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खतरा बिंदु की तरफ तेजी से बढ़ती जा रही घाघरा
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दोहरीघाट। घाघरा का जलस्तर जैसे-जैसे बढ़ता जा रहा है। वैसे-वैसे कस्बा सहित तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कनें बढ़ने लगी है। घाघरा नदी के जलस्तर में 24 घंटे में 35 सेमी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। नदी के रौद्र रूप धारण करने से ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
घाघरा नदी में जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी रहने से तटवर्ती इलाके के लोगों की माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं।
नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो मंगलवार को घाघरा का जलस्तर 69.15 मीटर रहा। जबकि बुधवार को जलस्तर 69.50 मीटर पर पहुंच गया। इस प्रकार घाघरा के जलस्तर में बीते 24 घंटे में 35 सेमी की बढ़ोत्तरी दर्ज को गई। जबकि नदी का खतरा बिंदु 69.90 है।
इन दिनों जिस तरह घाघरा का जलस्तर बढ़ रहा है उससे यही लगता है कि जल्द ही घाघरा खतरा बिंदु को पार कर जाएगी। जिससे नगरवासियों व तटवर्ती इलाकों में दहशत बना हुआ है। एक तरफ जहां किसानों को बाढ़ से अपनी धान के फसल का नुकसान होने को आशंका सता रही है तो वही नगरवासियों को नगर की ऐतिहासिक धरोहरो के आस्तिव खतरे में नजर आ रहा है। घाघरा की लहरें भारतमाता मंदिर की दीवारों से टकरा रही हैं। नदी के रौद्र रूप धारण करते देख कस्बेवासी सहम जा रहे है। इसके बावजूद अधिकारियों के कान पर जू तक नहीं रेग रहा है।
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कटानरोधी कार्य खाकी बाबा की कुटी से नगर के डीह बाबा को कुटी तक 300 मीटर के अपरन पिचिंग का कार्य अभी भी पूर्ण नहीं हो सका है। नदी में तेजी से बढ़ रहे जलस्तर से जहां मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर,खाकी बाबा की कुटी लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, हनुमान मंदिर, शाही मस्जिद, डीह बाबा का मंदिर सहित विभिन्न ऐतिहासिक धरोहरों पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं बहादुरपुर, रामव्पुर धनौली, नई बाजार, नवली, सरया, पतनई, ठाकुरगाव, गोधनी बीवीपुर ताहिरपुर, जमीरा चौराडीह, कोरौली, बेलौली, ठीकरहिया, रसूलपुर, सूरजपुर में नदी के कहर बरपाने का खतरा बढ़ सकता है।
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घाघरा नदी में जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी रहने से तटवर्ती इलाके के लोगों की माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं।
नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो मंगलवार को घाघरा का जलस्तर 69.15 मीटर रहा। जबकि बुधवार को जलस्तर 69.50 मीटर पर पहुंच गया। इस प्रकार घाघरा के जलस्तर में बीते 24 घंटे में 35 सेमी की बढ़ोत्तरी दर्ज को गई। जबकि नदी का खतरा बिंदु 69.90 है।
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इन दिनों जिस तरह घाघरा का जलस्तर बढ़ रहा है उससे यही लगता है कि जल्द ही घाघरा खतरा बिंदु को पार कर जाएगी। जिससे नगरवासियों व तटवर्ती इलाकों में दहशत बना हुआ है। एक तरफ जहां किसानों को बाढ़ से अपनी धान के फसल का नुकसान होने को आशंका सता रही है तो वही नगरवासियों को नगर की ऐतिहासिक धरोहरो के आस्तिव खतरे में नजर आ रहा है। घाघरा की लहरें भारतमाता मंदिर की दीवारों से टकरा रही हैं। नदी के रौद्र रूप धारण करते देख कस्बेवासी सहम जा रहे है। इसके बावजूद अधिकारियों के कान पर जू तक नहीं रेग रहा है।
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कटानरोधी कार्य खाकी बाबा की कुटी से नगर के डीह बाबा को कुटी तक 300 मीटर के अपरन पिचिंग का कार्य अभी भी पूर्ण नहीं हो सका है। नदी में तेजी से बढ़ रहे जलस्तर से जहां मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर,खाकी बाबा की कुटी लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, हनुमान मंदिर, शाही मस्जिद, डीह बाबा का मंदिर सहित विभिन्न ऐतिहासिक धरोहरों पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं बहादुरपुर, रामव्पुर धनौली, नई बाजार, नवली, सरया, पतनई, ठाकुरगाव, गोधनी बीवीपुर ताहिरपुर, जमीरा चौराडीह, कोरौली, बेलौली, ठीकरहिया, रसूलपुर, सूरजपुर में नदी के कहर बरपाने का खतरा बढ़ सकता है।