फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mau News ›   The courage was not lost even after the husband's departure, the dream of both the sons was fulfilled

पति के जाने के बाद भी नहीं खोया साहस, दोनों बेटों का पूरा किया सपना

Sat, 07 May 2022 11:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 07 May 2022 11:30 PM IST
विज्ञापन
The courage was not lost even after the husband's departure, the dream of both the sons was fulfilled
अपने बेटों और बहु के साथ कोपागंज के मूंगमास निवासी द्रोपदी। संवाद - फोटो : MAU
अंतरराष्ट्रीय मातृ दिवस पर विशेष
विज्ञापन

पति के जाने के बाद भी नहीं खोया साहस, आज दोनों बेटों ने पूरा किया सपना
संवाद न्यूज एजेंसी
कोपागंज। कहते है कि हौसलों में अगर जान हो तो तो मुश्किलें घुटने टेक देती हैं। इस बात को चरितार्थ किया कोपागंज ब्लाक के मुंगमास निवासी एक महिला ने। जिसने अपने पति की मौत के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और खुद को संभाला और अपने पति की सपनों को पूरा करने में जुट गई। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न रहते हुए भी दोनों पुत्रों की पढ़ाई में आने वाली समस्याओं और लोकलाज छोड़कर उन्होंने अपनी देखरेख में खेती गृहस्थी का जिम्मा संभाला। दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ती रही और दोनों पुत्रों को कामयाब बनाया।

बात हो रही सदर तहसील के कोपागंज ब्लाक के मुंगमास निवासी स्व. इंद्रनरायण राय की पत्नी द्रौपदी राय की। पेशे से प्राइमरी स्कूल के शिक्षक इंद्रनरायण राय की 11 वर्ष पूर्व 2011 में एक ट्रेन हादसे में मौत हो गई थी। जिस समय यह हादसा हुआ उस समय स्व. इंद्र नरायण के बड़ा पुत्र नितेश नारायण राय एक एमबीए प्रथम वर्ष तो दूसरे पुत्र जितेश नारायण राय बीडीएस प्रथम वर्ष में दाखिला ले चुका थे। लेकिन पिता की मौत के बाद उनकी पढ़ाई आगे जारी रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गई। ऐसे विषम परिस्थिति में द्रौपदी देवी ने समाज की लोकलाज व परिवार की परेशानियों को दरकिनार करते हुए अपने दो बच्चो के साथ उन्होंने आगे बढ़ने की ठानी और लाख परेशानी के बावजूद अपना हौसला बुलंद रखा। पति के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण दोनों बच्चो की पढ़ाई में अड़चने सामने आने लगीं तो उन्होंने अपनी देखरेख में खेती-गृहस्थी का जिम्मा संभाला और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ती रहीं। साहस का ही सकारात्मक नतीजा रहा कि कुछ समय बीत जाने के बाद खेती से महीने की आमदनी 18 से 20 हजार होने लगी, जिससे बच्चों की पढ़ाई में काफी सहायता मिलने लगी। छह साल की कड़ी मेहनत के बाद द्रोपदी राय के बड़े बेटे नितेश नारायण राय चयन शिक्षा विभाग में हो गया। छोटे पुत्र जितेश नारायण राय का बीडीएस कोर्स पूरा होने के बाद लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी के लिए कानपुर और दिल्ली जाना पड़ा। दो साल की कड़ी मेहनत के बाद वर्ष 2019 में उनका चयन लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित डेंटल सर्जन की परीक्षा में चयन हो गया। सामान्य वर्ग में प्रदेश में 66वें पायदान पर चयनित होकर जितेश नारायण राय ने क्षेत्र का मान बढ़ाया। दोनों पुत्रों को सरकारी सेवा में नौकरी दिलाने के बाद भी द्रोपदी राय का संघर्ष अनवरत जारी है और दोनों पुत्रों की शादी के बाद भी बहुओं को भी उच्च शिक्षा दिलाने में कोई कसर नहीं रख रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed