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Mau News: व्यावसायिक भवन को आवासीय दिखाकर कराई रजिस्ट्री, तीन पर केस

Sat, 13 Apr 2024 12:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 13 Apr 2024 12:12 AM IST
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Registration of commercial building done by showing it as residential, case against three
मऊ। शासन की ओर से व्यावसायिक और औद्योगिक जमीन को छोड़कर शेष जमीनों पर अपने रक्त संबंधित लोगों को जमीन दान करने के नियम में छूट का गलत फायदा उठाने वाले तीन लोगों के विरूद्ध स्टांपवाद का मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें दो मोहम्मदाबाद गोहना तो एक मधुबन तहसील का है। इन तीनों की ओर से अपने व्यावसायिक भवन को आवासीय दिखाकर 12 लाख रुपये के राजस्व की चपत लगाई गई। दरअसल बीते सितंबर 2023 में जिले में दान की जानी वाली गैर कृषि भूमि रजिस्ट्री हुई तो जमीन को लेकर शासन की ओर से जांच का आदेश दिया गया। इसके बाद एआइजी स्टांप ने चार टीमें गठित की। वह मामले की जांच कर रही थी। अब एआईजी स्टांप की टीम अन्य किसी महीने में हुई रजिस्ट्री की भी जांच की तैयारी में जुटी है।
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बताते चलें कि सितंबर 2023 में रजिस्ट्री में छूट को लेकर नियम लागू किया, जो अभी तक चल रहा है। इसके तहत परिवार की संपत्ती का पारिवारिक सदस्यों के बीच बंटवारे के लिए संबंधित सदस्यों के पक्ष में दान विलेख (गिफ्ट डीड), बंटवारा पत्र व पारिवारिक व्यवस्थापन/समझौता ज्ञापन निष्पादन में सिर्फ पांच हजार रुपये की स्टांप ड्यूटी देनी है। यानी पांच हजार रुपये में लोग पारिवारिक सदस्य को जमीन दान में दे सकते हैं। इसकी जानकारी होने के बाद सितंबर में 138 गैर कृषि भूमि रजिस्ट्री इस छूट में हुई है। इस बीच छूट का गलत फायदा उठाने की शिकायतों को लेकर सभी जिलों में शासन की ओर से छूट के बाद सितंबर में हुई रजिस्ट्री की जांच का आदेश हुआ। जिसके बाद एआईजी स्टांप की ओर से जिले के चारों तहसील सदर, मोहम्मदाबाद गोहना, मधुबन और घोसी तहसील के संबंधित उपनबिंधकों को जांच की जिम्मेदारी दी गई। जांच के दौरान 135 रजिस्ट्री सही मिली, लेकिन तीन रजिस्ट्री में धोखाधड़ी की बात सामने आई। इसमें मोहम्मदाबाद गोहना तहसील में दो लोगों ने व्यावसायिक भवन को आवासीय दिखाकर सात लाख 61 हजार 290 रुपये की धोखाधड़ी मिली। वहीं मधुबन तहसील में इसी तरह से व्यावसायिक भवन को आवासीय दिखाकर चार लाख 28 हजार रुपये की धोखाधड़ी की गई। इस मामले में तीनों में स्टांप वाद दायर कर अन्य माह में हुई रजिस्ट्री की भी जांच शुरू कर दी गई है। गलत रजिस्ट्री कराने वाले लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
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क्या कहा है नियम

संपत्ति के विक्रय विलेख (सेल डीड) की रजिस्ट्री की तरह संपत्ति के मूल्य का सात प्रतिशत तक स्टांप ड्यूटी नहीं देनी है। दान विलेख के दायरे में आने वाले पारिवारिक सदस्यों में पिता, माता, पति, पत्नी, पुत्र, पुत्री, पुत्रवधु, दामाद, सगा भाई, सगी बहन, पुत्र व पुत्री के बेटा-बेटी के साथ ही सगे भाई की मृत्यु की दशा में उसकी पत्नी भी अपनी जमीन दान कर सकेगी। जबकि औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियों को दान नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा किसी संस्था को कोई जमीन दान नहीं की जा सकती है। ऐसे में सरकार से परिवारिक सदस्यों को जमीन की रजिस्ट्री सिर्फ पांच हजार रुपये के दान पत्र पर करने की छूट में शिकायतें मिलने लगी थी।

कोट

शासन के निर्देश पर टीम गठित कर दी गई थी, टीमों ने सितंबर में हुई रजिस्ट्री की मौके पर जा कर जांच की, जहां तीन द्वारा व्यवासायिक भवन को आवासीय दिखाकर छूट का फायदा उठाया था, जबकि नियम में व्यावसायिक भवन में छूट का प्रावधान नहीं है। संबंधित के विरुद्ध स्टांपवाद का मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।

-राकेश कुमार सिंह, एआइजी स्टांप मऊ।
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