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आसमान पर तनी राजस्थानी और ईरानी धूल की चादर
Updated Thu, 14 Jun 2018 02:24 AM IST
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मेरठ/मोदीपुरम। ईरान और दक्षिणी अफगानिस्तान व राजस्थान से चली धूल भरी आंधी एनसीआर और समूचे पश्चिमी उप्र में छा गई। नतीजा, बुधवार को आसमान पर धूल की चादर तन गई। आंखों में जलन रही तो शहर वासियों को सांस लेने में भी परेशानी हुई। पीएम 2.5 (हवा में मौजूद खतरनाक कण) यानी प्रदूषण का स्तर भी कई गुना बढ़ गया। वहीं, गर्मी, लू और उमस ने पहले से बेहाल कर रखा है। 16-17 जून को बारिश के आसार हैं।
पुरवाई से पश्चिमी हुई हवाओं ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मौसम बदल दिया। राजस्थान से उठा धूल का गुबार दिल्ली होते हुए मेरठ पहुंचा तो उसका असर दिन निकलते ही दिखना शुरू हो गया। सुबह के समय उड़ रही धूल से आंखों में जलन बढ़ती जा रही थी। दोपहर तपते-तपते सांस लेने में भी परेशानी होने लगी। शहर में अचानक से बढ़े प्रदूषण ने लोगों को परेशान कर दिया। बेगमपुल पर तो पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 का स्तर 400 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक पहुंच गया। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार धूल के यह सूक्ष्म खतरनाक कण हवा में घुलकर सांस के माध्यम से सीधे फेफड़ों तक पहुंचते हैं। जो सांस लेने में परेशानी के साथ ही कई गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।
धुंध से उलट, बारिश जरूरी
मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो जिस तरह सर्दियों में आसमान में धुंध की परतें जम जाती हैं, ठीक उसी तरह पीली मिट्टी की चादर फैल गई। दोपहर में धूल की इस चादर ने एक बार को सूरज को भी ढक लिया। इस धूल को सतह पर लाने के लिए तेज हवा और बारिश जरूरी है।
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रात का पारा चढ़ा
बुधवार को मौसम में अन्य दिनों के मुकाबले उमस ज्यादा रही। इसका प्रमुख कारण रात का तापमान बढ़ना रहा। मंगलवार को न्यूनतम तापमान 27.7 डिग्री था, जो बढ़कर 30.7 डिग्री पर पहुंच गया। हालांकि दिन के तापमान में अप्रत्याशित रूप से करीब एक डिग्री की गिरावट रही। अधिकतम तापमान 39.6 डिग्री रहा। अधिकतम आर्द्रता 52 व न्यूनतम 38 प्रतिशत दर्ज की गई। हवा की रफ्तार 8 किमी प्रति घंटा रही।
30 हजार फीट तक ऊंचाई
सतह बेहद गर्म होने और तेज हवाओं के साथ उड़ती धूल ने वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) को भी गंभीर स्तर पर पहुंचा दिया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, बुधवार को दिल्ली-एनसीआर में पर्टिकुलेट मैटर-10 (हवा में मौजूद खतरनाक कण) मानकों से 9 गुना ज्यादा यानी आपात स्तर को पार कर 830 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक रिकॉर्ड हुआ। पीएम 2.5 भी सामान्य स्तर से 4 गुना ज्यादा रहा। धूल का स्रोत ईरान और दक्षिणी अफगानिस्तान व राजस्थान से आई धूल भरी आंधी रहा। इन जगहों से 30 हजार फीट की ऊंचाई तक उठी धूल ने दिल्ली और आसपास के इलाकों को जद में लिया है।
शहर में ये रहा पीएम 2.5 लेवल
बेगमपुल - 400
बच्चा पार्क - 341
घंटाघर - 311
गढ़ रोड - 378
हापुड़ अड्डा - 322
केसरगंज - 377
टीपी नगर चौराहा - 332
बिजली बंबा चौराहा -288
(माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर में)
------------
धूल भरी चक्रवाती हवाएं
इस वक्त 30-40 किमी प्रति घंटा रफ्तार से धूल भरी चक्रवाती हवाएं चल रही हैं। इनकी जद में दिल्ली, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान हैं। कुलदीप श्रीवास्तव, क्षेत्रीय निदेशक भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी)
धूल से बदला मौसम
राजस्थान की तरफ से उठे धूल के गुबार से वेस्ट यूपी का मौसम बदला है। इससे हवाओं रुख भी बदल गया है। आने वाले दो दिन और गर्मी बढ़ेगी। फिलहाल मौसम ऐसे ही रहेगा। -डॉ. एन. सुभाष, मौसम वैज्ञानिक
मानसून पर पड़ेगा असर
पछुवा हवा चलने से राजस्थान से उड़ी धूल से आंखों में जलन बढ़ रही है। पश्चिमी हवाएं धीरे-धीरे पूर्वी और होने पर मौसम बदलेगा। मौसम में अभी बदलाव के कारण मानसून पर भी इसका असर दिखेगा। तेजी से बढ़ रही मानसून की रफ्तार भी थोड़ी धीमी हुई है। अभी मौसम ऐसे ही रहेगा। हवा से डस्ट हटेगी। -डॉ. यूपी शाही, मौसम वैज्ञानिक कृषि विवि
