संगठन स्तर पर लोकसभा चुनाव को लेकर मेहनत की थी। बूथ स्तर तक कार्यकर्ता खड़े करने के साथ ही तमाम कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के बीच पकड़ बनायी और केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली। इसके बाद कार्यकर्ताओं को उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए 2017 का लक्ष्य मिल गया।
अब केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनने के बाद कार्यकर्ता आराम की सोच रहे थे। लेकिन चुनाव के तुरंत बाद ही उनकी इस सोच को झटका लग गया। पार्टी हाईकमान ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी वर्ष के तहत इतने कार्यक्रम तय कर दिये कि कार्यकर्ताओं के होश उड़ गये। यही नहीं इसके अलावा 2019 की तैयारी का लक्ष्य भी साथ साथ मिल गया। जिसके तहत बूथ समितियों का सत्यापन, जो इस समय चल रहा है। इसके तुरंत बाद ही केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों को ढूंढकर उनका मंडलवार सम्मेलन , सबका साथ सबका विकास पर कार्यक्रम, युवाओं के लिए स्कूल कालेज स्तर पर कार्यक्रम, किसानों के बीच जाकर कार्यक्रम, महिला मोर्चा चिकित्सा मंडल स्तर पर चिकित्सा शिविर लगायेगी, महिला सम्मेलन आयोजित करेगा, इसके साथ ही रक्तदान, योग दिवस पर भी मंडलवार कार्यक्रम होंगे। इनके अलावा अनुसूचित और पिछड़ा वर्ग सम्मेलन आयोजित कराने का भी निर्देश दिया गया है।
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रात दिन काम, सम्मान का नहीं ध्यान
इन सबके बीच केंद्र और प्रदेश में सरकार बनने के बावजूद कार्यकर्ता खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। हालत ये है कि उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में कार्यकर्ताओं के बीच कहीं न कहीं खीझ बढ़ती नजर आ रही है। छोटे कार्यकर्ता बड़े नेताओं को कई बार इस बारे में बोल भी चुके हैं। महानगर और जिले के ही कई पदाधिकारी नाम न छापने के अनुरोध पर अपना दर्द बयां कर चुके हैं। उनका कहना है कि लगातार पार्टी के लिए काम करते करते उनकी पारिवारिक और व्यवसायिक दोनों जिंदगी प्रभावित हो रही हैं।
वर्जन...........
पार्टी ने अपना लक्ष्य तय किया है, जो हर हाल में पाना है। सभी कार्यकर्ता स्वेच्छा से काम कर रहे हैं, कोई दबाव नहीं है। जब हमारे प्रधानमंत्री 20 घंटे काम कर सकते हैं तो हम यदि 18 घंटे भी काम कर लें तो क्या हर्ज है।
शिवकुमार राणा, जिलाध्यक्ष
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- विधानसभा चुनाव के बाद आराम की सोच को लगा झटका
- पदाधिकारी और कार्यकर्ता न कर पा रहे व्यक्तिगत काम और न ही दे पा रहे रोजगार पर ध्यान
मेरठ।
भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता इन दिनों अजीब हालात से गुजर रहे हैं। स्थिति ये है विरोध करना तो दूर खुलकर बोल भी नहीं पा रहे हैं। लेकिन स्थिति ये है कि लगातार पार्टी के कार्यक्रमों और अभियानों ने उनका अपना जीवन अस्त व्यस्त कर दिया है।
भाजपा ने 2014 में संगठन स्तर पर लोकसभा चुनाव को लेकर मेहनत की थी। बूथ स्तर तक कार्यकर्ता खड़े करने के साथ ही तमाम कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के बीच पकड़ बनायी और केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली। इसके बाद कार्यकर्ताओं को उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए 2017 का लक्ष्य मिल गया।
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अब केंद्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनने के बाद कार्यकर्ता आराम की सोच रहे थे। लेकिन चुनाव के तुरंत बाद ही उनकी इस सोच को झटका लग गया। पार्टी हाईकमान ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी वर्ष के तहत इतने कार्यक्रम तय कर दिये कि कार्यकर्ताओं के होश उड़ गये। यही नहीं इसके अलावा 2019 की तैयारी का लक्ष्य भी साथ साथ मिल गया। जिसके तहत बूथ समितियों का सत्यापन, जो इस समय चल रहा है। इसके तुरंत बाद ही केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों को ढूंढकर उनका मंडलवार सम्मेलन , सबका साथ सबका विकास पर कार्यक्रम, युवाओं के लिए स्कूल कालेज स्तर पर कार्यक्रम, किसानों के बीच जाकर कार्यक्रम, महिला मोर्चा चिकित्सा मंडल स्तर पर चिकित्सा शिविर लगायेगी, महिला सम्मेलन आयोजित करेगा, इसके साथ ही रक्तदान, योग दिवस पर भी मंडलवार कार्यक्रम होंगे। इनके अलावा अनुसूचित और पिछड़ा वर्ग सम्मेलन आयोजित कराने का भी निर्देश दिया गया है।
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रात दिन काम, सम्मान का नहीं ध्यान
इन सबके बीच केंद्र और प्रदेश में सरकार बनने के बावजूद कार्यकर्ता खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। हालत ये है कि उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में कार्यकर्ताओं के बीच कहीं न कहीं खीझ बढ़ती नजर आ रही है। छोटे कार्यकर्ता बड़े नेताओं को कई बार इस बारे में बोल भी चुके हैं। महानगर और जिले के ही कई पदाधिकारी नाम न छापने के अनुरोध पर अपना दर्द बयां कर चुके हैं। उनका कहना है कि लगातार पार्टी के लिए काम करते करते उनकी पारिवारिक और व्यवसायिक दोनों जिंदगी प्रभावित हो रही हैं।
वर्जन...........
पार्टी ने अपना लक्ष्य तय किया है, जो हर हाल में पाना है। सभी कार्यकर्ता स्वेच्छा से काम कर रहे हैं, कोई दबाव नहीं है। जब हमारे प्रधानमंत्री 20 घंटे काम कर सकते हैं तो हम यदि 18 घंटे भी काम कर लें तो क्या हर्ज है।
शिवकुमार राणा, जिलाध्यक्ष