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कांवड़ यात्रा की खबर
Updated Mon, 03 Jul 2017 02:59 AM IST
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कांवड़ यात्रा में कट बंद कराने में छूट जाएंगे पसीने
- ट्रैफिक और थाना पुलिस के पास नहीं है पर्याप्त संख्या में बैरियर
- मिट्टी से भरे ड्रम रखकर ही चलाया जाता है काम
- ड्रम और बल्ल्यिों से बना रहता है सड़क पर खतरा
मेरठ। कांवड़ यात्रा के शुरू होने में जहां चंद दिनों का ही समय बचा है। ऐसे में अभी तक ट्रैफिक पुलिस और थाना पुलिस के पास हाईवे पर कट बंद कराने और वनवे व्यवस्था के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं है। न तो पुलिस के पास पर्याप्त संख्या में बैरियर हैं न ही कट बंद कराने के लिए कोई संसाधन। इस बार भी लोहे के ड्रम और बल्लियों के सहारे ही पुलिस प्रशासन कांवड़ यात्रा की तैयारी कर रहा है।
10 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू हो जाएगी। जबकि 15 जुलाई से दिल्ली- देहरादून हाईवे पर यातायात को वनवे कर दिया जाएगा। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस और हाईवे पर संबंधित थाना पुलिस को 10 से 15 जुलाई के बीच में पूरी तरह से कट बंद करने की जिम्मेदारी दी गई है। एनएच-58 पर मेरठ के अंतर्गत मोहिउद्ीनपुर से लेकर सकौती तक 55 किमी की दूरी पड़ती है। जबकि परताुपर तिराहे से मोदीपुरम के बीच 17 किमी का शहरी एरिया भी है। ट्रैफिक पुलिस के पास रिजर्व में इस समय सिर्फ 20 बैरियर हैं, जबकि 270 बैरियर शहर में अलग अलग स्थानों पर थाना पुलिस को सौंप रखे है। ऐसे में कट बंद कराना ट्रैफिक पुलिस और थाना पुलिस के लिए चुनौती होगा।
मिट्टी के ड्रम और बल्लियों से रहता है खतरा
कट बंद कराने के लिए लकड़ी की बल्ली, बांस और तारकोल के खाली ड्रमों का सहारा लिया जाता है। ऐसे में कई बार ड्रम सड़क पर गिर जाते हैं और हादसे की आशंका रहती है। ड्रम और बल्लियों से कांवड़ियों के अलावा अन्य लोग भी चोटिल हो जाते हैं। दिल्ली रोड पर नवीन मंडी के सामने एक साल पहले कांवड़ यात्रा के दौरान कट बंद कराने के लिए जो मिट्टी से भरे लोहे के जो ड्रम रखे थे वह अभी तक नहीं हटाए गए हैं।
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क्रेेन की व्यवस्था नहीं:
क ांवड़ यात्रा के दोरान कोई वाहन सड़क पर खराब हो जाए तो ट्रैफिक पुलिस के पास क्रेन भी नहीं है। एक क्रेन पुलिस लाइन में है, लेकिन इसी क्रेन पर पूरे जिले की पुलिस निर्भर रहती है। ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि कट बंद कराने के लिए नगर निगम, विकास प्राधिकरण और अन्य विभागों की भी जिम्मेदारी है। लेकिन एन वक्त पर यह विभाग ट्रैफिक पुलिस पर ही जिम्मेदारी छोड़ देते हैं।
कोट
ट्रैफिक पुलिस के पास कुछ संसाधनों की कमी है। कांवड़ यात्रा से पहले इन्हें पूरा करने के लिए एमडीए को पत्र लिखा गया है। कट बंद कराने को लेकर संबंधित विभागों को भी जानकारी दी गई है।
संजीव बाजपेई, पुलिस अधीक्षक यातायात
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- ट्रैफिक और थाना पुलिस के पास नहीं है पर्याप्त संख्या में बैरियर
- मिट्टी से भरे ड्रम रखकर ही चलाया जाता है काम
- ड्रम और बल्ल्यिों से बना रहता है सड़क पर खतरा
मेरठ। कांवड़ यात्रा के शुरू होने में जहां चंद दिनों का ही समय बचा है। ऐसे में अभी तक ट्रैफिक पुलिस और थाना पुलिस के पास हाईवे पर कट बंद कराने और वनवे व्यवस्था के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं है। न तो पुलिस के पास पर्याप्त संख्या में बैरियर हैं न ही कट बंद कराने के लिए कोई संसाधन। इस बार भी लोहे के ड्रम और बल्लियों के सहारे ही पुलिस प्रशासन कांवड़ यात्रा की तैयारी कर रहा है।
10 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू हो जाएगी। जबकि 15 जुलाई से दिल्ली- देहरादून हाईवे पर यातायात को वनवे कर दिया जाएगा। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस और हाईवे पर संबंधित थाना पुलिस को 10 से 15 जुलाई के बीच में पूरी तरह से कट बंद करने की जिम्मेदारी दी गई है। एनएच-58 पर मेरठ के अंतर्गत मोहिउद्ीनपुर से लेकर सकौती तक 55 किमी की दूरी पड़ती है। जबकि परताुपर तिराहे से मोदीपुरम के बीच 17 किमी का शहरी एरिया भी है। ट्रैफिक पुलिस के पास रिजर्व में इस समय सिर्फ 20 बैरियर हैं, जबकि 270 बैरियर शहर में अलग अलग स्थानों पर थाना पुलिस को सौंप रखे है। ऐसे में कट बंद कराना ट्रैफिक पुलिस और थाना पुलिस के लिए चुनौती होगा।
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मिट्टी के ड्रम और बल्लियों से रहता है खतरा
कट बंद कराने के लिए लकड़ी की बल्ली, बांस और तारकोल के खाली ड्रमों का सहारा लिया जाता है। ऐसे में कई बार ड्रम सड़क पर गिर जाते हैं और हादसे की आशंका रहती है। ड्रम और बल्लियों से कांवड़ियों के अलावा अन्य लोग भी चोटिल हो जाते हैं। दिल्ली रोड पर नवीन मंडी के सामने एक साल पहले कांवड़ यात्रा के दौरान कट बंद कराने के लिए जो मिट्टी से भरे लोहे के जो ड्रम रखे थे वह अभी तक नहीं हटाए गए हैं।
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क्रेेन की व्यवस्था नहीं:
क ांवड़ यात्रा के दोरान कोई वाहन सड़क पर खराब हो जाए तो ट्रैफिक पुलिस के पास क्रेन भी नहीं है। एक क्रेन पुलिस लाइन में है, लेकिन इसी क्रेन पर पूरे जिले की पुलिस निर्भर रहती है। ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि कट बंद कराने के लिए नगर निगम, विकास प्राधिकरण और अन्य विभागों की भी जिम्मेदारी है। लेकिन एन वक्त पर यह विभाग ट्रैफिक पुलिस पर ही जिम्मेदारी छोड़ देते हैं।
कोट
ट्रैफिक पुलिस के पास कुछ संसाधनों की कमी है। कांवड़ यात्रा से पहले इन्हें पूरा करने के लिए एमडीए को पत्र लिखा गया है। कट बंद कराने को लेकर संबंधित विभागों को भी जानकारी दी गई है।
संजीव बाजपेई, पुलिस अधीक्षक यातायात