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नगर के ढेकुलियाघाट स्थित कर्मचारी राज्य बीमा औषधालय के जर्जर भवन में कार्य करते चिकित्सक।संवाद
- फोटो : MAU
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मऊ। जिले के कई सरकारी कार्यालयों के भवन जर्जर हो गए हैं। कर्मचारी इनमें दहशत के साए में काम कर रहे हैं। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसे नजरंदाज किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वह जान हथेली पर लेकर नौकरी कर रहे हैं। जबकि उच्चाधिकारी सब जानते हुए भी लापरवाह बने हुए हैं। जर्जर भवनों में अधिकतर सरकारी अस्पताल और शिक्षा विभाग से जुड़े भवन शामिल हैं। दशकों पूर्व बने जिला अस्पताल के कई भवन जर्जर हाल में हैं। जर्जर कक्ष में एनसीडी क्लीनिक संचालित हो रही है। कक्ष की दीवार फट गई है। चिकित्सक तथा स्वास्थ्यकर्मी दहशत में काम कर रहे हैं। जिले के चार तहसील के नौ ब्लाकों में आयुर्वेद के 29 तथा यूनानी के छह अस्पताल हैं। केवल 11 अस्पताल ही सरकारी भवन में संचालित हो रहे हैं। इसमें कसारा, अमिला, कमलसागर, डुमरांव, गोकुलपुरा सहित आठ अस्पताल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। सबसे बदतर हालत तो अमिला तथा कसारा में संचालित अस्पताल की है। यहां कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी किसी अनहोनी घटना के डर से भवन के बजाए बाहर परिसर में मरीज को देखते हैं। मनोज कुमार मिश्रा, दयाशंकर पांडेय, रामदुलारे यादव बताते हैं कि दशकों से अस्पताल का भवन जर्जर हाल में है। इलाज कराने के दौरान हादसा होने का खतरा हमेशा बना है। लेकिन अधिकारी मौन हैं। उधर, नगर के ढेकुलियाघाट स्थित कर्मचारी राज्य बीमा अस्पताल किराए के जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी तथा कर्मचारी दहशत के बीच काम कर रहे हैं। नगर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों के परिषदीय विद्यालयों के कैंपस में निष्प्रयोज्य जर्जर भवन दुर्घटना को दावत दे रहे हैं। अवकाश के बाद कई बच्चे जर्जर भवनों के पास खेलते देखे जाते हैं। अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर दहशतजदा हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से स्कूल कैंपस में 76 निष्प्रयोज्य जर्जर भवनों का मूल्यांकन करने के लिए एक वर्ष पूर्व शासन से गठित तीन सदस्यीय टीम को पत्र भेजा, लेकिन टीम की उदासीनता के चलते अभी केवल 22 भवनों का ही मूल्यांकन हुआ है। मूल्यांकन काफी अधिक होने से नीलामी प्रक्रिया में कोई शामिल होने को तैयार नहीं हो रहा है।
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