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मुजफ्फरनगर न्यूज

Sun, 10 Sep 2017 12:32 AM IST
Updated Sun, 10 Sep 2017 12:32 AM IST
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मुजफ्फरनगर न्यूज
दौड़ की तैयारी में जिंदगी हार गया गौरव
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रतनपुरी (मुजफ्फरनगर)। श्री प्राणनाथ इंटर कालेज में तहसील स्तरीय प्रतियोगिता के लिए कराई गई दौड़ में छात्र की मौत हो गई। यह मौत कई सवाल भी छोड़ गई। कितनी दूरी की दौड़ गौरव लगा रहा था, क्या वह उसकी शारीरिक क्षमता के अनुरूप थी, उसे दौड़ने और दौड़ने के दौरान किस तरह से सांसें लेनी है यह बताया गया था या नहीं, इन सवालों का जवाब अभी किसी के पास नहीं है।
गौरव का शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो रहा था। गौरव का एक छोटा भाई सौरभ और दो बहनें पूजा न स्वाति और गौरव की मां बिमलेश देवी का रो रोकर बुरा हाल था। स्कूल से प्रधानाचार्या मंजू सिसौदिया भी अध्यापकों के साथ मृतक छात्र के घर पहुंचीं। स्कूल स्टाफ ने परिजनों को सांत्वना दी। सूचना मिलने पर पुलिस भी गांव में पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों ने घटना की जानकारी ली। मृतक छात्र के परिजनों ने कानूनी कार्रवाई करने से इंकार कर दिया।
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इस तरह की मृत्यु के कई कारण हैं। दौड़ का तरीका सही नहीं होना और दिल पर अधिक जोर पड़ना, कई बार बच्चों में हार्ट और मलेरिया के लक्षण होते हैं, जो बाहरी तौर पर दिखाई नहीं देते। दिल का वाल्व कमजोर होने के कारण दौड़ लगाते समय ब्लड सर्कुलेशन बिगड़ जाना भी मौत की वजह बन जाता है। - डाक्टर राजेश कुमार, वरिष्ठ परामर्शदाता एवं फिजिशियन, जिला अस्पताल
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ऐसे करें दौड़ने की शुरूआत
-दौड़ने से पहले वार्मअप और तेज चलने से शुरूआत करें।
-कठिन अंतरालों का प्रशिक्षण देकर शरीर को अभ्यस्त बनाए।
-पहले तेज फिर धीरे दौड़े, फिर तेज दौड़कर अभ्यास करें।
-क्षमता के अनुरूप दौड़, ज्यादा प्रयास नुकसानदेह हो सकता है।

ये है सांस फूलने की वजह
एकदम से तेज भागना शुरू करना या फिर दौड़ने से पहले खुद को वार्मअप न करना सांस फूलने के सबसे अहम कारण है। इसके अलावा दौड़ते समय सही तरीके सांस न लेना भी एक कारण है। कई बार तो अनुभवी धावक भी दौड़ते समय सही सांस लेने के महत्व को नहीं समझते। गति के साथ सांस लेने पर ध्यान देने की जरूरत है। गहरी लंबी सांसें लें और गहरे लंबे सांसें छोड़ें। इससे मांसपेशियों को आराम मिलता है। यदि जल्दी- जल्दी कम गहरी सांसें लेते हैं तो आप न सही से ऑक्सीजन ले रहे हैं और न कार्बन डाईऑक्साइड छोड़ रहे हैं। आप केवल फेफड़ों के ऊपरी हिस्से का इस्तेमाल कर रहे हैं। गहरी सांसे लेने के साथ उन्हें उसी तरह छोड़ना भी आना चाहिए।
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