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ज्योतिष की आड़ में वन्य जीवों की ई-ट्रेडिंग का पर्दाफाश
Updated Thu, 22 Jun 2017 09:07 PM IST
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मेरठ। वन विभाग ने ज्योतिष की आड़ में देश-विदेश में अवैध रूप से चल रहे वन्य जीवों के अंगों के व्यापार का पर्दाफाश किया है। टीम ने वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (डब्लूसीसीबी) के इनपुट पर नोएडा में छापा मारकर एक ज्योतिषी को गिरफ्तार किया है। मामले की जड़ें काफी गहरी हैं, जो जांच के बाद स्पष्ट होंगी।
मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार और वन संरक्षक ललित कुमार वर्मा ने बृहस्पतिवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि डब्लूसीसीबी ऐसे वेबसाइट की जांच कर रही थी, जिनके माध्यम से वन्य जीवों के अंगों की ऑनलाइन ट्रेडिंग की जा रही है। astrodevam.com नाम की वेबसाइट जांच के दायरे में आई।
ग्राहक बनकर पकड़ा
जांच में पता चला कि ज्योतिष में तंत्रमंत्र की आड़ में वन्य जीवों के अंगों की ई-ट्रेडिंग की जा रही है। वेबसाइट के माध्यम से संपर्क कर वन विभाग के अफसर ग्राहक बनकर नोएडा सेक्टर 18 में अंसल फोरचून आर्केड स्थित एस्ट्रोदेवम फर्म पर पहुंचे। जहां छापा मारकर ज्योतिष शास्त्री आचार्य कालकी कृष्णन पुत्र रमेश चंद कृष्णन को पकड़ लिया। आचार्य कालकी केंद्रीय विहार (बी 179 पॉकेट) सेक्टर 82 नोएडा का निवासी है। जिसके तीन ऑफिसों से आठ कंप्यूटर और उनकी हार्ड डिस्क कब्जे में ली गई। 1.95 लाख कैश मिला।
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यह हुई बरामदगी
वन्य जीवों के अंगों में 25 हत्था जोड़ी मिले, जो वास्तव में इंडियन मॉनिटर लिजार्ड (छिपकली) के लिंग का हिस्सा है। ये मुख्यत: राजस्थान और यूपी के सूखे इलाके में मिलती है। जो शेड्यूल वन के तहत संरक्षित है। इसको मारने और अवशेष रखने पर सात साल तक की सजा है। वेबसाइट पर इसको वशीकरण करने के नाम पर स्पेशल पौधा कहकर 2894 रुपये में बेचा जा रहा था। 28 इंद्रजाल (समुद्री जीव) मिले हैं। 27 सियार सिंगी (सियार के सिर पर पाए जाने वाली गांठ, जिसे तंत्र-मंत्र में प्रयोग किया जाता है) और शंख मिले। जांच में साबित हुआ कि वन्य जीवों के अंगों को ई-रिटेल के माध्यम से देश-विदेश में बेचा जा रहा था।
कोड वर्ड से हो रही थी ट्रेडिंग
वन्य जीवों के अंगों की ऑनलाइन ट्रेडिंग कोड वर्ड से हो रही थी। टाइगर की खाल को धारीवाला चादर, बड़ा चादर, बाहरवाला, ट्रॉफी, रंग और चादर बोलते हैं। टाइगर की हड्डी को हड्डी, लकड़ी, अंदर वाला कहते हैं। तेंदुए की खाल को छोटी चादर, ढाबे वाला चादर कहते हैं। सैंड बोआ स्नैक को चॉकलेट और डबल इंजन कहते हैं।
मेरठ में सीबीआई ने पकड़ा था
मुख्य वन संरक्षक के मुताबिक वर्ष 1998 में मेरठ कस्टम इंस्पेक्टर केके बर्नवाल को सीबीआई ने रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। बर्खास्तगी के बाद बर्नवाल ने आचार्य कालकी नाम रख लिया और ज्योतिषी बनकर ऑनलाइन ज्योतिष की आड़ में वन्य जीवों के अंगों की ट्रेडिंग करने लगा। कस्टम में सर्विस करने की वजह से बॉर्डर और देश-विदेश में बने संपर्कों का उसने इस्तेमाल किया।
शूटर प्रशांत से फोन पर हुई बात
आचार्य कालकी की शूटर प्रशांत विश्नोई से फोन पर कई बार बातें हुई हैं। वन्य जीवों की तस्करी और व्यापार में दोनों लोग शामिल लग रहे हैं। फोन दोनों तरफ से किए गए हैं। प्रशांत के भी वन्य जीवों के शिकार, आधुनिक हथियारों को अवैध ढंग से लाने में अंतरराष्ट्रीय संबंध सामने आ रहे हैं। वह तिहाड़ जेल में है। आचार्य कालकी ने अंतरराष्ट्रीय संधि द कनवेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एंडेनजर्ड स्पेशीज ऑफ वाइल्ड फोना एंड फ्लोरा का उल्लंघन किया है।
