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माफिया की कमाई का जरिया खादर की जमीन

Tue, 21 May 2019 01:47 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 21 May 2019 01:47 AM IST
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माफिया की कमाई का जरिया खादर की जमीन
माफिया की कमाई का जरिया खादर की जमीन
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मवाना। गंगा स्नान का मेला खत्म होते ही मखदूमपुर खादर क्षेत्र में गंगा किनारे की भूमि पर खरबूजा व तरबूज की फसल उगाने के लिए हर साल गंगा को मैली करने से नहीं चूक रहे हैं। यही नहीं इस कारण गंगा की गोद में पल रहे जीवों को भी नुकसान पहुंच रहा है। साथ ही गंगा को साफ रखने के सरकार के प्रयासों का पलीता लग रहा है। तरबूज व खरबूजे की फसल तैयार है और बाजार में पहुंच रही है। जिस कारण माफियाओं की जेबें भर रही हैं।
हर साल होता है लाखों-करोड़ों का खेल
उल्लेखनीय है कि खादर में ग्राम समाज की हजारों एकड़ भूमि पर भूमाफिया का अवैध कब्जा है। जिस पर माफिया गेहूं और गन्ने की फसल उगाकर लाखों रुपये कमा रहे हैं। अवैध रूप से बोई गई गेहूं की फसल कट चुकी है। इसके बावजूद तहसील प्रशासन ने इस ओर ध्यान देना गवारा नहीं समझा। जबकि एक दशक पहले तहसील प्रशासन द्वारा खादर के माफिया द्वारा उगाई गई गन्ने और गेहूं की फसल से लाखों रुपये जुर्माना वसूल कर राजस्व बढ़ाता था। माफिया द्वारा गरीबों से रुपये वसूलकर तरबूज व खरबूजे आदि बोने के लिए कुछ जमीन दे देता है। इन दिनों फसल तैयार है और बाजार में खादर क्षेत्र के खरबूजा व तरबूज के फलों की खूब मांग भी है। वहीं, प्रशासन व वन विभाग अब भी कार्रवाई की ओर से आंखें मूंदे बैठा है।
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गंगा को साफ रखने के प्रयास को लग रहा पलीता
मोदी सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत गंगा को साफ रखने के लिए हर साल लाखों करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाये जा रहे हैं। वहीं, माफिया गंगा किनारे की जमीन पर कब्जा कर यहां फसल बो दिए जाने से गंगा की सफाई के प्रयास को पलीता लग रहा है । प्रशासन गंगा की सफाई पर पैसा बहा रहा है, वहीं, माफिया खाद, गोबर आदि गंगा किनारे डालकर इन प्रयासों को विफल करने में लगे हुए हैं। तरबूज व खरबूजे की फसल तैयार होने के बाद फलों को तोड़ने के उपरांत किसान उनकी बेल व पत्तों को भी गंगा किनारे फेंक देते हैं। जिस कारण गंगा में रहने वाले जीव इन बेलों में फंसकर मौत का शिकार हो जाते हैं या तस्करों के हत्थे चढ़ जाते हैं।
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कई बार हो चुका है निरीक्षण
गंगा किनारे हाल ही में कछुओं के लिए हैचरी बनाई गई थी। जिससे उनके बड़े होने के बाद उन्हें गंगा में छोड़ा जा सके। इस दौरान बीच-बीच में वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने भी इस हैचरी का निरीक्षण किया था। इसके अलावा वन्य क्षेत्र में भ्रमण करने के लिए मेरठ मंडल के कमिश्नर डीएफओ, डीएम आदि भी यहां आ चुके हैं। इसके बावजूद माफिया पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिस कारण उनके हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं। वह गंगा मैली करने के साथ-साथ लाखों-करोड़ों के न्यारे-वारे कर जेबें जमकर गर्म कर रहे हैं ।
इनका कहना है
मामला संज्ञान में नहीं था। जल्दी ही वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर कार्रवाई की जाएगी।- अंकुर श्रीवास्तव, एसडीएम मवाना
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