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Mau News: परशुरामपुर गांव की मुस्लिम महिलाओं ने भी रखा छठ व्रत
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लकुरा में छठ पर्व पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान मौजूद मुस्लिम महिलाएं।
विरेंद्र प्रजापति
रामपुर बेलौली। मधुबन के परशुरामपुर गांव की मुस्लिम महिलाओं ने छठ व्रत रख गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की है। व्रती मुस्लिम महिलाओं ने सोमवार को विधि विधान से लकुरा स्थित तालाब पर बने घाट पर अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। मंगलवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर कर व्रत का पारण करेंगी।
परशुरामपुर गांव की मुस्लिम महिलाएं भी डाला छठ का व्रत रखती हैं। कई सालों से छठ पूजा कर रहीं महिलाओं का कहना है कि हमारे लिए परिवार सबसे पहले है।अगर किसी व्रत को रखने से घर में खुशहाली आए , तो इसमें कुछ गलत नहीं है। ये महिलाएं हिंदुओं के अन्य त्योहार भी पूरी श्रद्धा से मनाती हैं। इनका मानना है कि इससे समाज में आपसी प्रेम और अमन-चैन भी बना रहता है। आस्था के पर्व छठ पूजा पर परशुरामपुर गांव निवासिनी हसीबुन पत्नी ज्ञासुद्दीन ने बताया कि पोते की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। पोता पागलपन का जीवन यापन करता था। पोते के ठीक होने के लिए हसीबुन ने पांच वर्ष पूर्व से छठ पर्व का व्रत रखना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे पोता ठीक हो गया। इस वर्ष भी सोमवार को हसीबुन ने विधि विधान से पूजन अर्चन कर अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्यदान दिया। इन्ताज पत्नी नैमून सहित कई मुस्लिम महिलाओं ने परिवार की सुख समृद्धि के लिए अस्ताचलगामी भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिया।
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रामपुर बेलौली। मधुबन के परशुरामपुर गांव की मुस्लिम महिलाओं ने छठ व्रत रख गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की है। व्रती मुस्लिम महिलाओं ने सोमवार को विधि विधान से लकुरा स्थित तालाब पर बने घाट पर अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। मंगलवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर कर व्रत का पारण करेंगी।
परशुरामपुर गांव की मुस्लिम महिलाएं भी डाला छठ का व्रत रखती हैं। कई सालों से छठ पूजा कर रहीं महिलाओं का कहना है कि हमारे लिए परिवार सबसे पहले है।अगर किसी व्रत को रखने से घर में खुशहाली आए , तो इसमें कुछ गलत नहीं है। ये महिलाएं हिंदुओं के अन्य त्योहार भी पूरी श्रद्धा से मनाती हैं। इनका मानना है कि इससे समाज में आपसी प्रेम और अमन-चैन भी बना रहता है। आस्था के पर्व छठ पूजा पर परशुरामपुर गांव निवासिनी हसीबुन पत्नी ज्ञासुद्दीन ने बताया कि पोते की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। पोता पागलपन का जीवन यापन करता था। पोते के ठीक होने के लिए हसीबुन ने पांच वर्ष पूर्व से छठ पर्व का व्रत रखना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे पोता ठीक हो गया। इस वर्ष भी सोमवार को हसीबुन ने विधि विधान से पूजन अर्चन कर अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्यदान दिया। इन्ताज पत्नी नैमून सहित कई मुस्लिम महिलाओं ने परिवार की सुख समृद्धि के लिए अस्ताचलगामी भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिया।

लकुरा में छठ पर्व पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान मौजूद मुस्लिम महिलाएं।
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