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17 दुश्मनों को मारकर शहीद हुए थे योगेंद्र
Updated Wed, 26 Jul 2017 01:38 AM IST
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हस्तिनापुर (मेरठ)। कारगिल में देश की रक्षा के लिए ग्राम पाली निवासी योगेंद्र यादव टाइगर हिल पर 17 पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर कर पांच जुलाई 1999 को शहीद हो गए थे। परिवार के सदस्य आज भी देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने में पीछे नहीं रहना चाहते।
उन्हें इस बात का अफसोस है कि राजनीतिक लोगों ने योगेंद्र की याद में बनाए जाने वाले शहीद स्मारक और हस्तिनापुर को जोड़ने वाला मुख्य द्वार बनवाने का वादा अभी तक पूरा नहीं किया। योगेंद्र यादव के छोटे भाई महीपाल भी सेना की डेजिडियर बटालियन से सिपाही के पद पर देश सेवा में जुटे हैं। यह परिवार आने वाली पीढ़ी के युवाओं को भी देशसेवा में लगाने का मन बना चुका है। परिवार में योगेंद्र की पत्नी उर्मिला, दो पुत्र और एक पुत्री है। बुधवार (आज) कारगिल दिवस पर सैफपुर कर्मचंदपुर मार्ग पर स्थित उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन होगा।
- कारगिल की चोटी पर किया था दुश्मनों से डटकर मुकाबला
- अफसोस यह कि नहीं बना शहीद स्मारक और मुख्य द्वार
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उन्हें इस बात का अफसोस है कि राजनीतिक लोगों ने योगेंद्र की याद में बनाए जाने वाले शहीद स्मारक और हस्तिनापुर को जोड़ने वाला मुख्य द्वार बनवाने का वादा अभी तक पूरा नहीं किया। योगेंद्र यादव के छोटे भाई महीपाल भी सेना की डेजिडियर बटालियन से सिपाही के पद पर देश सेवा में जुटे हैं। यह परिवार आने वाली पीढ़ी के युवाओं को भी देशसेवा में लगाने का मन बना चुका है। परिवार में योगेंद्र की पत्नी उर्मिला, दो पुत्र और एक पुत्री है। बुधवार (आज) कारगिल दिवस पर सैफपुर कर्मचंदपुर मार्ग पर स्थित उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन होगा।
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- कारगिल की चोटी पर किया था दुश्मनों से डटकर मुकाबला
- अफसोस यह कि नहीं बना शहीद स्मारक और मुख्य द्वार