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एंटी करप्शन की टीम ने रंगेहाथ दस हजार की रिश्वत लेते दबोचा, रिपोर्ट दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 08 Jul 2017 03:14 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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चकबंदी विभाग में पेशकार अरविंद कुमार को कचहरी गेट पर दस हजार रुपये रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम ने रंगेहाथ दबोच लिया। पेशकार ने नरहेडा के किसान से नाम में संशोधन करने के लिए 25 हजार रुपये मांगे थे। एंटी करप्शन ने पेशकार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। शनिवार को उसे जेल भेजा जाएगा।
मुंडाली थानाक्षेत्र के नरहेडा गांव निवासी इरशाद के पिता का नाम वशी है। लेकिन चकबंदी के दौरान कागजों में वशी की जगह वशीर चढ़ गया था। नाम में संशोधन कराने के लिए इरशाद छह माह से चकबंदी ऑफिस के चक्कर काट रहे थे। इरशाद का काम कराने के लिए चकबंदी विभाग के एक अधिकारी के पेशकार अरविंद कुमार ने उससे 25 हजार रुपये रिश्वत मांगी। इरशाद ने इसकी सूचना एंटी करप्शन टीम को दी। प्लानिंग के तहत इरशाद ने कचहरी गेट पर अरविंद को दस हजार रुपये दिए। इसी दौरान एंटी करप्शन टीम ने उसे रंगेहाथ दबोच लिया। एंटी करप्शन टीम अरविंद को सिविल लाइन थाने ले आई। जहां उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
काम हो गया कहते दबोचा
अरविंद और इरशाद की फोन पर बातचीत के बारे में एंटी करप्शन टीम को पता था। शुक्रवार को टीम सुबह से कचहरी के आसपास मौजूद थी। इरशाद का फोन ऑन था। इरशाद ने पैसा देकर कहा कि काम हो गया। तभी एंटी करप्शन की टीम ने अरविंद को रंगेहाथ दबोच लिया। टीम में इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार, विजय कुमार, रणवीर खोकर, आनंद शर्मा समेत आठ लोग थे।
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विभाग का एक कर्मचारी भी शामिल
पीड़ित इरशाद का कहना है कि रिश्वत लेने में अरविंद के साथ उसके विभाग का एक ओर कर्मचारी शामिल था। जो अक्सर अरविंद के साथ रिश्वत के पैसा की सौदेबाजी करता था। एंटी करप्शन टीम की छापामारी में दूसरा कर्मचारी बच गया। क्योंकि वह उस समय ऑफिस में नहीं था।
रिश्वत लेना बड़ा अपराध
एंटी करप्शन इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार ने बताया कि रिश्वत लेना बड़ा अपराध है। उनकी टीम लगातार अलग-अलग विभाग के कर्मचारी और अधिकारियों को पकड़कर जेल भेजती है। दस दिन पहले एंटी करप्शन टीम ने कोतवाली थाने में तैनात दरोगा अमृता यादव को 20 हजार रुपये रिश्वत लेने दबोचा था। मुजफ्फरनगर में एक अधिकारी को पांच हजार की रिश्वत लेते पकड़ा था।
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मुंडाली थानाक्षेत्र के नरहेडा गांव निवासी इरशाद के पिता का नाम वशी है। लेकिन चकबंदी के दौरान कागजों में वशी की जगह वशीर चढ़ गया था। नाम में संशोधन कराने के लिए इरशाद छह माह से चकबंदी ऑफिस के चक्कर काट रहे थे। इरशाद का काम कराने के लिए चकबंदी विभाग के एक अधिकारी के पेशकार अरविंद कुमार ने उससे 25 हजार रुपये रिश्वत मांगी। इरशाद ने इसकी सूचना एंटी करप्शन टीम को दी। प्लानिंग के तहत इरशाद ने कचहरी गेट पर अरविंद को दस हजार रुपये दिए। इसी दौरान एंटी करप्शन टीम ने उसे रंगेहाथ दबोच लिया। एंटी करप्शन टीम अरविंद को सिविल लाइन थाने ले आई। जहां उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
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काम हो गया कहते दबोचा
अरविंद और इरशाद की फोन पर बातचीत के बारे में एंटी करप्शन टीम को पता था। शुक्रवार को टीम सुबह से कचहरी के आसपास मौजूद थी। इरशाद का फोन ऑन था। इरशाद ने पैसा देकर कहा कि काम हो गया। तभी एंटी करप्शन की टीम ने अरविंद को रंगेहाथ दबोच लिया। टीम में इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार, विजय कुमार, रणवीर खोकर, आनंद शर्मा समेत आठ लोग थे।
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विभाग का एक कर्मचारी भी शामिल
पीड़ित इरशाद का कहना है कि रिश्वत लेने में अरविंद के साथ उसके विभाग का एक ओर कर्मचारी शामिल था। जो अक्सर अरविंद के साथ रिश्वत के पैसा की सौदेबाजी करता था। एंटी करप्शन टीम की छापामारी में दूसरा कर्मचारी बच गया। क्योंकि वह उस समय ऑफिस में नहीं था।
रिश्वत लेना बड़ा अपराध
एंटी करप्शन इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार ने बताया कि रिश्वत लेना बड़ा अपराध है। उनकी टीम लगातार अलग-अलग विभाग के कर्मचारी और अधिकारियों को पकड़कर जेल भेजती है। दस दिन पहले एंटी करप्शन टीम ने कोतवाली थाने में तैनात दरोगा अमृता यादव को 20 हजार रुपये रिश्वत लेने दबोचा था। मुजफ्फरनगर में एक अधिकारी को पांच हजार की रिश्वत लेते पकड़ा था।