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200 करोड़ बना मुआवजा
Updated Mon, 03 Jul 2017 02:51 AM IST
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200 करोड़ बना मुआवजा, 175 करोड़ की जमीन पर अवैध कब्जे
अमित मुदगल
मेरठ। तीन योजनाओं में प्रतिकर की मांग पूरी करने केलिए एमडीए ने जो सर्वे किया है उसमे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इन योजनाओं में एमडीए पर किसानों की लगभग दो सौ करोड़ रुपये की देनदारी निकल रही है पर साथ ही 175 करोड़ रुपये की जमीन पर किसानों के कब्जे सामने आए हैं। ऐसे में एमडीए इन योजनाआें में यदि इस जमीन का सेटलमेंट भी करता है तो एमडीए पर कोई खास लोड यहां पड़ने वाला नहीं है।
यह है प्रकरण
यह चल रहा है विवाद
शताब्दीनगर योजना की तर्ज पर अतिरिक्त प्रतिकर की मांग को लेकर लोहियानगर, गंगानगर तथा वेदव्यासपुरी योजना किसानों ने जबदरस्त आंदोलन किया। किसानों का कहना था कि जब शताब्दीनगर को अतिरिक्त मुआवजा दिया गया तो उन्हें क्यों नहीं, जबकि तीनों योजनाएं एक ही साथ की हैं। इसका परिणाम यह रहा कि एमडीए इस पर सहमत हो गया। 11 नवंबर 2015 को एमडीए बोर्ड बैठक में परिचालन प्रस्ताव के माध्यम से यह प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया। शर्त यह रही कि एमडीए के पास इतना पैसा नहीं है। ऐसे में यह तय हुआ कि जिस किसान का जितना प्रतिकर निकलेगा उसे उसके बदले भूखंड दिया जाएगा। इस पर किसान भी सहमत हो गए। हालांकि इस निर्णय को डेढ साल का समय होने केकारण किसानों के सब्र का बांध पिछले माह टूट गया था और उन्होंने एमडीए पर तगड़ा प्रदर्शन कर दिया था। धरना शुरू होने पर फिर सहमति बनी की सेटलमेंट का काम जल्द ही होगा और इस प्रक्रिया पर काम शुरू हो गया है।
सर्वे में मिला एक लाख 34 हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा
एमडीए ने इन तीन योजनाओं में अपनी जमीन तथा उन पर कब्जों का सर्वे किया। ऐसे में पाया कि इन तीन योजनाओं में एमडीए की अधिग्रहीत एक लाख 34 हजार वर्ग मीटर जमीन पर किसानों के कब्जे हैं। वेदव्यासपुरी योजना में लगभग पचास हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा है तो लोहियानगर में 46 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन किसानों ने कब्जा रखी है। गंगानगर में भी लगभग चालीस हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा है।
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लगभग 175 करोड़ की है यह जमीन
इन योजनाओं में यूं तो रेट ज्यादा है पर यदि यहां का औसत बाजार रेट 12 हजार वर्ग मीटर भी लगाया जाए तो यह रकम लगभग 175 करोड़ से ज्यादा बैठती है। उधर, एमडीए ने यहां जो हिसाब तैयार किया है उसके मुताबिक यहां केकिसानाें का प्रतिकर 200 करोड़ रुपये बन रहा है। ऐसे में यदि इस जमीन को एमडीए कब्जा मुक्त करता है तो भी एमडीए को यहां 25 करोड़ रुपये की जमीन का ब्यौरा तैयार करना होगा।
किसान खुद भी रख सकते हैं यह जमीन
एमडीए ने किसानों के सामने यह विकल्प खुला रखा है। यदि किसान इस कब्जा मुक्त जमीन को नहीं छोड़ना चाहते तो वह वर्तमान दर के हिसाब से इसे अपने पास ही रख सकते हैं। उनका मुआवजा इसी में सेटलमेंट हो जाएगा। शर्त यह है कि किसी किसान ने इतनी जमीन कब्जा रखी है कि उसका मुआवजा सेटलमेंट होने के बाद भी उसके पास ज्यादा जमीन है उतनी जमीन उसे छोड़नी होगी।
इस तरह हैं कब्जे
योजना- लोहियानगर
गांव जमीन पर कब्जा ( वर्ग मीटर)
काजीपुर 40281 वर्ग मीटर
जाहिदपुर 6176
योजना वेदव्यासपुरी
पूठा- 40000
डूंगरावली- 9000
मलियाना- 488
योजना- गंगानगर
कसेरूबक्सर- 32000
अब्दुल्लापुर- 6800
वीसी का वर्जन
तीनों योजनाओं के इस प्रकरण पर गंभीरता से अध्ययन चल रहा है। मैं खुद एक बार इस प्रकरण पर और गंभीरता से स्टडी करूंगा। बोर्ड बैठक में हुए फैसले के आधार पर जमीन का सेटलमेंट व अन्य निर्णय लिए जाएंगे। इसकी तैयारी हो रही है- राजकुमार सचिव एवं कार्यवाहक वीसी, मेरठ विकास प्राधिकरण
