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Mau News: मोबाइल के प्रति प्यार, पति-पत्नी के बीच बन रहा तकरार
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मऊ। मोबाइल के प्रति प्यार पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते में तकरार का कारण बन गया है। हालात यह है कि घरेलू हिंसा के मामलों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, इसमें मोबाइल के चलते संबंध बिखराव का ग्राफ 50 फीसदी है। इस वर्ष अगस्त माह तक 300 घरेलू मामले परिवार परामर्श के पास पहुंचे। इसमें अधिकतर मामलों में तो पति-पत्नी में अलगाव की नौबत तक आ चुकी है। बिखराव में मोबाइल की भूमिका अहम है। परिवार परामर्श की सदस्या अर्चना उपाध्याय ने बताया कि पति और पत्नी के रिश्ते में अविश्वास के कारण कई घर बर्बाद हो रहे हैं। हर दूसरे रविवार को आयोजित होने वाली परिवार परामर्श की विशेष बैठक में घरेलू मामलों की सुनवाई होती है। इसमें 20 से ज्यादा मामले पहुंचते हैं। इनमें सबसे अधिक मामलों में मोबाइल रिश्ते को तोड़ने में प्रमुख कारण बना है। अन्य मामलों में पति की खराब आदत और दहेज उत्पीड़न, घरेलू कलह आदि भी रिश्ते के बीच दरार बन रहे हैं।
बताया कि 2023 में जनवरी से अगस्त तक 300 मामले परिवार परामर्श के पास आ चुके हैं। हालांकि 62 मामलों को निस्तारण किया जा चुका है। बताया कि इसी तरह से 2022 में 277 मामले आए थे, इसमें 52 मामलों का निस्तारण किया गया। वहीं 2021 में 240 मामलों में 50 से ज्यादा मामलों का निस्तारण किया गया था। बताया कि इन मामलों में मोबाइल से बात करने को लेकर अविश्वास नए जोड़ों में भी मतभेद ला रहा है। इसका ग्राफ 5 फीसदी है। इसमें कुछ मामलों में अलगाव तक की स्थिति है। इसमें मोबाइल से किसी तीसरे से बात करने के अलावा मायके पक्ष से मां, बहन, भाई के ज्यादा देर तक बात करना ही विवाद का मुख्य वजह बन रहा है।
2015 के बाद मोबाइल के विवाद का बढ़ने लगा ग्राफ : मऊ।घरेलू हिंसा से परिवार का विघटन रोकने के उद्देश्य से परिवार परामर्श की बैठक पुलिस प्रशासन द्वारा वर्ष 2009 से कराया जा रहा है। शुरूआती समय में इस बैठक में दहेज की मांग, पति के शराब, स्मैक, चरस आदि नशा करने से भी मियां बीबी के बीच विवाद उत्पन्न होने के मामले ज्यादा थे, मोबाइल से विवाद के मामलों का ग्राफ बहुत कम था। लेकिन 2015 के बाद इन मामलों में वृद्धि होने लगी, जो कि 2018 के बाद आने वाले 10 मामलों में 3 मामले तो इससे संबंधित होने लगे।
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बताया कि 2023 में जनवरी से अगस्त तक 300 मामले परिवार परामर्श के पास आ चुके हैं। हालांकि 62 मामलों को निस्तारण किया जा चुका है। बताया कि इसी तरह से 2022 में 277 मामले आए थे, इसमें 52 मामलों का निस्तारण किया गया। वहीं 2021 में 240 मामलों में 50 से ज्यादा मामलों का निस्तारण किया गया था। बताया कि इन मामलों में मोबाइल से बात करने को लेकर अविश्वास नए जोड़ों में भी मतभेद ला रहा है। इसका ग्राफ 5 फीसदी है। इसमें कुछ मामलों में अलगाव तक की स्थिति है। इसमें मोबाइल से किसी तीसरे से बात करने के अलावा मायके पक्ष से मां, बहन, भाई के ज्यादा देर तक बात करना ही विवाद का मुख्य वजह बन रहा है।
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2015 के बाद मोबाइल के विवाद का बढ़ने लगा ग्राफ : मऊ।घरेलू हिंसा से परिवार का विघटन रोकने के उद्देश्य से परिवार परामर्श की बैठक पुलिस प्रशासन द्वारा वर्ष 2009 से कराया जा रहा है। शुरूआती समय में इस बैठक में दहेज की मांग, पति के शराब, स्मैक, चरस आदि नशा करने से भी मियां बीबी के बीच विवाद उत्पन्न होने के मामले ज्यादा थे, मोबाइल से विवाद के मामलों का ग्राफ बहुत कम था। लेकिन 2015 के बाद इन मामलों में वृद्धि होने लगी, जो कि 2018 के बाद आने वाले 10 मामलों में 3 मामले तो इससे संबंधित होने लगे।
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