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Mau News: यूएन महासभा में बोले राजीव-सतत विकास के लक्ष्यों से दूर भारत
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संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करते सांसद राजीव राय। स्रोत-स्वयं
मऊ। घोसी लोकसभा के सपा सांसद राजीव राय संयुक्त राष्ट्र महासभा के महाधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि सतत विकास लक्ष्यों से हम अभी दूर हैं। यूएन महासचिव की नवीनतम रिपोर्ट इस बात पर बल देती है कि वर्ष 2015 से लेकर अबतक प्रगति हुई है, लेकिन वर्ष 2030 तक के लक्ष्य से हम बहुत दूर हैं।
सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में आधी-अधूरी अथवा विपरीत दिशा में प्रगति हुई है। भारत इस बात पर जोर देता है कि सतत विकास लक्ष्य बहुपक्षीय संबंधों के केंद्र में बना रहना चाहिए। हम उन लघुद्वीपीय विकासशील देशों के साथ खड़े हैं, जिनकी परेशानियों को उनके लिए एंटीगुआ और बरबुडा एजेंडे में रेखांकित किया गया है। भारत ने रियायती वित्त पोषण, क्षमता निर्माण और भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के माध्यम से लघु द्वीपीय विकासशील देशों के साथ अपनी साझेदारी को मजबूती दी है। आपदा जोखिम को कम करने के संदर्भ में हम सेंडाई फ्रेमवर्क को याद करते हैं। इस बात पर जोर देते हैं कि पूर्व चेतावनी प्रणालियों, जोखिम आधारित योजना और सुदृढ़ बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
भारत जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई के संबंध में समता और साझा, लेकिन विभेदीकृत दायित्व के सिद्धांत पर जोर देता है। सीओपी 29 में अंगीकार किया गया। जलवायु के लिए वित्तपोषण के लिए नया सामूहिक परिमाणित लक्ष्य निराशाजनक था। विकसित देशों को अपने ओडीए दायित्वों के अलावा जलवायु संबंधी वित्तपोषण की प्रतिबद्धताओं को लेकर और अधिक उदारता बरतनी चाहिए। सतत पर्वतीय विकास, रेत और धूल भरी आंधियों से निपटने और तटीय क्षेत्र प्रबंधन को मजबूत करने के संदर्भ में भारत अपनी विकास रणनीति में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखता है, क्योंकि यह उत्तर में हिमालय से लेकर भारतीय प्रायद्वीप के पूर्वी और पश्चिमी तटों और भारत के पश्चिम में शुष्क रेगिस्तान तक विविध प्रकार के पारिस्थितिक तंत्रों से घिरा है। भारत की भगौलिक चुनौतियां अधिक हैं।
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भारत 2030 के एजेंडे के वादे को पूरा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी पीछे न छूटे, सभी भागीदारों के साथ मिलकर काम करने के अपने दृढ़ संकल्प को हम दोहराते हैं।
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सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में आधी-अधूरी अथवा विपरीत दिशा में प्रगति हुई है। भारत इस बात पर जोर देता है कि सतत विकास लक्ष्य बहुपक्षीय संबंधों के केंद्र में बना रहना चाहिए। हम उन लघुद्वीपीय विकासशील देशों के साथ खड़े हैं, जिनकी परेशानियों को उनके लिए एंटीगुआ और बरबुडा एजेंडे में रेखांकित किया गया है। भारत ने रियायती वित्त पोषण, क्षमता निर्माण और भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के माध्यम से लघु द्वीपीय विकासशील देशों के साथ अपनी साझेदारी को मजबूती दी है। आपदा जोखिम को कम करने के संदर्भ में हम सेंडाई फ्रेमवर्क को याद करते हैं। इस बात पर जोर देते हैं कि पूर्व चेतावनी प्रणालियों, जोखिम आधारित योजना और सुदृढ़ बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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भारत जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई के संबंध में समता और साझा, लेकिन विभेदीकृत दायित्व के सिद्धांत पर जोर देता है। सीओपी 29 में अंगीकार किया गया। जलवायु के लिए वित्तपोषण के लिए नया सामूहिक परिमाणित लक्ष्य निराशाजनक था। विकसित देशों को अपने ओडीए दायित्वों के अलावा जलवायु संबंधी वित्तपोषण की प्रतिबद्धताओं को लेकर और अधिक उदारता बरतनी चाहिए। सतत पर्वतीय विकास, रेत और धूल भरी आंधियों से निपटने और तटीय क्षेत्र प्रबंधन को मजबूत करने के संदर्भ में भारत अपनी विकास रणनीति में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखता है, क्योंकि यह उत्तर में हिमालय से लेकर भारतीय प्रायद्वीप के पूर्वी और पश्चिमी तटों और भारत के पश्चिम में शुष्क रेगिस्तान तक विविध प्रकार के पारिस्थितिक तंत्रों से घिरा है। भारत की भगौलिक चुनौतियां अधिक हैं।
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भारत 2030 के एजेंडे के वादे को पूरा करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी पीछे न छूटे, सभी भागीदारों के साथ मिलकर काम करने के अपने दृढ़ संकल्प को हम दोहराते हैं।