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बोलने की स्वतंत्रता असीमित नहीं, कोई कहीं भी, कभी भी, कुछ भी नहीं बोल सकता : कोर्ट

Sat, 31 May 2025 11:59 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 31 May 2025 11:59 PM IST
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Freedom of speech is not unlimited, no one can say anything, anywhere, anytime: Court
वाराणसी/मऊ। मऊ सदर विधानसभा क्षेत्र से सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी के नफरती भाषण के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट / विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) डॉ. केपी सिंह की अदालत ने 48 पेज का फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि संविधान हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है। मगर, यह अधिकार असीमित नहीं है। कोई कहीं भी, कभी भी, कुछ भी नहीं बोल सकता है।
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अदालत ने कहा कि राजनीतिक क्षेत्र जैसे लोक सेवा में नफरत या भड़काऊ भाषण की कोई जगह नहीं है। यह तब और गंभीर हो जाता है, जब आशय धर्म के आधार पर अव्यवस्था करके चुनाव को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने की हो।
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अदालत ने कहा कि जिले में नियुक्त अधिकारी आदर्श आचार संहिता के समय चुनाव आयोग के सीधे नियंत्रण में होते हैं। उन्हें चुनाव बाद रोककर हिसाब-किताब किए जाने की धमकी दी जाती है तो निश्चित रूप से यह अप्रत्यक्ष रूप से मतदाताओं के मन में भी डर का भाव पैदा करना है। भारत जैसे विविधता भरे देश में भड़काऊ भाषण से देश व समाज की भी क्षति होती है। ऐसे जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद अपना पूरा समय विपक्षियों को सबक सिखाने में बर्बाद करेंगे, जिसकी लोकतंत्र और समाज में न कोई जगह है न वह स्वीकार्य है।
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दंड देने का एक सामाजिक उद्देश्य होता है



अदालत ने कहा कि दांडिक मामले में दंड निर्धारित किए जाने से पहले अपराध की प्रकृति व परिस्थितियों और अभियुक्तों की भागीदारी का संज्ञान लिए जाने की आवश्यकता होती है। आपराधिक मामले में दंड दिए जाने का एक सामाजिक उद्देश्य होता है। दोषसिद्ध व्यक्तियों को न केवल इस बात का यह अहसास होना चाहिए कि उनके द्वारा अपराध किया गया है। बल्कि, पीड़ित पक्ष को भी यह अहसास होना चाहिए कि उसके साथ न्याय हुआ है। इसी प्रकार दंड दिए जाने का उद्देश्य यह भी होना चाहिए कि समाज में यह संदेश जा सके कि अपराध करने पर गंभीर रूप से दंडित किया जा सकता है।


दंड देने में नरमी दोषी का मनोबल बढ़ाना होगा



अदालत ने कहा कि यदि दंड देने में नरमी की जाती है, तब संभवतः यह उन लोगों का मनोबल बढ़ाना होगा जो चुनावी प्रतिद्वंद्विता को व्यक्ति शत्रुता समझ लेते हैं। साथ ही, सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने का प्रयास करते हैं। उनके इस बर्ताव का खामियाजा आम जनमानस को भुगतना पड़ता है। अभियुक्त अब्बास अंसारी के गंभीर आपराधिक इतिहास देखते हुए परिवीक्षा का लाभ देने का कोई औचित्य नहीं है। इसलिए परिवीक्षा का प्रार्थना पत्र निरस्त किया जाता है।
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