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अमित मुदगल
मेरठ। तीन योजनाओं में प्रतिकर की मांग पूरी करने केलिए एमडीए ने जो सर्वे किया है उसमे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इन योजनाओं में एमडीए पर किसानों की लगभग दो सौ करोड़ रुपये की देनदारी निकल रही है पर साथ ही 175 करोड़ रुपये की जमीन पर किसानों के कब्जे सामने आए हैं। ऐसे में एमडीए इन योजनाआें में यदि इस जमीन का सेटलमेंट भी करता है तो एमडीए पर कोई खास लोड यहां पड़ने वाला नहीं है।
यह है प्रकरण
यह चल रहा है विवाद
शताब्दीनगर योजना की तर्ज पर अतिरिक्त प्रतिकर की मांग को लेकर लोहियानगर, गंगानगर तथा वेदव्यासपुरी योजना किसानों ने जबदरस्त आंदोलन किया। किसानों का कहना था कि जब शताब्दीनगर को अतिरिक्त मुआवजा दिया गया तो उन्हें क्यों नहीं, जबकि तीनों योजनाएं एक ही साथ की हैं। इसका परिणाम यह रहा कि एमडीए इस पर सहमत हो गया। 11 नवंबर 2015 को एमडीए बोर्ड बैठक में परिचालन प्रस्ताव के माध्यम से यह प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया। शर्त यह रही कि एमडीए के पास इतना पैसा नहीं है। ऐसे में यह तय हुआ कि जिस किसान का जितना प्रतिकर निकलेगा उसे उसके बदले भूखंड दिया जाएगा। इस पर किसान भी सहमत हो गए। हालांकि इस निर्णय को डेढ साल का समय होने केकारण किसानों के सब्र का बांध पिछले माह टूट गया था और उन्होंने एमडीए पर तगड़ा प्रदर्शन कर दिया था। धरना शुरू होने पर फिर सहमति बनी की सेटलमेंट का काम जल्द ही होगा और इस प्रक्रिया पर काम शुरू हो गया है।
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सर्वे में मिला एक लाख 34 हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा
एमडीए ने इन तीन योजनाओं में अपनी जमीन तथा उन पर कब्जों का सर्वे किया। ऐसे में पाया कि इन तीन योजनाओं में एमडीए की अधिग्रहीत एक लाख 34 हजार वर्ग मीटर जमीन पर किसानों के कब्जे हैं। वेदव्यासपुरी योजना में लगभग पचास हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा है तो लोहियानगर में 46 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन किसानों ने कब्जा रखी है। गंगानगर में भी लगभग चालीस हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा है।
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लगभग 175 करोड़ की है यह जमीन
इन योजनाओं में यूं तो रेट ज्यादा है पर यदि यहां का औसत बाजार रेट 12 हजार वर्ग मीटर भी लगाया जाए तो यह रकम लगभग 175 करोड़ से ज्यादा बैठती है। उधर, एमडीए ने यहां जो हिसाब तैयार किया है उसके मुताबिक यहां केकिसानाें का प्रतिकर 200 करोड़ रुपये बन रहा है। ऐसे में यदि इस जमीन को एमडीए कब्जा मुक्त करता है तो भी एमडीए को यहां 25 करोड़ रुपये की जमीन का ब्यौरा तैयार करना होगा।
किसान खुद भी रख सकते हैं यह जमीन
एमडीए ने किसानों के सामने यह विकल्प खुला रखा है। यदि किसान इस कब्जा मुक्त जमीन को नहीं छोड़ना चाहते तो वह वर्तमान दर के हिसाब से इसे अपने पास ही रख सकते हैं। उनका मुआवजा इसी में सेटलमेंट हो जाएगा। शर्त यह है कि किसी किसान ने इतनी जमीन कब्जा रखी है कि उसका मुआवजा सेटलमेंट होने के बाद भी उसके पास ज्यादा जमीन है उतनी जमीन उसे छोड़नी होगी।
इस तरह हैं कब्जे
योजना- लोहियानगर
गांव जमीन पर कब्जा ( वर्ग मीटर)
काजीपुर 40281 वर्ग मीटर
जाहिदपुर 6176
योजना वेदव्यासपुरी
पूठा- 40000
डूंगरावली- 9000
मलियाना- 488
योजना- गंगानगर
कसेरूबक्सर- 32000
अब्दुल्लापुर- 6800
वीसी का वर्जन
तीनों योजनाओं के इस प्रकरण पर गंभीरता से अध्ययन चल रहा है। मैं खुद एक बार इस प्रकरण पर और गंभीरता से स्टडी करूंगा। बोर्ड बैठक में हुए फैसले के आधार पर जमीन का सेटलमेंट व अन्य निर्णय लिए जाएंगे। इसकी तैयारी हो रही है- राजकुमार सचिव एवं कार्यवाहक वीसी, मेरठ विकास प्राधिकरण