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चिकित्सकों से होती है अभद्रता, अस्पताल में नहीं है सुरक्षाकर्मी
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मऊ। जिला अस्पताल में सुरक्षा का कोई बंदोबस्त नहीं हैं। आए दिन चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों से अभद्रता आम बात हो गई है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई बार चिकित्सकों से लेकर स्वास्थ्य कर्मियों ने धरना-प्रदर्शन कर स्वास्थ्य सेवाओं का कार्य बहिष्कार भी किया, लेकिन कोई बदलाव नहीं हुआ। उधर अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था न होने से चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों में अंसतोष पनप रहा है। बावजूद जिला अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई कवायद न तो अस्पताल प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है न ही प्रशासन स्तर से।
जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है, चाहे वो चिकित्सकों की कमी का हो या संसाधनों के अभाव का। लेकिन सबसे बड़ी खामी है जिला अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था कोई ठोस इंतजाम न हो। जबकि जिले में 100 बेड का अस्पताल तथा जिला का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने के चलते प्रतिदिन यहां सैकड़ों मरीज इलाज कराने पहुंचते है। इस दौरान कई बार चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मरीज के साथ आए लोगों द्वारा चिकित्सकों से अभद्रता कर चुके है। सुरक्षा व्यवस्था न होने से सबसे ज्यादा विवाद की स्थिति इमरजेंसी में घटती है।
चिकित्सकों का तर्क है कि ईएमओ के पांचों पद रिक्त होने पर ओपीडी के चिकित्सकों द्वारा इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का उपचार किया जाता है। ऐसे में ओपीडी ड्यूटी के साथ उन्हें इमरजेंसी ड्यूटी करनी पड़ती है।इसके बाद भी कई बार मरीजों के परिजन अभद्रता कर बैठते है। अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था न होने से यह घटनाएं आए दिन होती है। बीते वर्ष जिले के एक सीनियर फिजिशियन से अभद्रता पर पीएमएस के अध्यक्ष डॉ. एके रंजन ने नेतृत्व में डाक्टरों ने प्रशासन को इस संबंध में पत्र सौंपा था।
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वहीं चिकित्सकों ने सीएमएस से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई बार अवगत करा चुके है, बावजूद सुरक्षा के लिए सुरक्षाकर्मियों की तैनाती नहीं हो सकी है। वहीं दूसरी तरफ महिला जिला अस्पताल प्रबंधन ने चिकित्सकों तथा मरीजों की सुरक्षा को लेकर तीन शिफ्टों में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।
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जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है, चाहे वो चिकित्सकों की कमी का हो या संसाधनों के अभाव का। लेकिन सबसे बड़ी खामी है जिला अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था कोई ठोस इंतजाम न हो। जबकि जिले में 100 बेड का अस्पताल तथा जिला का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने के चलते प्रतिदिन यहां सैकड़ों मरीज इलाज कराने पहुंचते है। इस दौरान कई बार चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मरीज के साथ आए लोगों द्वारा चिकित्सकों से अभद्रता कर चुके है। सुरक्षा व्यवस्था न होने से सबसे ज्यादा विवाद की स्थिति इमरजेंसी में घटती है।
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चिकित्सकों का तर्क है कि ईएमओ के पांचों पद रिक्त होने पर ओपीडी के चिकित्सकों द्वारा इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का उपचार किया जाता है। ऐसे में ओपीडी ड्यूटी के साथ उन्हें इमरजेंसी ड्यूटी करनी पड़ती है।इसके बाद भी कई बार मरीजों के परिजन अभद्रता कर बैठते है। अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था न होने से यह घटनाएं आए दिन होती है। बीते वर्ष जिले के एक सीनियर फिजिशियन से अभद्रता पर पीएमएस के अध्यक्ष डॉ. एके रंजन ने नेतृत्व में डाक्टरों ने प्रशासन को इस संबंध में पत्र सौंपा था।
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वहीं चिकित्सकों ने सीएमएस से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई बार अवगत करा चुके है, बावजूद सुरक्षा के लिए सुरक्षाकर्मियों की तैनाती नहीं हो सकी है। वहीं दूसरी तरफ महिला जिला अस्पताल प्रबंधन ने चिकित्सकों तथा मरीजों की सुरक्षा को लेकर तीन शिफ्टों में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।