खास बातें:
गर्मी के साथ दोहरी आफत
400 पहुंचा पीएम टू का लेवल डस्ट और प्रदूषण से
- आंखों में रही जलन, सांस लेने में भी हुई परेशानी
- गर्मी, लू और उमस ने अलग से कर रखा है बेहाल
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पुरवाई से पश्चिमी हुई हवाओं ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मौसम बदल दिया। राजस्थान से उठा धूल का गुबार दिल्ली होते हुए मेरठ पहुंचा तो उसका असर दिन निकलते ही दिखना शुरू हो गया। सुबह के समय उड़ रही धूल से आंखों में जलन बढ़ती जा रही थी। दोपहर तपते-तपते सांस लेने में भी परेशानी होने लगी। शहर में अचानक से बढ़े प्रदूषण ने लोगों को परेशान कर दिया। बेगमपुल पर तो पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 का स्तर 400 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक पहुंच गया। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार धूल के यह सूक्ष्म खतरनाक कण हवा में घुलकर सांस के माध्यम से सीधे फेफड़ों तक पहुंचते हैं। जो सांस लेने में परेशानी के साथ ही कई गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।
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धुंध से उलट, बारिश जरूरी
मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो जिस तरह सर्दियों में आसमान में धुंध की परतें जम जाती हैं, ठीक उसी तरह पीली मिट्टी की चादर फैल गई। दोपहर में धूल की इस चादर ने एक बार को सूरज को भी ढक लिया। इस धूल को सतह पर लाने के लिए तेज हवा और बारिश जरूरी है।
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रात का पारा चढ़ा
बुधवार को मौसम में अन्य दिनों के मुकाबले उमस ज्यादा रही। इसका प्रमुख कारण रात का तापमान बढ़ना रहा। मंगलवार को न्यूनतम तापमान 27.7 डिग्री था, जो बढ़कर 30.7 डिग्री पर पहुंच गया। हालांकि दिन के तापमान में अप्रत्याशित रूप से करीब एक डिग्री की गिरावट रही। अधिकतम तापमान 39.6 डिग्री रहा। अधिकतम आर्द्रता 52 व न्यूनतम 38 प्रतिशत दर्ज की गई। हवा की रफ्तार 8 किमी प्रति घंटा रही।
30 हजार फीट तक ऊंचाई
सतह बेहद गर्म होने और तेज हवाओं के साथ उड़ती धूल ने वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) को भी गंभीर स्तर पर पहुंचा दिया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, बुधवार को दिल्ली-एनसीआर में पर्टिकुलेट मैटर-10 (हवा में मौजूद खतरनाक कण) मानकों से 9 गुना ज्यादा यानी आपात स्तर को पार कर 830 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक रिकॉर्ड हुआ। पीएम 2.5 भी सामान्य स्तर से 4 गुना ज्यादा रहा। धूल का स्रोत ईरान और दक्षिणी अफगानिस्तान व राजस्थान से आई धूल भरी आंधी रहा। इन जगहों से 30 हजार फीट की ऊंचाई तक उठी धूल ने दिल्ली और आसपास के इलाकों को जद में लिया है।
शहर में ये रहा पीएम 2.5 लेवल
बेगमपुल - 400
बच्चा पार्क - 341
घंटाघर - 311
गढ़ रोड - 378
हापुड़ अड्डा - 322
केसरगंज - 377
टीपी नगर चौराहा - 332
बिजली बंबा चौराहा -288
(माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर में)
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धूल भरी चक्रवाती हवाएं
इस वक्त 30-40 किमी प्रति घंटा रफ्तार से धूल भरी चक्रवाती हवाएं चल रही हैं। इनकी जद में दिल्ली, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान हैं। कुलदीप श्रीवास्तव, क्षेत्रीय निदेशक भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी)
धूल से बदला मौसम
राजस्थान की तरफ से उठे धूल के गुबार से वेस्ट यूपी का मौसम बदला है। इससे हवाओं रुख भी बदल गया है। आने वाले दो दिन और गर्मी बढ़ेगी। फिलहाल मौसम ऐसे ही रहेगा। -डॉ. एन. सुभाष, मौसम वैज्ञानिक
मानसून पर पड़ेगा असर
पछुवा हवा चलने से राजस्थान से उड़ी धूल से आंखों में जलन बढ़ रही है। पश्चिमी हवाएं धीरे-धीरे पूर्वी और होने पर मौसम बदलेगा। मौसम में अभी बदलाव के कारण मानसून पर भी इसका असर दिखेगा। तेजी से बढ़ रही मानसून की रफ्तार भी थोड़ी धीमी हुई है। अभी मौसम ऐसे ही रहेगा। हवा से डस्ट हटेगी। -डॉ. यूपी शाही, मौसम वैज्ञानिक कृषि विवि
खास बातें:
गर्मी के साथ दोहरी आफत
400 पहुंचा पीएम टू का लेवल डस्ट और प्रदूषण से
- आंखों में रही जलन, सांस लेने में भी हुई परेशानी
- गर्मी, लू और उमस ने अलग से कर रखा है बेहाल