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किराना की दूकानों पर दिखने लगा असर
ब्यूररो,अमर उजाला/मऊ
Updated Fri, 18 Nov 2016 11:28 PM IST
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नोटबंदी के बाद नगर क्षेत्र के संस्कृत पाठशाला स्थित पंजाब नेशनल बैंक पर नोट बदलने के लिए लगी लंबी कतार।
नोटबंदी का असर अब किराना सहित विभिन्न तरह के दैनिक उपयोग के सामानों पर दिखने लगा है। छोटे व्यापारियों का कहना है कि बड़े कारोबारी नगद पर सामान दे रहे हैं। रुपया नहीं तो सामान नहीं और बाजार में ग्राहक नहीं तो फिर सामान के रेट धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं। बड़े कारोबारी बाहर से माल न आने का हवाला दे रहे हैं। वहीं खराब होने वाली सब्जियों के दाम दिन गिर रहे हैं। इससे किसानों की दशा खराब होने लगी है।
नोटबंदी की घोषणा के बाद जहां अभी भी बैंकों के सामने लाइन कम नहीं हो पा रही हैं तो इसका असर बाजार पर भी पड़ने लगा है। प्रतिदिन बैंकों पर भीड़ उसी तरह से लग रही है। इससे लोग अपना खुलकर काम धंधा नहीं कर पा रहे। किराना की दुकानों पर दाल, चावल, आटा, चीनी, तेल, घी के दामों में तेजी आनी शुरू हो गई है।
किराना के फुटकर दुकानदारों का कहना है कि फुटकर पैसे के अभाव में वह थोड़ा-थोड़ा माल ला रहे हैं। लेकिन बड़े दूकानदार पहले की अपेक्षा अधिक मूल्य पर सामान दे रहे हैं। बड़े कारोबारियों का कहना है कि माल बाहर से नहीं आने के चलते सामानों की कीमत बढ़ रही है। जो माल बचा है उसे फुटकर एवं नगदी रूप से बेच रहे हैं।
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कुछ जानकारों का कहना है कि बड़े व्यवसायी जो माल रखे हुए हैं वह जमाखोरी करके अधिक मूल्य कमाना चाहते हैं। क्यों कि बाहर से माल आने में भी नोटबंदी के चलते दिक्कतें आई हैं। हर व्यापारी अपने पैसे को बदलवाने उसे जमा करवाने के साथ ही नए नोट की ही डिमांड कर रहा है। इससे कारोबार पर अधिक असर है।
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नोटबंदी की घोषणा के बाद जहां अभी भी बैंकों के सामने लाइन कम नहीं हो पा रही हैं तो इसका असर बाजार पर भी पड़ने लगा है। प्रतिदिन बैंकों पर भीड़ उसी तरह से लग रही है। इससे लोग अपना खुलकर काम धंधा नहीं कर पा रहे। किराना की दुकानों पर दाल, चावल, आटा, चीनी, तेल, घी के दामों में तेजी आनी शुरू हो गई है।
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किराना के फुटकर दुकानदारों का कहना है कि फुटकर पैसे के अभाव में वह थोड़ा-थोड़ा माल ला रहे हैं। लेकिन बड़े दूकानदार पहले की अपेक्षा अधिक मूल्य पर सामान दे रहे हैं। बड़े कारोबारियों का कहना है कि माल बाहर से नहीं आने के चलते सामानों की कीमत बढ़ रही है। जो माल बचा है उसे फुटकर एवं नगदी रूप से बेच रहे हैं।
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कुछ जानकारों का कहना है कि बड़े व्यवसायी जो माल रखे हुए हैं वह जमाखोरी करके अधिक मूल्य कमाना चाहते हैं। क्यों कि बाहर से माल आने में भी नोटबंदी के चलते दिक्कतें आई हैं। हर व्यापारी अपने पैसे को बदलवाने उसे जमा करवाने के साथ ही नए नोट की ही डिमांड कर रहा है। इससे कारोबार पर अधिक असर है।