खास बात
डब्लूसीसीबी के इनपुट पर वन विभाग ने नोएडा से दबोचा तथाकथित ज्योतिषी
कस्टम इंस्पेक्टर था, सीबीआई ने रिश्वत लेते पकड़ा तो नाम और पेशा बदल लिया था
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मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार और वन संरक्षक ललित कुमार वर्मा ने बृहस्पतिवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि डब्लूसीसीबी ऐसे वेबसाइट की जांच कर रही थी, जिनके माध्यम से वन्य जीवों के अंगों की ऑनलाइन ट्रेडिंग की जा रही है। astrodevam.com नाम की वेबसाइट जांच के दायरे में आई।
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ग्राहक बनकर पकड़ा
जांच में पता चला कि ज्योतिष में तंत्रमंत्र की आड़ में वन्य जीवों के अंगों की ई-ट्रेडिंग की जा रही है। वेबसाइट के माध्यम से संपर्क कर वन विभाग के अफसर ग्राहक बनकर नोएडा सेक्टर 18 में अंसल फोरचून आर्केड स्थित एस्ट्रोदेवम फर्म पर पहुंचे। जहां छापा मारकर ज्योतिष शास्त्री आचार्य कालकी कृष्णन पुत्र रमेश चंद कृष्णन को पकड़ लिया। आचार्य कालकी केंद्रीय विहार (बी 179 पॉकेट) सेक्टर 82 नोएडा का निवासी है। जिसके तीन ऑफिसों से आठ कंप्यूटर और उनकी हार्ड डिस्क कब्जे में ली गई। 1.95 लाख कैश मिला।
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यह हुई बरामदगी
वन्य जीवों के अंगों में 25 हत्था जोड़ी मिले, जो वास्तव में इंडियन मॉनिटर लिजार्ड (छिपकली) के लिंग का हिस्सा है। ये मुख्यत: राजस्थान और यूपी के सूखे इलाके में मिलती है। जो शेड्यूल वन के तहत संरक्षित है। इसको मारने और अवशेष रखने पर सात साल तक की सजा है। वेबसाइट पर इसको वशीकरण करने के नाम पर स्पेशल पौधा कहकर 2894 रुपये में बेचा जा रहा था। 28 इंद्रजाल (समुद्री जीव) मिले हैं। 27 सियार सिंगी (सियार के सिर पर पाए जाने वाली गांठ, जिसे तंत्र-मंत्र में प्रयोग किया जाता है) और शंख मिले। जांच में साबित हुआ कि वन्य जीवों के अंगों को ई-रिटेल के माध्यम से देश-विदेश में बेचा जा रहा था।
कोड वर्ड से हो रही थी ट्रेडिंग
वन्य जीवों के अंगों की ऑनलाइन ट्रेडिंग कोड वर्ड से हो रही थी। टाइगर की खाल को धारीवाला चादर, बड़ा चादर, बाहरवाला, ट्रॉफी, रंग और चादर बोलते हैं। टाइगर की हड्डी को हड्डी, लकड़ी, अंदर वाला कहते हैं। तेंदुए की खाल को छोटी चादर, ढाबे वाला चादर कहते हैं। सैंड बोआ स्नैक को चॉकलेट और डबल इंजन कहते हैं।
मेरठ में सीबीआई ने पकड़ा था
मुख्य वन संरक्षक के मुताबिक वर्ष 1998 में मेरठ कस्टम इंस्पेक्टर केके बर्नवाल को सीबीआई ने रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। बर्खास्तगी के बाद बर्नवाल ने आचार्य कालकी नाम रख लिया और ज्योतिषी बनकर ऑनलाइन ज्योतिष की आड़ में वन्य जीवों के अंगों की ट्रेडिंग करने लगा। कस्टम में सर्विस करने की वजह से बॉर्डर और देश-विदेश में बने संपर्कों का उसने इस्तेमाल किया।
शूटर प्रशांत से फोन पर हुई बात
आचार्य कालकी की शूटर प्रशांत विश्नोई से फोन पर कई बार बातें हुई हैं। वन्य जीवों की तस्करी और व्यापार में दोनों लोग शामिल लग रहे हैं। फोन दोनों तरफ से किए गए हैं। प्रशांत के भी वन्य जीवों के शिकार, आधुनिक हथियारों को अवैध ढंग से लाने में अंतरराष्ट्रीय संबंध सामने आ रहे हैं। वह तिहाड़ जेल में है। आचार्य कालकी ने अंतरराष्ट्रीय संधि द कनवेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एंडेनजर्ड स्पेशीज ऑफ वाइल्ड फोना एंड फ्लोरा का उल्लंघन किया है।
खास बात
डब्लूसीसीबी के इनपुट पर वन विभाग ने नोएडा से दबोचा तथाकथित ज्योतिषी
कस्टम इंस्पेक्टर था, सीबीआई ने रिश्वत लेते पकड़ा तो नाम और पेशा बदल लिया था